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मातम कर इमाम की शहादत को याद किया
Updated Fri, 10 Nov 2017 12:07 AM IST
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फिरोजाबाद। शिया यूथ कन्वेंशन द्वारा गुरुवार को चैहल्लुम का जुलूस शिया इमाम बारगाह कोटला मोहल्ला से निकाला गया। जुलूस में शामिल नौजवानों ने छुरी, ब्लेड व कमा का मातक कर इमाम की शहादत को याद किया।
चैहल्लुम का जुलूस शिया इमाम बारगाह से शुरू हुआ, जो अरशी पब्लिक स्कूल, पत्थर वाली गली, गढ्ैया मोहल्ला, मुंसफी रोड होते हुए जफर अली इमाम बारगाह पर पहुंचा। यहां से जुलूस पुन: प्रारंभ हुआ, जो शिया इमाम बारगाह मोहल्ला कोटला पर पहुंच कर समाप्त हुआ।
जुलूस अंजुमन ए अब्बासिया के नौजवानों द्वारा निकाला गया, जिसमें अंजुमन के नौजवानों ने छुरी, कमा से शरीर का लहूलुहान कर इमाम की शहादत को याद किया। जुलूस से पहले मजलिस अजा मुनकिद हुई, जिसको अली जनाब मौलाना जीशान खान ने संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम एक ऐसा दीन है, जो मुहब्बत, अलावत, मिठास व अमन पसंद मजहब है। हम सब को मुहब्बत-ए-रसूल और आले रसूल के बताए पर चलने की जरूरत है। जुलूस लियाकत अली, वारिस अली, मजहर अली सरपरस्ती में निकाला गया। जुलूस की बागडोर इस्तिखार अली संभाले हुए थे।
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चैहल्लुम का जुलूस शिया इमाम बारगाह से शुरू हुआ, जो अरशी पब्लिक स्कूल, पत्थर वाली गली, गढ्ैया मोहल्ला, मुंसफी रोड होते हुए जफर अली इमाम बारगाह पर पहुंचा। यहां से जुलूस पुन: प्रारंभ हुआ, जो शिया इमाम बारगाह मोहल्ला कोटला पर पहुंच कर समाप्त हुआ।
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जुलूस अंजुमन ए अब्बासिया के नौजवानों द्वारा निकाला गया, जिसमें अंजुमन के नौजवानों ने छुरी, कमा से शरीर का लहूलुहान कर इमाम की शहादत को याद किया। जुलूस से पहले मजलिस अजा मुनकिद हुई, जिसको अली जनाब मौलाना जीशान खान ने संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम एक ऐसा दीन है, जो मुहब्बत, अलावत, मिठास व अमन पसंद मजहब है। हम सब को मुहब्बत-ए-रसूल और आले रसूल के बताए पर चलने की जरूरत है। जुलूस लियाकत अली, वारिस अली, मजहर अली सरपरस्ती में निकाला गया। जुलूस की बागडोर इस्तिखार अली संभाले हुए थे।