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घोड़ा-घोड़ी के साथ 84 कोस की परिक्रमा कर रहे ओमप्रकाश, इंद्रजीत
Updated Thu, 24 May 2018 08:15 PM IST
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घोड़ा-घोड़ी लेकर परिक्रमा लगाते ओमप्रकाश और इंद्रजीत।
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। घोड़ा, घोड़ी से प्रेम आगरा जैतपुर के लोगों को ब्रज 84 कोस की परिक्रमा मेें भी खींच लाया। जैंतपुर के दो लोग घोड़ा और घोड़ी के साथ ब्रज 84 कोस की परिक्रमा लगा रहे हैं। तड़के उठकर पहले घोड़ा घोड़ी को नहलाकर उनका शृंगार करते हैं फिर खुद तैयार होकर परिक्रमा को निकलते हैं।
आगरा के कस्बा जैंतपुर के गांव पखोदना निवासी ओमप्रकाश और इंद्रजीत ने 10 साल पहले घोड़ा और घोड़ी के बच्चों को पाला था। दोनों से ओमप्रकाश व इंद्रजीत इतना प्यार करते हैं कि वे ब्रज 84 कोस में दोनों को अपने साथ ले आए। मांट के गांव हरनौल में ठहरे ओमप्रकाश, इंद्रजीत ने बताया कि वे तड़के तीन बजे जागते हैं।
पहले घोड़ा और घोड़ी को नहलाते हैं और फिर उनका शृंगार करते हैं। ग्रामीणों से चारे का इंतजाम करने के बाद खुद तैयार होते हैं। परिक्रमा में वे घोड़ा घोड़ी पर सवारी नहीं करते और पैदल ही चलते हैं। कहते हैं कि दोनों को बचपन से पाला है तो घर पर अकेला नहीं छोड़ पाते। दोनों इतने सीधे हैं कि आज तक किसी बच्चे को नहीं मारा। छोटे-छोटे बच्चे घोड़ा-घोड़ी के नीचे घूमते रहते हैं।
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आगरा के कस्बा जैंतपुर के गांव पखोदना निवासी ओमप्रकाश और इंद्रजीत ने 10 साल पहले घोड़ा और घोड़ी के बच्चों को पाला था। दोनों से ओमप्रकाश व इंद्रजीत इतना प्यार करते हैं कि वे ब्रज 84 कोस में दोनों को अपने साथ ले आए। मांट के गांव हरनौल में ठहरे ओमप्रकाश, इंद्रजीत ने बताया कि वे तड़के तीन बजे जागते हैं।
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पहले घोड़ा और घोड़ी को नहलाते हैं और फिर उनका शृंगार करते हैं। ग्रामीणों से चारे का इंतजाम करने के बाद खुद तैयार होते हैं। परिक्रमा में वे घोड़ा घोड़ी पर सवारी नहीं करते और पैदल ही चलते हैं। कहते हैं कि दोनों को बचपन से पाला है तो घर पर अकेला नहीं छोड़ पाते। दोनों इतने सीधे हैं कि आज तक किसी बच्चे को नहीं मारा। छोटे-छोटे बच्चे घोड़ा-घोड़ी के नीचे घूमते रहते हैं।
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