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ठेकेदारों को बचने का मौका दे रही पुलिस
Updated Mon, 05 Jun 2017 01:12 AM IST
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आगरा। फर्जी एफडीआर के जरिए लोक निर्माण विभाग में 40 से अधिक ठेके हासिल करने वाली एटा की फर्म यूएस कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। इनमें कंपनी के दो रसूखदार ठेकेदार नामजद हैं। इनके खिलाफ धोखाधड़ी के साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ के लिए हिरासत तक में नहीं लिया। माना जा रहा है कि जांच को लटकाकर इन्हें बचने का मौका दिया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होते ही ठेकेदार कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे के लिए याचिका दे चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि अदालत का आदेश आने पर पुलिस उन्हें नहीं पकड़ेगी। अभी तक की जांच से लग भी यही रहा है। पुलिस ने तीन केस दस दिन के भीतर दर्ज किए हैं। शासन से कंपनी के फर्जीवाड़े की जांच अलग से चल रही है।
पीडब्लूडी ने केस दर्ज कराने के लिए पुलिस को साक्ष्य भी दिए। यह अलग बात है कि पहले पीडब्लूडी के अधिकारी एफआईआर कराने के लिए तैयार नहीं थे। शासन से जांच शुरू हुई और उनकी गर्दन फंसी, तब जाकर तहरीर दी। उधर, जिन बैंकों के नाम से फर्जी एफडीआर जमा की गई, उन्होंने इस बारे में लिखकर दे दिया। पीडब्लूडी ने रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले खुद भी जांच की। विधिक राय भी ली। इसके बाद पुलिस को भी बैंक से इसके साक्ष्य मिल गए कि एफडीआर फर्जी हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उधर, रकाबगंज थाना के प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि इस मामले में जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें , यह फर्म एटा की है। इसने फिरोजाबाद से भी एक फर्जी एफडीआर बनवाई थी।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होते ही ठेकेदार कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे के लिए याचिका दे चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि अदालत का आदेश आने पर पुलिस उन्हें नहीं पकड़ेगी। अभी तक की जांच से लग भी यही रहा है। पुलिस ने तीन केस दस दिन के भीतर दर्ज किए हैं। शासन से कंपनी के फर्जीवाड़े की जांच अलग से चल रही है।
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पीडब्लूडी ने केस दर्ज कराने के लिए पुलिस को साक्ष्य भी दिए। यह अलग बात है कि पहले पीडब्लूडी के अधिकारी एफआईआर कराने के लिए तैयार नहीं थे। शासन से जांच शुरू हुई और उनकी गर्दन फंसी, तब जाकर तहरीर दी। उधर, जिन बैंकों के नाम से फर्जी एफडीआर जमा की गई, उन्होंने इस बारे में लिखकर दे दिया। पीडब्लूडी ने रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले खुद भी जांच की। विधिक राय भी ली। इसके बाद पुलिस को भी बैंक से इसके साक्ष्य मिल गए कि एफडीआर फर्जी हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उधर, रकाबगंज थाना के प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि इस मामले में जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें , यह फर्म एटा की है। इसने फिरोजाबाद से भी एक फर्जी एफडीआर बनवाई थी।
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