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स्नान, ध्यान और दान के साथ मना गंगा दशहरा

Updated Mon, 05 Jun 2017 12:04 PM IST
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यमुना स्नान
यमुना स्नान - फोटो : अमर उजाला

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पतित पावनी मां गंगा के धरती अवतरण (गंगा दशहरा) के दिन जिले में धार्मिक आयोजन चलते रहे। सुबह से पवित्र नदियों में पारंपरिक स्नान की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई थी, देवालयों में दिन भर विशेष पूजन कार्यक्रम चलते रहे। श्रद्धालुओं ने जल और फल दान कर सुख और समृद्ध की कामना की। जगह-जगह शरबत और शीतल जल की प्याऊ लगाईं और भंडारों का आयोजन किया गया।
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सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग में यमुना में स्नान का पुण्य फल पाने को रुनकता स्थित रेणुका धाम घाट पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट गई। कैलाश मंदिर घाट पर भी भक्तों का जमावाड़ा रहा। यमुना में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने कैलाश पति भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बल्केश्वर, रामबाग और हाथी घाट पर जबरदस्त भीड़ रही। दशहरा घाट पर भी भीड़ रही। बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के कार्यालय के पास स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था महंत छटंकी महाराज ने संभाली। मौसमी फल आम, खरबूज और तरबूज की जमकर खरीदी गई। लोगों ने फलों का दान भी किया।


बटेश्वर तीर्थ में रविवार को श्रद्घालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। यमुना नदी में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलाल जी मंदिर में पूजा कर दानपुण्य किया। साधु-संतों को भोजन कराया। मंदिर महंत जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के यज्ञाचार्यों ने विभिन्न मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान कराए। भंडारे और मीठे पानी की प्याऊ लगाई गईं। पिनाहट के श्रद्धालुओं ने चंबल नदी में स्नान कर पूजा की। फतेहाबाद में दशहरा पर लोगों ने यमुना में स्नान किया। जोनेश्वर घाट, शंकरपुर घाट पर स्नान करने वालों की भीड़ लगी रही। फतेहपुर सीकरी में दूरा स्थित गंगा महारानी मंदिर और कस्बे के छोटी बगीची गंगा मंदिर में गंगा मां की स्तुति की।


निर्जला एकादशी का व्रत आज

दशहरा के अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इसमें व्रत करने वाले जल भी गृहण नहीं करते हैं। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के मुताबिक महाभारत काल में भीम ने वेद व्यास से प्रार्थना की कि मुझे भूख बहुत लगती है मैं व्रत नहीं कर पाता हूं, ऐसे में मुझे कोई ऐसा व्रत बताएं जिसे एक दिन करने से भी वर्ष भर के व्रतों का पुण्य मिल सके। तब वेद व्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के व्रत का विधान बताया। इस व्रत में भीषण गर्मी के बावजूद साधक जल तक गृहण नहीं कर सकता है। इस बार निर्जला एकादशी सोमवार को पड़ रही है, जो अति पुण्यदायी है। जो लोग व्रत का उद्यापन करेंगे उन्हें एकादशी के दिन ब्राह्मणों को फलाहार कराना होगा और मंगलवार को भोजन कराना होगा।

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