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मैनपुरी के यदुवंशनगर का था मृतक
Updated Wed, 07 Jun 2017 06:32 PM IST
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फिरोजाबाद। चमरौली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से खींचकर हत्या करने के मामले में मृतक की शिनाख्त मंगलवार सुबह जिला अस्पताल पहुंचे परिवारीजनों ने संदीप दिवाकर निवासी यदुवंशनगर मैनपुरी के रूप में की। शिनाख्त होते ही परिवारीजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया।
संदीप कुमार दिवाकर (28) पुत्र एबरन सिंह दिवाकर मूल रूप से मैनपुरी के कोतवाली नगर क्षेत्र के मोहल्ला यदुवंशनगर का रहने वाला था। मृतक के छोटे भाई अरुण ने बताया कि संदीप आटो चालक था। अरुण ने बताया कि संदीप शुक्रवार रात को कालिंदी एक्सप्रेस से दिल्ली में जदुवीर सिंह से रुपये लेने गया था। रविवार रात को वह मौसा से रुपये लेकर आनंद विहार एक्सप्रेस से घर लौट रहा था।
रात करीब साढ़े दस बजे संदीप की अपनी पत्नी पूनम से फोन पर बात हुई थी। संदीप ने कहा था कि ट्रेन गाजियाबाद से चल चुकी है और सुबह तकरीबन तीन बजे तक वह घर पहुंच जाएगा। इसके बाद संदीप से परिवारीजनों का कोई संपर्क नहीं हो सका। सुबह करीब चार बजे पूनम ने संदीप को फोन किया तो फोन बंद था।
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मैनपुरी से ट्रेन पास होने के बाद संदीप घर नहीं पहुंचा तो परिवारीजनों को चिंता हो गई। संदीप की खोजबीन की गई लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका। कोतवाली मैनपुरी को भी संदीप के लापता होने की सूचना दी थी। संदीप के ससुर गिरीश चंद्र और छोटा भाई प्रतीक संदीप की खोजबीन करने हुए गाजियाबाद तक गए लेकिन उसका कोई पता नहीं लग सका। मंगलवार को सूचना पर परिवारीजन जीआरपी शिकोहाबाद पहुंचे। पुलिस से संपर्क करने के साथ ही जिला अस्पताल पहुंचे और शव की शिनाख्त की। संदीप की शिनाख्त होते ही परिवारीजनों में कोहराम मच गया। संदीप के परिवारीजन भी अस्पताल आ गए। जीआरपी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही परिवारीजनों को सौंप दिया।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
संदीप अपने पीछे तीन साल के एक पुत्र आर्यन और पांच साल की बेटी त्रिरसा के साथ पत्नी पूनम को रोता बिलखता छोड़ गया है। संदीप तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। संदीप के ससुर गिरीश चंद्र सपा से जुड़े हैं और सास ऊषा दिवाकर किशनी से जिला पंचायत सदस्य भी रही है।
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संदीप कुमार दिवाकर (28) पुत्र एबरन सिंह दिवाकर मूल रूप से मैनपुरी के कोतवाली नगर क्षेत्र के मोहल्ला यदुवंशनगर का रहने वाला था। मृतक के छोटे भाई अरुण ने बताया कि संदीप आटो चालक था। अरुण ने बताया कि संदीप शुक्रवार रात को कालिंदी एक्सप्रेस से दिल्ली में जदुवीर सिंह से रुपये लेने गया था। रविवार रात को वह मौसा से रुपये लेकर आनंद विहार एक्सप्रेस से घर लौट रहा था।
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रात करीब साढ़े दस बजे संदीप की अपनी पत्नी पूनम से फोन पर बात हुई थी। संदीप ने कहा था कि ट्रेन गाजियाबाद से चल चुकी है और सुबह तकरीबन तीन बजे तक वह घर पहुंच जाएगा। इसके बाद संदीप से परिवारीजनों का कोई संपर्क नहीं हो सका। सुबह करीब चार बजे पूनम ने संदीप को फोन किया तो फोन बंद था।
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मैनपुरी से ट्रेन पास होने के बाद संदीप घर नहीं पहुंचा तो परिवारीजनों को चिंता हो गई। संदीप की खोजबीन की गई लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका। कोतवाली मैनपुरी को भी संदीप के लापता होने की सूचना दी थी। संदीप के ससुर गिरीश चंद्र और छोटा भाई प्रतीक संदीप की खोजबीन करने हुए गाजियाबाद तक गए लेकिन उसका कोई पता नहीं लग सका। मंगलवार को सूचना पर परिवारीजन जीआरपी शिकोहाबाद पहुंचे। पुलिस से संपर्क करने के साथ ही जिला अस्पताल पहुंचे और शव की शिनाख्त की। संदीप की शिनाख्त होते ही परिवारीजनों में कोहराम मच गया। संदीप के परिवारीजन भी अस्पताल आ गए। जीआरपी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही परिवारीजनों को सौंप दिया।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
संदीप अपने पीछे तीन साल के एक पुत्र आर्यन और पांच साल की बेटी त्रिरसा के साथ पत्नी पूनम को रोता बिलखता छोड़ गया है। संदीप तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। संदीप के ससुर गिरीश चंद्र सपा से जुड़े हैं और सास ऊषा दिवाकर किशनी से जिला पंचायत सदस्य भी रही है।