{"_id":"5b8aa55442c792464a0c97cb","slug":"141535812948-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मथुरा आएं तो नंदोत्सव जरूर देख कर जाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मथुरा आएं तो नंदोत्सव जरूर देख कर जाएं
Updated Sat, 01 Sep 2018 08:29 PM IST
विज्ञापन
नंदोत्सव
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नंदगांव (मथुरा)। नंदबाबा मंदिर में नंदोत्सव देखने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। कृष्ण का जन्मदिन मनाने के बाद चार सितंबर को नंदगांव जरूर आएं और नंदोत्सव देख आनंद प्राप्त करें।
चार सितंबर को पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास नंदभवन में रहेगा। अष्टमी को मां यशोदा को एक प्रसूता की भांति आहार दिया जाएगा। ठीक मध्यरात्रि को कृष्ण जन्म होगा।
जन्म के बाद शीत से बचाने के लिए सोंठ और धनियां की पंजीरी दी जाएगी। जन्म के बाद मां यशोदा के मस्तक और पेट पर कपड़ा बांध दिया जाएगा। जो कान्हा की छटी तक बंधा रहेगा। अष्टमी की रात्रि में भजन संध्या और कृष्ण वंशावली का बखान किया जाएगा। ढांढ़-ढांढ़िन लीला आकर्षण का केंद्र रहेगी। वैदिक मंत्रों के साथ गुप्त अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान कान्हा केवल कटि-कांछनी में ही दर्शन देते हैं।
विज्ञापन
देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक लीला को देखेंगे। अगले दिन नवमी को नंदभवन में प्रात: से ही उत्सवों की झड़ी लग जाएगी। नंदभवन में नंदगांव-बरसाना के समाजियों के मध्य घंटों समाज गायन होगा। शंकर लीला, मटकी लीला, दधि कांधा, बांस बधाई आदि होंगे। नंदगांव-बरसाना के लोगों के मध्य बहु चर्चित हास-परिहास और नंदभवन में मल्ल युद्ध होगा। कृष्ण-बलराम को बंगली में पलना में लाया जाएगा।
जन्माष्टमी पर सुभद्रा बन बांधेंगी राखियां
नंदोत्सव के दिन सेवायतों द्वारा श्री कृष्ण-बलराम को राखियां बांधी जाती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ब्रज की युवतियों ने कान्हा की प्रतीक्षा में पूर्णिमा को रक्षाबंधन नहीं मनाया। जन्म के बाद नंदोत्सव पर कन्हैया को राखियां बांधी गईं। जो भाई रक्षाबंधन पर राखी नहीं बंधवा पाते हैं, वे नंदोत्सव पर राखियां बंधवाते हैं।
विज्ञापन
चार सितंबर को पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास नंदभवन में रहेगा। अष्टमी को मां यशोदा को एक प्रसूता की भांति आहार दिया जाएगा। ठीक मध्यरात्रि को कृष्ण जन्म होगा।
विज्ञापन
जन्म के बाद शीत से बचाने के लिए सोंठ और धनियां की पंजीरी दी जाएगी। जन्म के बाद मां यशोदा के मस्तक और पेट पर कपड़ा बांध दिया जाएगा। जो कान्हा की छटी तक बंधा रहेगा। अष्टमी की रात्रि में भजन संध्या और कृष्ण वंशावली का बखान किया जाएगा। ढांढ़-ढांढ़िन लीला आकर्षण का केंद्र रहेगी। वैदिक मंत्रों के साथ गुप्त अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान कान्हा केवल कटि-कांछनी में ही दर्शन देते हैं।
विज्ञापन
देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक लीला को देखेंगे। अगले दिन नवमी को नंदभवन में प्रात: से ही उत्सवों की झड़ी लग जाएगी। नंदभवन में नंदगांव-बरसाना के समाजियों के मध्य घंटों समाज गायन होगा। शंकर लीला, मटकी लीला, दधि कांधा, बांस बधाई आदि होंगे। नंदगांव-बरसाना के लोगों के मध्य बहु चर्चित हास-परिहास और नंदभवन में मल्ल युद्ध होगा। कृष्ण-बलराम को बंगली में पलना में लाया जाएगा।
जन्माष्टमी पर सुभद्रा बन बांधेंगी राखियां
नंदोत्सव के दिन सेवायतों द्वारा श्री कृष्ण-बलराम को राखियां बांधी जाती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ब्रज की युवतियों ने कान्हा की प्रतीक्षा में पूर्णिमा को रक्षाबंधन नहीं मनाया। जन्म के बाद नंदोत्सव पर कन्हैया को राखियां बांधी गईं। जो भाई रक्षाबंधन पर राखी नहीं बंधवा पाते हैं, वे नंदोत्सव पर राखियां बंधवाते हैं।