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जिले में दस लाख क्विंटल आलू फिंकने के कगार पर
Updated Tue, 19 Dec 2017 11:40 PM IST
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अालू
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद/सिरसागंज। जिले के 158 कोल्ड स्टोरेज में कैद सब्जियों के राजा आलू फिंकने के कगार पर आ गया। उसे कोई मिट्टी के भाव तक खरीदने को तैयार नहीं है। जिले में दस लाख से ज्यादा आलू अभी भी कोल्ड स्टोरेज में कैद है। आलू फिंकाई के कारण उससे फैलने वाली दुर्गंध से बचाव को कोल्ड संचालकों को ही मेहनत करनी पड़ रही है।
सुहागनगरी आलू उत्पादन का हब बन गई। जिले के करीब डेढ़ लाख के करीब किसान सीधे आलू उत्पादन से जुड़े हैं। सिरसागंज, नारखी, शिकोहाबाद, टूंडला का एक बड़ा क्षेत्रफल में सिर्फ आलू की फसल की बुवाई होती है। किसानों को तो कभी फायदे की फसल रहा सब्जियों का राजा आलू उन्हें तो रुलाने का काम कर रहा है।
आलू की बाजार में इतनी मिट्टी खराब हो जाएगी इसकी उम्मीद अन्नदाता को नहीं थी। हाल यह है कि दिसंबर माह आधे से अधिक बीत गया लेकिन कोल्ड स्टोरेज मे आज भी दस लाख क्विंटल से अधिक ही आलू रखा हुआ है। कोल्ड संचालकों की मानें तो आलू को लेने के लिए कोई किसान नहीं आ रहा है। टेलीफोन करके संपर्क साधने के साथ गांव में सूचना तक भेजी जा रही है
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लेकिन बाजार में नए आलू की दस्तक दे देने के कारण पुराने आलू को किसी भाव खरीदने को तैयार नहीं हैं। हालात यह हैं कि कोल्ड संचालक आलू फेंकने की तैयारी करने लगे हैं। उद्यान विभाग के सूत्रों की मानें तो आलू की लगातार हो रही बर्बादी के चलते किसानों ने 58 हजार हेक्टेयर में ही आलू की फसल की बुवाई की है।
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सुहागनगरी आलू उत्पादन का हब बन गई। जिले के करीब डेढ़ लाख के करीब किसान सीधे आलू उत्पादन से जुड़े हैं। सिरसागंज, नारखी, शिकोहाबाद, टूंडला का एक बड़ा क्षेत्रफल में सिर्फ आलू की फसल की बुवाई होती है। किसानों को तो कभी फायदे की फसल रहा सब्जियों का राजा आलू उन्हें तो रुलाने का काम कर रहा है।
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आलू की बाजार में इतनी मिट्टी खराब हो जाएगी इसकी उम्मीद अन्नदाता को नहीं थी। हाल यह है कि दिसंबर माह आधे से अधिक बीत गया लेकिन कोल्ड स्टोरेज मे आज भी दस लाख क्विंटल से अधिक ही आलू रखा हुआ है। कोल्ड संचालकों की मानें तो आलू को लेने के लिए कोई किसान नहीं आ रहा है। टेलीफोन करके संपर्क साधने के साथ गांव में सूचना तक भेजी जा रही है
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लेकिन बाजार में नए आलू की दस्तक दे देने के कारण पुराने आलू को किसी भाव खरीदने को तैयार नहीं हैं। हालात यह हैं कि कोल्ड संचालक आलू फेंकने की तैयारी करने लगे हैं। उद्यान विभाग के सूत्रों की मानें तो आलू की लगातार हो रही बर्बादी के चलते किसानों ने 58 हजार हेक्टेयर में ही आलू की फसल की बुवाई की है।