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गन्ना किसानों का बकाया शीघ्र किया जाए भुगतान
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:03 AM IST
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गन्ना लदा ट्रैक्टर।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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कासगंज।
रालोद ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से गन्ना एवं आलू किसानों की समस्याओं को रखा गया। समस्याओं का शीघ्र निदान कराने की मांग की गई है।
जिला अध्यक्ष शमीम अहमद अल्वी ने कहा कि देश में गन्ना किसानों का 22000 करोड़ रुपये भुगतान के लिए बकाया है। जिसमें से प्रदेश में गन्ना किसानों का लगभग 12000 करोड़ रुपये बकाया चीनी मिलों पर चल रहा है। केंद्र सरकार से गन्ना किसानों के भुगतान के लिए 7000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया है। इस उपलब्ध धनराशि पर प्रदेश सरकार मौन बनी हुई है। किसान के नाम पर आवंटित धनराशि पूर्व की तरह ही अधिकारियों व मिल मालिकों के बीच बंदरबांट का शिकार हो सकती है। प्रदेश सरकार ने सहकारी व सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को निजी क्षेत्र में बेच दिया। कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ये चीनी मिलें चालू नहीं हो सकी हैं। जिससे गन्ना किसान अपना गन्ना सस्ते दामों पर निजी कोल्हू को बेचने को मजबूर हो जाते हैं। केद्र सरकार द्वारा आलू पर आयात शुल्क पर 10 प्रतिशत की कमी किए जाने से शीत गृह पर रखे आलू का मूल्य कम होने लगा है। गन्ना किसानों का बकाया ब्याज सहित शीघ्र भुगतान कराया जाए। आलू पर आयात शुल्क बढ़ाकर पूर्व की भांति 20 प्रतिशत किया जाए। विगत वर्ष घोषित परिवहन भाड़ा अनुदान की धनराशि को अविलंब किसानों को वितरित किया जाए तथा अब तक वितरित धनराशि में हुए गोलमाल की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस दौरान राम सिंह वर्मा, राम प्रकाश वर्मा, मास्टर अंजुम रूमानी आदि मौजूद रहे।
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रालोद ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से गन्ना एवं आलू किसानों की समस्याओं को रखा गया। समस्याओं का शीघ्र निदान कराने की मांग की गई है।
जिला अध्यक्ष शमीम अहमद अल्वी ने कहा कि देश में गन्ना किसानों का 22000 करोड़ रुपये भुगतान के लिए बकाया है। जिसमें से प्रदेश में गन्ना किसानों का लगभग 12000 करोड़ रुपये बकाया चीनी मिलों पर चल रहा है। केंद्र सरकार से गन्ना किसानों के भुगतान के लिए 7000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया है। इस उपलब्ध धनराशि पर प्रदेश सरकार मौन बनी हुई है। किसान के नाम पर आवंटित धनराशि पूर्व की तरह ही अधिकारियों व मिल मालिकों के बीच बंदरबांट का शिकार हो सकती है। प्रदेश सरकार ने सहकारी व सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को निजी क्षेत्र में बेच दिया। कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ये चीनी मिलें चालू नहीं हो सकी हैं। जिससे गन्ना किसान अपना गन्ना सस्ते दामों पर निजी कोल्हू को बेचने को मजबूर हो जाते हैं। केद्र सरकार द्वारा आलू पर आयात शुल्क पर 10 प्रतिशत की कमी किए जाने से शीत गृह पर रखे आलू का मूल्य कम होने लगा है। गन्ना किसानों का बकाया ब्याज सहित शीघ्र भुगतान कराया जाए। आलू पर आयात शुल्क बढ़ाकर पूर्व की भांति 20 प्रतिशत किया जाए। विगत वर्ष घोषित परिवहन भाड़ा अनुदान की धनराशि को अविलंब किसानों को वितरित किया जाए तथा अब तक वितरित धनराशि में हुए गोलमाल की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस दौरान राम सिंह वर्मा, राम प्रकाश वर्मा, मास्टर अंजुम रूमानी आदि मौजूद रहे।
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