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दुष्कर्मी को 12 साल की सजा
Updated Wed, 28 Nov 2018 11:17 PM IST
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मैनपुरी। थाना बेवर क्षेत्र में पांच साल की बालिका से दुष्कर्म के आरोपी को दोषी मानते हुए अपर जिला जज अष्टम पॉक्सो एक्ट के जज अशोक कुमार ने 12 साल की सजा सुनाई है। तीन साल पहले की गई वारदात के इस मामले में 10 हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा।
थाना बेवर क्षेत्र के एक गांव की पांच साल की बालिका 10 अप्रैल, 2015 की शाम सात बजे गांव में एक दुकान पर सामान खरीदने गई थी। लौटते समय गांव के ही जितेंद्र उर्फ भूरा शाक्य ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बालिका ने घर पहुंचकर मां को बताया तो रात नौ बजे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने भूरा के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला जज अष्टम पॉक्सो एक्ट अशोक कुमार की कोर्ट में हुई। गवाही के आधार पर भूरा पर दुष्कर्म का आरोप सही पाया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने कड़ी सजा देने की दलील दी। अपर जिला जज ने 12 साल और 10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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दुष्कर्म के दोषी भूरा को पुलिस ने घटना के बाद ही जेल भेज दिया था। उसकी जमानत किसी भी अदालत से मंजूर नहीं हुई। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। बुधवार को वह निर्णय सुनने के लिए जेल से आया। सजा सुनाए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने दलील दी कि आरोपी ने मासूम बालिका के साथ जो अपराध किया है, वह गंभीर अपराध है। उन्होंने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की। अपर जिला जज ने 12 साल की सजा सुनाई।
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थाना बेवर क्षेत्र के एक गांव की पांच साल की बालिका 10 अप्रैल, 2015 की शाम सात बजे गांव में एक दुकान पर सामान खरीदने गई थी। लौटते समय गांव के ही जितेंद्र उर्फ भूरा शाक्य ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बालिका ने घर पहुंचकर मां को बताया तो रात नौ बजे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने भूरा के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
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मुकदमे की सुनवाई अपर जिला जज अष्टम पॉक्सो एक्ट अशोक कुमार की कोर्ट में हुई। गवाही के आधार पर भूरा पर दुष्कर्म का आरोप सही पाया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने कड़ी सजा देने की दलील दी। अपर जिला जज ने 12 साल और 10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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दुष्कर्म के दोषी भूरा को पुलिस ने घटना के बाद ही जेल भेज दिया था। उसकी जमानत किसी भी अदालत से मंजूर नहीं हुई। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। बुधवार को वह निर्णय सुनने के लिए जेल से आया। सजा सुनाए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने दलील दी कि आरोपी ने मासूम बालिका के साथ जो अपराध किया है, वह गंभीर अपराध है। उन्होंने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की। अपर जिला जज ने 12 साल की सजा सुनाई।