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तालवन में ठा. राधारमण लाल ने की दामोदर लीला
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वृंदावन (मथुरा)। ठा. राधारमण मंदिर में निकुंज सेवा महोत्सव के चौथे दिन द्वादश वनविहार लीलांतर्गत तालवन निकुंज में विराजमान होकर भगवान ने दर्शन दिए। भजन गायिका आस्था गोस्वामी ने स्वर साधना से आराध्य की राग सेवा की।
मंदिर के सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी के आचार्यत्व में प्रात: श्रीमद्भागवत कथा, चैतन्य भागवत एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ 26 पंडितों द्वारा किया गया। शाम को केले के पत्ते, ताड़ के वृक्ष एवं मोगरा के पुष्पों से तालवन निकुंज बनाया, जिसमें ठा. राधारमण लाल विराजमान हुए।
ठा. राधारमण लाल ने दामोदर स्वरूप में दर्शन दिए और ऊखल बंधन लीला का दर्शन हुआ। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि तालवन में ही ठा. राधारमण महाराज ने ऊखल बंधन लीला की थी और उनके दामोदर स्वरूप में दर्शन हुए।
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भजन गायिका आस्था गोस्वामी ने ठा. राधारमण लाल के समक्ष बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल..., मुकुंद माधव गोविंद बोल..., जय प्राणधन राधारमण, मेरो प्राणधन राधारमण..., मोहन कहन लागै मैया-मैया... आदि भजन प्रस्तुत किए। संध्या आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की। भक्तों का स्वागत सेवायत आचार्य अभिनव गोस्वामी ने किया।
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मंदिर के सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी के आचार्यत्व में प्रात: श्रीमद्भागवत कथा, चैतन्य भागवत एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ 26 पंडितों द्वारा किया गया। शाम को केले के पत्ते, ताड़ के वृक्ष एवं मोगरा के पुष्पों से तालवन निकुंज बनाया, जिसमें ठा. राधारमण लाल विराजमान हुए।
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ठा. राधारमण लाल ने दामोदर स्वरूप में दर्शन दिए और ऊखल बंधन लीला का दर्शन हुआ। आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि तालवन में ही ठा. राधारमण महाराज ने ऊखल बंधन लीला की थी और उनके दामोदर स्वरूप में दर्शन हुए।
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भजन गायिका आस्था गोस्वामी ने ठा. राधारमण लाल के समक्ष बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल..., मुकुंद माधव गोविंद बोल..., जय प्राणधन राधारमण, मेरो प्राणधन राधारमण..., मोहन कहन लागै मैया-मैया... आदि भजन प्रस्तुत किए। संध्या आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की। भक्तों का स्वागत सेवायत आचार्य अभिनव गोस्वामी ने किया।