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बिना ई-टेंडर प्रक्रिया के खरीद लिया 30 लाख का सामान
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एटा। जिले में मीजल्स रूबेला टीकाकरण कार्यक्रम के नाम पर बड़ा घोटाला हो गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बिना ई-टेडरिंग किए लाखों रुपये का सामान खरीद लिया। प्रमुख सचिव ने शिकायत मिलने के बाद डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में डीएम ने तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच शुरू करा दी है।
जिले में मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान के नाम पर प्रचार-प्रसार मद में शासन से मिली धनराशि में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने गोलमाल कर दिया। इस मद से प्रचार-प्रसार के लिए सामान खरीद की जानी थी। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने मीजल्स रूबेला के प्रचार प्रसार और अन्य प्रपत्रों की छपाई एवं खरीद में मनमाने तरीके से प्राइवेट फर्म का चयन कर लिया और फर्म से फर्जी बिल वाउचरों को बनवाकर करीब 30 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
इसकी शिकायत शासन और प्रशासन से की गई। शिकायत को आधार मानते हुए प्रमुख सचिव ने डीएम को कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए। शासन के आदेश एवं निर्देश पर डीएम ने सीडीओ, एडीएम वित्त एवं राजस्व और कोषाधिकारी की टीम बनाकर जांच शुरू करा दी है। जांच में बड़े स्तर पर घोटाले की बात सामने आ रही है। हालांकि अधिकारियों ने अभी स्पष्ट नहीं किया है कि सामने खरीदने में कितनी धनराशि का गोलमाल किया गया है? और इस प्रकरण में कौन-कौन शामिल हैं। इसकी भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी प्रदेश में कई अन्य जिलों में भी प्राइवेट फार्मों से सामान खरीद की बात कह रहे हैं और प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ एटा जिले की जांच शामिल किए जाने का हवाला दिया जा रहा है।
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इस सामान की हुई खरीद
मीजल्स रूबेला के प्रचार प्रसार करने और लोगों को जागरूक करने के लिए होर्डिंग बार्ड, पंफलेट, बैनर, सूचना कार्ड, टैलीशीट, प्रपत्र-1 से 11, मार्कर, पैन, प्रमाण पत्र आदि सामान की खरीद की गई है। इस सामान की खरीद में घोटाला करने की शिकायत हुई।
एमआर टीकाकरण के प्रचार प्रसार और अन्य सामान को बिना ई-टेंडर के माध्यम से खरीदने वाले प्रदेश भर के कई जिलों की शासन ने जांच कराई है। इसमें एटा जिला भी शामिल है। इसकी प्रशासनिक स्तर से कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई जा चुकी है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ एटा
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प्रमुख सचिव के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है। सीडीओ, एडीएम वित्त एवं राजस्व और कोषाधिकारी को जांच सौंपी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आईपी पांडेय, डीएम एटा
जिले में मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान के नाम पर प्रचार-प्रसार मद में शासन से मिली धनराशि में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने गोलमाल कर दिया। इस मद से प्रचार-प्रसार के लिए सामान खरीद की जानी थी। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने मीजल्स रूबेला के प्रचार प्रसार और अन्य प्रपत्रों की छपाई एवं खरीद में मनमाने तरीके से प्राइवेट फर्म का चयन कर लिया और फर्म से फर्जी बिल वाउचरों को बनवाकर करीब 30 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
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इसकी शिकायत शासन और प्रशासन से की गई। शिकायत को आधार मानते हुए प्रमुख सचिव ने डीएम को कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए। शासन के आदेश एवं निर्देश पर डीएम ने सीडीओ, एडीएम वित्त एवं राजस्व और कोषाधिकारी की टीम बनाकर जांच शुरू करा दी है। जांच में बड़े स्तर पर घोटाले की बात सामने आ रही है। हालांकि अधिकारियों ने अभी स्पष्ट नहीं किया है कि सामने खरीदने में कितनी धनराशि का गोलमाल किया गया है? और इस प्रकरण में कौन-कौन शामिल हैं। इसकी भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी प्रदेश में कई अन्य जिलों में भी प्राइवेट फार्मों से सामान खरीद की बात कह रहे हैं और प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ एटा जिले की जांच शामिल किए जाने का हवाला दिया जा रहा है।
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इस सामान की हुई खरीद
मीजल्स रूबेला के प्रचार प्रसार करने और लोगों को जागरूक करने के लिए होर्डिंग बार्ड, पंफलेट, बैनर, सूचना कार्ड, टैलीशीट, प्रपत्र-1 से 11, मार्कर, पैन, प्रमाण पत्र आदि सामान की खरीद की गई है। इस सामान की खरीद में घोटाला करने की शिकायत हुई।
एमआर टीकाकरण के प्रचार प्रसार और अन्य सामान को बिना ई-टेंडर के माध्यम से खरीदने वाले प्रदेश भर के कई जिलों की शासन ने जांच कराई है। इसमें एटा जिला भी शामिल है। इसकी प्रशासनिक स्तर से कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई जा चुकी है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ एटा
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प्रमुख सचिव के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है। सीडीओ, एडीएम वित्त एवं राजस्व और कोषाधिकारी को जांच सौंपी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आईपी पांडेय, डीएम एटा