राम, लक्ष्मण और सीता के शृंगार में लगते हैं छह घंटे

Agra Bureau Updated Sun, 17 Sep 2017 08:05 PM IST
राम, लक्ष्मण और सीता के शृंगार में लगते हैं छह घंटे
कलाकारों को तैयार करते। - फोटो : अमर उजाला
मथुरा। राम-लक्ष्मण और सीता के शृंगार में ही आठ घंटे लग जाते हैं। दोपहर तीन बजे से ही इन्हें सजाने संवारने का काम शुरू हो जाता है। चेहरे पर राजाओं जैसा रूआब लाने को गुजरात के सूरत शहर से स्पेशल जोइल क्रीम मंगवाई जाती है। चेहरे के शृंगार में ही दो घंटे लग जाते हैं। एक बार के शृंगार में 20 से लेकर 25 हजार तक का खर्च आता है।
रामलीला सभा द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर की जा रही रामलीला में श्रीराम, जानकी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न का राजसी शैली में मुख शृंगार किया जाता है। रामलीला में 30 साल से मुख शृंगार की सेवा कर रहे दरेसी रोड सुभाष नगर निवासी उमेश कु मार बताते हैं कि रामलीला के सभी प्रमुख पांच स्वरूपों के शृंगार में 10 साल पूर्व भुड़भुड़ का प्रयोग होता था, लेकिन अब भुड़भुड़ नहीं मिलती। अब गुजरात के सूरत से जोइल व चांदी की कटोरी से ठाकुर जी का मुख शृंगार करते हैं। इसमें केसर, चंदन, गुलाब, केवड़ा, कुंदन व माणिक का प्रयोग होता है। एक स्वरूप का शृंगार करने में दो घंटे का वक्त लगता है। उमेश बताते हैं इस काम में उनका सहयोग कुशक गली के विष्णु शर्मा, असकुंडा के आनंद शर्मा, घीयामंडी के सुरेश चंद्र भी मनोयोग से ठाकुर के मुख शृंगार में जुटे रहते हैं। सबसे ज्यादा मेहनत ठाकुर जी के नयन, भौंह व तिलक बनाने में होती है।
रामलीला में पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, रामबरात, दशहरा, भरत मिलाप व राजगद्दी के दिन विशेष चांदी की कटोरी से मुख शृंगार होता है। इस शृंगार में एक स्वरूप के शृंगार पर पांच हजार का खर्चा आता है। रामलीला भले ही रात को साढ़े आठ बजे से शुरू होती है लेकिन पात्रों को सजाने का काम दोपहर को दो बजे से ही शुरू हो जाता है। सभी प्रमुख कलाकारों को दोपहर के दो बजे तक रामलीला स्थल पर बुला लिया जाता है।

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