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दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उतम त्याग घर्म की आराधना
Updated Fri, 21 Sep 2018 11:57 PM IST
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फिरोजाबाद। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने जैन मंदिरों में भक्तिभाव से उत्तम त्याग धर्म की पूजा अर्चना की। सुबह पूजा अर्चना तो शाम को धर्मसभाएं आयोजित हुई। मंदिरों में प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। नजारा भक्तिमय दिखा।
श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र में आयोजित धर्मसभा में जैन विद्वान शीतलचंद जैन ने तत्वार्थसूत्र के आठवें अध्याय की विस्तार सेचर्चा की। उन्होंने कहा कि हृदय की बीमारी से बचना है तो श्वासोछवास से णमोकार मंत्र का जाप करें। अर्थात सांस लेते समय णमो अरिहंताणं बोले और सांस छोड़ते समय णमो सिद्धाणं बोले। इसी तरह पंच नमस्कार मंत्र का जाप करने में 40-42 मिनट लगते है। उन्होंने कहा कि मुनि बनना सरल है, लेकिन शुद्ध भाव रखना कठिन है। सांयकालीन धर्मसभा में विद्वान डा. शीतलचंद जैन ने कहा कि मनुष्य पर्याय बहुत मुश्किल से मिलती है।
इसका धर्म ध्यानपूर्वक सदुपयोग करना चाहिए। देव और नारकी मनुष्य पर्याय के लिए तरसते हैं। कल्याण केवल मनुष्य पर्याय से हो सकता है। विभव नगर जैन मंदिर में सामूहिक पूजा के बाद 170 तीर्थंकर विधान के अर्ध्य चढ़ाए गए। सांयकाल में सौरभ जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। प्रश्नमंच के बाद पुरस्कार वितरण हुआ। अट्टावाला जैन मंदिर में दिनेश जैन दुर्गेश और मनोज जैन के निर्देशन में सामूहिक पूजन विधान जारी रहा। छदामीलाल जैन मंदिर, गांधी नगर स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तिभावना के साथ पूजन किया गया।
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श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र में आयोजित धर्मसभा में जैन विद्वान शीतलचंद जैन ने तत्वार्थसूत्र के आठवें अध्याय की विस्तार सेचर्चा की। उन्होंने कहा कि हृदय की बीमारी से बचना है तो श्वासोछवास से णमोकार मंत्र का जाप करें। अर्थात सांस लेते समय णमो अरिहंताणं बोले और सांस छोड़ते समय णमो सिद्धाणं बोले। इसी तरह पंच नमस्कार मंत्र का जाप करने में 40-42 मिनट लगते है। उन्होंने कहा कि मुनि बनना सरल है, लेकिन शुद्ध भाव रखना कठिन है। सांयकालीन धर्मसभा में विद्वान डा. शीतलचंद जैन ने कहा कि मनुष्य पर्याय बहुत मुश्किल से मिलती है।
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इसका धर्म ध्यानपूर्वक सदुपयोग करना चाहिए। देव और नारकी मनुष्य पर्याय के लिए तरसते हैं। कल्याण केवल मनुष्य पर्याय से हो सकता है। विभव नगर जैन मंदिर में सामूहिक पूजा के बाद 170 तीर्थंकर विधान के अर्ध्य चढ़ाए गए। सांयकाल में सौरभ जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। प्रश्नमंच के बाद पुरस्कार वितरण हुआ। अट्टावाला जैन मंदिर में दिनेश जैन दुर्गेश और मनोज जैन के निर्देशन में सामूहिक पूजन विधान जारी रहा। छदामीलाल जैन मंदिर, गांधी नगर स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तिभावना के साथ पूजन किया गया।
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