{"_id":"5c7c1051bdec2211df414793","slug":"171551634513-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाभारतकालीन है पटना पक्षी विहार के इच्छेश्वर महादेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महाभारतकालीन है पटना पक्षी विहार के इच्छेश्वर महादेव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जलेसर। पर्यटक स्थल पटना पक्षी विहार स्थिति इच्छेश्वर महादेव महाभारत कालीन है। पौराणिक कथाओं एवं किदविंतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थल पर मौजूद विशाल झील मे कालिया नामक दैत्य का वध किया था एवं अपनी प्रेयसी रुक्मणि के साथ विवाह किया था। इसी के चलते महाशिवरात्रि पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचती है।
----------
श्रद्धालु बोले, बड़े दयालु हैं महादेव
- इच्छेश्वर महादेव के दर्शन करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भोले बाबा सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। अंकुश गुप्ता, शिवभक्त
- भोले बाबा के दर्शन करने के लिए हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के दिन बाबा के दर्शन करना शुभ होता है। -रिंकू ठाकुर
- इच्छेश्वर महादेव का मंदिर महाभारत काल का है। मंदिर के साथ कई कहानियां जुड़ी हैं। शिवरात्रि पर आने वाली भीड़ को लेकर तैयारियां कर ली गईं हैं। - धीरज कुमार, शिवभक्त
- महादेव के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ आती है। कांवड़ चढ़ाने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। -बृजेश वाष्र्णेय
----------
श्रद्धालु बोले, बड़े दयालु हैं महादेव
- इच्छेश्वर महादेव के दर्शन करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भोले बाबा सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। अंकुश गुप्ता, शिवभक्त
- भोले बाबा के दर्शन करने के लिए हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के दिन बाबा के दर्शन करना शुभ होता है। -रिंकू ठाकुर
- इच्छेश्वर महादेव का मंदिर महाभारत काल का है। मंदिर के साथ कई कहानियां जुड़ी हैं। शिवरात्रि पर आने वाली भीड़ को लेकर तैयारियां कर ली गईं हैं। - धीरज कुमार, शिवभक्त
विज्ञापन
- महादेव के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ आती है। कांवड़ चढ़ाने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। -बृजेश वाष्र्णेय