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आलू की पैदावार खास, उद्योग की पूरी नहीं हुई आस
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आलू
- फोटो : amar ujala
आलू जिले की प्रमुख पैदावार है, हर वर्ष अपने खून पसीने से किसान आलू की फसल को सींचता है। आलू से कई किसान राजा बने तो कई रंग, दोनों के बीच यह खेल वर्षों से चला आ रहा है। वर्षों से जिले में आलू आधारित उद्योग की मांग भी उठती रही है। सफेदपोश नेताओं से किसानों को हर चुनाव में आश्वासन मिले, लेकिन आलू आधारित उद्योग आज तक नहीं मिला।
-20 हजार हेक्टेयर है जिले में आलू का रकवा
-05 लाख मीट्रिक टन के करीब होती है पैदावार
-48 शीतगृह हैं जिले में आलू भंडारण के लिए
मैनपुरी। पिछले वर्ष आलू की फसल में किसान बड़ा नुकसान उठा चुके हैं। फसल का भाव इतना भी नहीं मिला कि किसान शीतगृह के किराए की भरपाई कर पाते। नतीजतन किसानों ने हजारों क्विंटल आलू शीतगृह में भी छोड़ दिया। आलू की बेकदरी इस कदर हुई कि शीतगृहों से सड़कों पर आलू फेंक दिया गया।
अगर जिले में आलू आधारित उद्योग होता तो शायद ऐसा नहीं होता। किसान इसीलिए आलू आधारित उद्योग की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं। इसके लिए किसान संगठनों ने कई बार मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे। किसानों का कहना है कि जिले में आलू आधारित उद्योग होगा तो फसल की मांग बढ़ेगी। इससे उन्हें फसल का उचित मूल्य मिलेगा। देश की दूसरी मंडियों पर निर्भर नहीं रहता पड़ेगा। इसके अलावा किसान सरकारी शीतगृह खोले जाने की मांग भी कर चुके हैं।
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-20 हजार हेक्टेयर है जिले में आलू का रकवा
-05 लाख मीट्रिक टन के करीब होती है पैदावार
-48 शीतगृह हैं जिले में आलू भंडारण के लिए
मैनपुरी। पिछले वर्ष आलू की फसल में किसान बड़ा नुकसान उठा चुके हैं। फसल का भाव इतना भी नहीं मिला कि किसान शीतगृह के किराए की भरपाई कर पाते। नतीजतन किसानों ने हजारों क्विंटल आलू शीतगृह में भी छोड़ दिया। आलू की बेकदरी इस कदर हुई कि शीतगृहों से सड़कों पर आलू फेंक दिया गया।
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अगर जिले में आलू आधारित उद्योग होता तो शायद ऐसा नहीं होता। किसान इसीलिए आलू आधारित उद्योग की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं। इसके लिए किसान संगठनों ने कई बार मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे। किसानों का कहना है कि जिले में आलू आधारित उद्योग होगा तो फसल की मांग बढ़ेगी। इससे उन्हें फसल का उचित मूल्य मिलेगा। देश की दूसरी मंडियों पर निर्भर नहीं रहता पड़ेगा। इसके अलावा किसान सरकारी शीतगृह खोले जाने की मांग भी कर चुके हैं।
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