{"_id":"5b3a5aa94f1c1b28438b4569","slug":"161530550953-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल खुले और फिर हो गया रैनी डे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल खुले और फिर हो गया रैनी डे
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
स्कूल जाती बच्चिचां
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। नए शैक्षिक सत्र के पहले दिन स्कूल खुले और बगैर शिक्षण कार्य के ही बंद हो गए। बरसात के चलते अधिकांश विद्यालयों में रैनी डे घोषित कर दिया गया। स्कूल के लिए तैयार हुए बच्चे वापस हो गए। कुछ विद्यालयों में अवश्य शैक्षिक गतिविधियां हुईं।
इस बार सोमवार को नए शैक्षिक सत्र की शुरूआत बरसात के साथ हुई। पहले से ही स्कूल जाने की तैयारियों में जुटे विद्यार्थी और अभिभावक मौसम के इस मिजाज को देखते हुए विचलित थे। ऐसे में विद्यालय प्रबंधनों ने भी बगैर किसी देरी के रैनी डे का संदेश अभिभावकों को भेज दिया। इसे पढ़कर अभिभावकों ने राहत की सांस ली। लेकिन अनेक विद्यालयों ने अवकाश घोषित नहीं किया तो अनेक अभिभावक अपने बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंचे।
इस दौरान अभिभावकों को बरसात के दौरान शहर में हुए जलभराव की समस्या से गुजरना पड़ा। अनेक स्थानों पर अभिभावक रास्ते की बदहाली को देख वापस लौट आए। अनेक लोगों ने जलभराव से गुजरते हुए बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। हालांकि इस दौरान इन विद्यालयों में छात्र उपस्थिति बहुत कम नजर आई। सरकारी विद्यालयों में भी यही स्थिति थी। शिक्षकों को छोड़कर छात्र कहीं नहीं थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बार सोमवार को नए शैक्षिक सत्र की शुरूआत बरसात के साथ हुई। पहले से ही स्कूल जाने की तैयारियों में जुटे विद्यार्थी और अभिभावक मौसम के इस मिजाज को देखते हुए विचलित थे। ऐसे में विद्यालय प्रबंधनों ने भी बगैर किसी देरी के रैनी डे का संदेश अभिभावकों को भेज दिया। इसे पढ़कर अभिभावकों ने राहत की सांस ली। लेकिन अनेक विद्यालयों ने अवकाश घोषित नहीं किया तो अनेक अभिभावक अपने बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंचे।
विज्ञापन
इस दौरान अभिभावकों को बरसात के दौरान शहर में हुए जलभराव की समस्या से गुजरना पड़ा। अनेक स्थानों पर अभिभावक रास्ते की बदहाली को देख वापस लौट आए। अनेक लोगों ने जलभराव से गुजरते हुए बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। हालांकि इस दौरान इन विद्यालयों में छात्र उपस्थिति बहुत कम नजर आई। सरकारी विद्यालयों में भी यही स्थिति थी। शिक्षकों को छोड़कर छात्र कहीं नहीं थे।
विज्ञापन