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मेरे ‘ठाकुर जी’ को गर्मी न लगे
Updated Sun, 08 Apr 2018 08:17 PM IST
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कृष्णा
- फोटो : डैमो
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वृंदावन (मथुरा)। ब्रज की भक्ति भी निराली है और भगवान भी अपने भक्तों की भावनाओं के वशीभूत होते हैं। ऐसी ही भक्ति भरी भावना के अनुरूप गर्मी के इस मौसम से अपने ठाकुर जी को बचाने के लिए भक्त हर जतन कर रहे हैं। आराध्य को गर्मी न लगे इसके लिए भक्त अपने आराध्य को सूती (काटन) की पोशाकें पहना रहे हैं। बदले मौसम की तरह ही बाजारों में भी बदलाव शुरू हो गया है। मांग को देखते हुए ठाकुरजी के सूती वस्त्र बाजार में आ गए हैं।
कई तरह की डिजाइनयुक्त, रंगों से बनीं सूती पोशाक बाजार में बिक्री के लिए आ गई हैं। इन पोशाकों को खरीदने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता और श्रद्धा का भाव देखा जा सकता है। पोशाक व्यापारी कमल खंडेलवाल, मोहनलाल अग्रवाल, श्याम बिहारी, राजकुमार गौतम ने बताया कि गर्मी का मौसम आने से एक महीने पहले ही सूती पोशाकों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया जाता है। इन पोशाकों को कारीगर हाथों से या मशीनों द्वारा भी तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि दस से लेकर हजारों रुपये तक की कीमतों की ठाकुरजी की पोशाकें बाजार में उपलब्ध हैं।
करोड़ों का है व्यापार
वृंदावन का पोशाक और शृंगार का कारोबार का ग्राफ वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा है। भारत ही नहीं विदेशों तक वृंदावन में बनीं पोशाकों की मांग का नतीजा है कि कई गांवों में यह कारोबार फैल चुका है। कारोबार का टर्न ओवर करोड़ों तक पहुंच गया है। व्यापारी दीपक गोयल की मानें तो वर्ष भर में पोशाक का व्यापार 10 से 15 करोड़ रुपये का हो जाता है।
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एक हजार से ज्यादा परिवार लगे इस कार्य में
वृंदावन के साथ ही गांव धौरेरा, तेहरा, पानीगांव, अहिल्यागंज, लक्ष्मी नगर, सुनरख, आटस, बड़ी आट्स, गोपालगढ़, गांव राजपुर, छटीकरा, जैंत, बाटी, राल आदि ग्रामीण अंचलों में फैले पोशाक निर्माण कार्य में एक हजार से अधिक परिवार जुड़े हैं।
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कई तरह की डिजाइनयुक्त, रंगों से बनीं सूती पोशाक बाजार में बिक्री के लिए आ गई हैं। इन पोशाकों को खरीदने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता और श्रद्धा का भाव देखा जा सकता है। पोशाक व्यापारी कमल खंडेलवाल, मोहनलाल अग्रवाल, श्याम बिहारी, राजकुमार गौतम ने बताया कि गर्मी का मौसम आने से एक महीने पहले ही सूती पोशाकों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया जाता है। इन पोशाकों को कारीगर हाथों से या मशीनों द्वारा भी तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि दस से लेकर हजारों रुपये तक की कीमतों की ठाकुरजी की पोशाकें बाजार में उपलब्ध हैं।
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करोड़ों का है व्यापार
वृंदावन का पोशाक और शृंगार का कारोबार का ग्राफ वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा है। भारत ही नहीं विदेशों तक वृंदावन में बनीं पोशाकों की मांग का नतीजा है कि कई गांवों में यह कारोबार फैल चुका है। कारोबार का टर्न ओवर करोड़ों तक पहुंच गया है। व्यापारी दीपक गोयल की मानें तो वर्ष भर में पोशाक का व्यापार 10 से 15 करोड़ रुपये का हो जाता है।
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एक हजार से ज्यादा परिवार लगे इस कार्य में
वृंदावन के साथ ही गांव धौरेरा, तेहरा, पानीगांव, अहिल्यागंज, लक्ष्मी नगर, सुनरख, आटस, बड़ी आट्स, गोपालगढ़, गांव राजपुर, छटीकरा, जैंत, बाटी, राल आदि ग्रामीण अंचलों में फैले पोशाक निर्माण कार्य में एक हजार से अधिक परिवार जुड़े हैं।