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रजबहा कटने से गांव पिलखतरा में घुसा पानी:
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:21 PM IST
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रजबहा कटने से गांव पिलखतरा में घुसा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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जलेसर। पिलकतरा के निकट रजबहा की पटरी के कटान को 24 घंटे हो जाने के बाद भी सिंचाई खंड हाथरस का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। पानी निरंतर बढ़ने से ग्रामीणों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
गत दिवस सांसद आदर्श गांव पिलखतरा के निकट ग्राम नगला सकत में अवागढ़ की ओर जाने वाले रजबहा के कटने से करीब एक हजार बीघा जमीन जलमग्न हो गई है। रजबहा के कटान के चलते जहां धान सिगाडे, बाजरा आदि की फसल आदर्श ग्राम पिलखतरा के किनारे तक पहुंच पाया है। पानी रोकने के उपाय न हुण् तो मकानों में पानी घुसने लगेगा।
मौजूदा समय में जिला हाथरस के दो गांव नगला गड़रिया, नगला सकत एवं जनपद एटा के गांव खेरिया में ग्रामीणों को भारी असुविधा हो रही है। वहीं पिलखतरा ग्राम भी टापू बनने की ओर अग्रसर है। पिलखतरा निवासी बुजुर्ग रामवीर सिंह एवं महीपाल सिंह ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व कटान हुआ था। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा स्थिति को संभाल लिया था। लेकिन मौजूदा समय में 24 घंटे बाद भी कोई कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ रही है। जल भराव से स्थिति इतनी भयावह है कि पिलखतरा सेे सिर्फ कानऊ रोड के लिये रास्ता बचा है। अन्य स्थानों के लिये रास्ता बंद हो चुका है।
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गत दिवस सांसद आदर्श गांव पिलखतरा के निकट ग्राम नगला सकत में अवागढ़ की ओर जाने वाले रजबहा के कटने से करीब एक हजार बीघा जमीन जलमग्न हो गई है। रजबहा के कटान के चलते जहां धान सिगाडे, बाजरा आदि की फसल आदर्श ग्राम पिलखतरा के किनारे तक पहुंच पाया है। पानी रोकने के उपाय न हुण् तो मकानों में पानी घुसने लगेगा।
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मौजूदा समय में जिला हाथरस के दो गांव नगला गड़रिया, नगला सकत एवं जनपद एटा के गांव खेरिया में ग्रामीणों को भारी असुविधा हो रही है। वहीं पिलखतरा ग्राम भी टापू बनने की ओर अग्रसर है। पिलखतरा निवासी बुजुर्ग रामवीर सिंह एवं महीपाल सिंह ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व कटान हुआ था। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा स्थिति को संभाल लिया था। लेकिन मौजूदा समय में 24 घंटे बाद भी कोई कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ रही है। जल भराव से स्थिति इतनी भयावह है कि पिलखतरा सेे सिर्फ कानऊ रोड के लिये रास्ता बचा है। अन्य स्थानों के लिये रास्ता बंद हो चुका है।
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