{"_id":"5ae366e44f1c1b6d098b6c1f","slug":"151524852452-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारा चढ़ते ही बढ़े उल्टी-दस्त, डायरिया के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पारा चढ़ते ही बढ़े उल्टी-दस्त, डायरिया के मरीज
Updated Fri, 27 Apr 2018 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। पिछले चार दिनों से पारा 42 डिग्री के आसपास चल रहा है। भीषण गर्मी से जिला अस्पताल एवं निजी क्लीनिकों पर उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन, बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। लू लगने के कारण हीटस्ट्रोक के मरीज भी अब अस्पताल में आना शुरू हो गए हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों से दोगुनी हो गई है और कई वार्ड फुल चल रहे हैं।
कुछ दिन पूर्व 39 डिग्री के आसपास पारा चल रहा था लेकिन मई शुरू होने से पहले ही सूर्यदेव ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान में तेजी आने से मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ गया है। जहां सामान्य दिनों में जनरल ओपीडी में 500 से 600 तक का आंकड़ा रहता है। वहीं अब यह आंकड़ा 1300 तक का पहुंच गया है।
अस्पताल में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन के मरीज सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। हीटस्ट्रोक के भी मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चा वार्ड में बेड फुल हो गए हैं। यही स्थिति आपात विभाग के ऊपर पुरुष व महिला वार्ड के साथ-साथ एनआरसी बच्चों के वार्ड की है।
विज्ञापन
तेज धूप का आंखों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। तेज धूप व इन दिनों चल रही हवा से आंखों में धूल के कण पहुंच जाते हैं। इससे आंखों में जलन पैदा हो जाती है। चिकित्सकों की माने तो आंखों में लाली आ जाने के बाद कुछ लोग स्टीरॉयड युक्त दवा डाल लेते हैं, जो घातक होती है। यदि आंखों में धूल के कण चले जाएं तो साफ ठंडे पानी से धोएं और मलें नहीं। धूप का चश्मा लगाएं व वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें।
-इस मौसम में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन होने की संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए साफ और ताजा पानी पीएं, हल्का भोजन करें। शरीर में कमजोरी महसूस हो तो पानी में नमक और चीनी का घोल पीएं और तत्काल किसी चिकित्सक को दिखाएं।
धूप में बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। पूरी बांह के हल्के कलर के कपड़े पहनाकर ही जाने दें। बच्चों को तरल पदार्थ अधिक से अधिक दें, यदि बच्चे को दस्त हो जाए तो ओआरएस का घोल दें तथा पानी की कमी न होने दें। इससे फायदा नहीं हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
जिला अस्पताल खुलने से पहले इलाज के लिए मरीज सुबह से पंजीकरण काउंटर पर लाइन लगाकर खड़े रहे। काफी देर तक काउंटर न खुलने पर हंगामा करना शुरू कर दिया।
मरीजों ने अस्पताल के कर्मचारियों से जानकारी ली तो संज्ञान में आया कि पंजीकरण पर्चे समाप्त हो गए हैं। मरीजों एवं तीमारदारों का विरोध बढ़ा देखकर अस्पताल में पर्चे दिखवाएं गए। कुछ पर्चे मिल भी गए। इसके बाद मरीजों का पंजीकरण शुरू हुआ।
विज्ञापन
कुछ दिन पूर्व 39 डिग्री के आसपास पारा चल रहा था लेकिन मई शुरू होने से पहले ही सूर्यदेव ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान में तेजी आने से मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ गया है। जहां सामान्य दिनों में जनरल ओपीडी में 500 से 600 तक का आंकड़ा रहता है। वहीं अब यह आंकड़ा 1300 तक का पहुंच गया है।
विज्ञापन
अस्पताल में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन के मरीज सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। हीटस्ट्रोक के भी मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चा वार्ड में बेड फुल हो गए हैं। यही स्थिति आपात विभाग के ऊपर पुरुष व महिला वार्ड के साथ-साथ एनआरसी बच्चों के वार्ड की है।
विज्ञापन
तेज धूप का आंखों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। तेज धूप व इन दिनों चल रही हवा से आंखों में धूल के कण पहुंच जाते हैं। इससे आंखों में जलन पैदा हो जाती है। चिकित्सकों की माने तो आंखों में लाली आ जाने के बाद कुछ लोग स्टीरॉयड युक्त दवा डाल लेते हैं, जो घातक होती है। यदि आंखों में धूल के कण चले जाएं तो साफ ठंडे पानी से धोएं और मलें नहीं। धूप का चश्मा लगाएं व वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें।
-इस मौसम में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन होने की संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए साफ और ताजा पानी पीएं, हल्का भोजन करें। शरीर में कमजोरी महसूस हो तो पानी में नमक और चीनी का घोल पीएं और तत्काल किसी चिकित्सक को दिखाएं।
धूप में बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। पूरी बांह के हल्के कलर के कपड़े पहनाकर ही जाने दें। बच्चों को तरल पदार्थ अधिक से अधिक दें, यदि बच्चे को दस्त हो जाए तो ओआरएस का घोल दें तथा पानी की कमी न होने दें। इससे फायदा नहीं हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
जिला अस्पताल खुलने से पहले इलाज के लिए मरीज सुबह से पंजीकरण काउंटर पर लाइन लगाकर खड़े रहे। काफी देर तक काउंटर न खुलने पर हंगामा करना शुरू कर दिया।
मरीजों ने अस्पताल के कर्मचारियों से जानकारी ली तो संज्ञान में आया कि पंजीकरण पर्चे समाप्त हो गए हैं। मरीजों एवं तीमारदारों का विरोध बढ़ा देखकर अस्पताल में पर्चे दिखवाएं गए। कुछ पर्चे मिल भी गए। इसके बाद मरीजों का पंजीकरण शुरू हुआ।