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अकबर के मकबरे में बीमारी से मरा 14 साल का दुर्लभ काला हिरन, सियार के शिकार की चर्चा के बाद हुआ पोस्टमार्टम
Thu, 22 Oct 2020 09:32 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 22 Oct 2020 09:32 AM IST
सार
बुधवार सुबह अकबर का मकबरा सिकंदरा स्मारक में 14 साल के दुर्लभ काले हिरन (ब्लैक बक) का शव मिला। इससे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उद्यान शाखा के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। दरअसल, स्मारक में सियार इन काले हिरनों का शिकार करके मारते रहे हैं।
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विस्तार
अकबर का मकबरा सिकंदरा में मंगलवार की रात दुर्लभ काले हिरन की मौत हो गई। वन विभाग ने पशु चिकित्सा विभाग के साथ हिरन का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें उसकी मौत की वजह पेट में गैस बनना बताया गया है। 14 साल का यह हिरन कुछ दिनों से चलने में अक्षम था। सियार के शिकार से मौत की चर्चाओं के चलते वन विभाग में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया।
बुधवार सुबह अकबर का मकबरा सिकंदरा स्मारक में 14 साल के दुर्लभ काले हिरन (ब्लैक बक) का शव मिला। इससे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उद्यान शाखा के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। दरअसल, स्मारक में सियार इन काले हिरनों का शिकार करके मारते रहे हैं। उद्यान शाखा के अधिकारियों ने वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को हिरन की मौत की सूचना दी, जिसके बाद डॉ. सीमा यादव और डॉ. पुष्पा यादव ने उसका पोस्टमार्टम किया।
चिकित्सकों के मुताबिक हिरन का पिछला बायां पैर 15 दिन पहले कांटा लगने से जख्मी हो गया था। 12 अक्तूबर और उससे पहले दो बार वाइल्डलाइफ एसओएस के चिकित्सकों द्वारा इलाज किया गया था, लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक काले हिरन के पेट में गैस बनने से सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी, जिससे उसकी मौत हुई है।
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बुधवार सुबह अकबर का मकबरा सिकंदरा स्मारक में 14 साल के दुर्लभ काले हिरन (ब्लैक बक) का शव मिला। इससे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उद्यान शाखा के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। दरअसल, स्मारक में सियार इन काले हिरनों का शिकार करके मारते रहे हैं। उद्यान शाखा के अधिकारियों ने वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को हिरन की मौत की सूचना दी, जिसके बाद डॉ. सीमा यादव और डॉ. पुष्पा यादव ने उसका पोस्टमार्टम किया।
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चिकित्सकों के मुताबिक हिरन का पिछला बायां पैर 15 दिन पहले कांटा लगने से जख्मी हो गया था। 12 अक्तूबर और उससे पहले दो बार वाइल्डलाइफ एसओएस के चिकित्सकों द्वारा इलाज किया गया था, लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक काले हिरन के पेट में गैस बनने से सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी, जिससे उसकी मौत हुई है।
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पेट में गैस बनने से हुई मौत
काले हिरण का पैर जख्मी था। चलने फिरने में वह अक्षम हो गया था, जिस वजह से उसके पेट में गैस बन गई। इससे उसे सांस लेने में परेशानी हुई और उसकी मौत हो गई। -देवेंद्र सिंह, एसडीओ, वन विभाग
काले हिरण का पैर जख्मी था। चलने फिरने में वह अक्षम हो गया था, जिस वजह से उसके पेट में गैस बन गई। इससे उसे सांस लेने में परेशानी हुई और उसकी मौत हो गई। -देवेंद्र सिंह, एसडीओ, वन विभाग