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भगवान के चरणों में चढ़ जाता है 7200 क्विंटल फूल
Updated Tue, 27 Mar 2018 08:13 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। भगवान कृष्ण की नगरी में छोटे बड़े मंदिरों में चढ़ने वाले फूल की मात्रा को अगर जोड़ लिया जाए तो अकेले गर्मियों में ही 7200 क्विंटल फूल ठाकुरजी के चरणों में चढ़ जाता है। बाद में इस फूल को यमुना में बहा दिया जाता है।
मथुरा और वृंदावन को मंदिरों का शहर कहा जाता है। भगवान कृष्ण की इस नगरी में पांच हजार मंदिर हैं। सबसे ज्यादा मंदिर वृंदावन में हैं। यूं तो साल भर भगवान के चरणों में फूल चढ़ाए जाते हैं लेकिन गर्मियों के दिनों में फूल की मांग कई गुना बढ़ जाती है। अप्रैल से फूलबंगले सजने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
अप्रैल से जुलाई तक फूलबंगले सजाए जाते हैं। बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन में तो इन महीनों में हर रोज फूलबंगले सजाए जाते हैं। फूल बंगला सजाने वाले एक्सपर्ट की अगर माने तो चार महीनों में अकेले वृंदावन में ही चार हजार क्विंटल फूल की खपत हर रोज हो जाती है।
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मथुरा के साथ ही दिल्ली से भी फूल मंगवाया जाता है। वहीं मथुरा में भी श्री कृष्ण जन्मस्थान और द्वारिकाधीश पर हर रोज फूलबंगले सजाए जाएंगे। गोकुल, बरसाना, गोवर्धन, नंदगांव और महावन के मंदिरों में भी भगवान को गर्मी से राहत दिलाने के लिए फूलबंगले सजाए जाएंगे। मथुरा में भी दो हजार क्विंटल फूल रोज लग जाता है। कुल मिलाकर छह हजार क्विंटल फूल की जरूरत रोज पड़ेगी। इस हिसाब से चार महीने में 7200 क्विंटल फूल का प्रयोग हो जाता है।
- वृंदावन में अप्रैल से जुलाई तक हर रोज इस्तेमाल होगा चार हजार किलो फूल
- मथुरा, गोकुल, बरसाना, नंदगांव के मंदिरों में हर रोज दो हजार किलो फूल चढ़ेगा
हर मंदिर को महकाएगी वृंदावन में बनने वाली अगरबत्ती
भगवान पर चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती और धूपबत्ती तैयार होगी। वृंदावन में इसका बड़ा सेंटर तैयार होगा। 450 विधवा महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है। मंदिरों पर चढ़ने वाले फूल को इन सेंटरों पर भेजा जाएगा जहां धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाई जाएगी।
धर्मनगरी वृंदावन में फूलों से बनने वाली धूपबत्ती और अगरबत्ती की सप्लाई देश भर में होगी। अगरबत्ती बनाने की मशीन लगने जा रही है। मशीन लगने के साथ ही धूपबत्ती बनाने का काम शुरू हो जाएगा। बताया जा रहा है कि वृंदावन धूपबत्ती और अगरबत्ती का देश में सबसे बड़ा सेंटर होगा। चैतन्य विहार कालोनी में स्थित महिला आश्रय सदन में 300 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। अगले चरण में 140 महिलाओं को और जोड़ा जाएगा। ट्रेनिंग कन्नौज के फ्रेंगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर द्वारा दी जा रही है।
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मथुरा और वृंदावन को मंदिरों का शहर कहा जाता है। भगवान कृष्ण की इस नगरी में पांच हजार मंदिर हैं। सबसे ज्यादा मंदिर वृंदावन में हैं। यूं तो साल भर भगवान के चरणों में फूल चढ़ाए जाते हैं लेकिन गर्मियों के दिनों में फूल की मांग कई गुना बढ़ जाती है। अप्रैल से फूलबंगले सजने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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अप्रैल से जुलाई तक फूलबंगले सजाए जाते हैं। बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन में तो इन महीनों में हर रोज फूलबंगले सजाए जाते हैं। फूल बंगला सजाने वाले एक्सपर्ट की अगर माने तो चार महीनों में अकेले वृंदावन में ही चार हजार क्विंटल फूल की खपत हर रोज हो जाती है।
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मथुरा के साथ ही दिल्ली से भी फूल मंगवाया जाता है। वहीं मथुरा में भी श्री कृष्ण जन्मस्थान और द्वारिकाधीश पर हर रोज फूलबंगले सजाए जाएंगे। गोकुल, बरसाना, गोवर्धन, नंदगांव और महावन के मंदिरों में भी भगवान को गर्मी से राहत दिलाने के लिए फूलबंगले सजाए जाएंगे। मथुरा में भी दो हजार क्विंटल फूल रोज लग जाता है। कुल मिलाकर छह हजार क्विंटल फूल की जरूरत रोज पड़ेगी। इस हिसाब से चार महीने में 7200 क्विंटल फूल का प्रयोग हो जाता है।
- वृंदावन में अप्रैल से जुलाई तक हर रोज इस्तेमाल होगा चार हजार किलो फूल
- मथुरा, गोकुल, बरसाना, नंदगांव के मंदिरों में हर रोज दो हजार किलो फूल चढ़ेगा
हर मंदिर को महकाएगी वृंदावन में बनने वाली अगरबत्ती
भगवान पर चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती और धूपबत्ती तैयार होगी। वृंदावन में इसका बड़ा सेंटर तैयार होगा। 450 विधवा महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है। मंदिरों पर चढ़ने वाले फूल को इन सेंटरों पर भेजा जाएगा जहां धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाई जाएगी।
धर्मनगरी वृंदावन में फूलों से बनने वाली धूपबत्ती और अगरबत्ती की सप्लाई देश भर में होगी। अगरबत्ती बनाने की मशीन लगने जा रही है। मशीन लगने के साथ ही धूपबत्ती बनाने का काम शुरू हो जाएगा। बताया जा रहा है कि वृंदावन धूपबत्ती और अगरबत्ती का देश में सबसे बड़ा सेंटर होगा। चैतन्य विहार कालोनी में स्थित महिला आश्रय सदन में 300 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। अगले चरण में 140 महिलाओं को और जोड़ा जाएगा। ट्रेनिंग कन्नौज के फ्रेंगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर द्वारा दी जा रही है।