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प्राइवेट लोगों को ठेका देकर चलवाई जाती थी बसें
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:24 PM IST
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इसी बस में की गई लूटपाट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एटा। सड़क पर फर्राटा भरने वाली रोडवेज बस को प्राइवेट लोगों से ठेके पर चलवाकर परिवहन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी रातों-रात मालामाल हो गए। बस को ठेके पर चलाने वाले चालक व परिचालक को जिम्मेदार सतर्कता की सारी बारीकियों से भी रूबरू करा दिया करते थे ताकि चेकिंग के दौरान कहीं फंस न जाएं। इसके पीछे एक-दो का नहीं कई एक का दिमाग इस्तेमाल होता था और माह में लाखों रुपये का घपला किया जाता था।
करोड़ों रुपये का घोटाला करने वालों ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। घपला करने वाली बस को चलाने में कभी भी नियमित या संविदा कर्मियों का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके लिए बाहरी प्राइवेट एक्सपर्ट लोगों का प्रयोग किया गया। चालक व परिचालक को ठेके पर बस को दे दी जाती थी। बस डिपो से निकालने से पहले रास्ते में किन-किन बातों का ध्यान रखना है सारी बारीकियां तोते की तरह पढ़ाई जाती थी। बस जब डिपो रिटर्न होती थी तो चालक व परिचालक को नगद भुगतान कर दिया जाता था।
टिकट मशीन के सॉफ्टवेयर से की जाती थी छेड़छाड़
अक्षम चालक राकेश कुमार गौतम ने बताया कि ठेके पर जिन चालक परिचालक को बस दी जाती थी। उन्हें एक मशीन भी टिकट काटने के लिए मुहैया कराई जाती थी। टिकट मशीन चालक परिचालक को देने से पहले उसके सॉफ्टवेयर को फॉरवर्ड किया जाता था। उसमें टिकट के हिसाब से इनकम निकाली जाती थी और हिसाब भी परिचालक उसी से देता था। लेकिन उसका लेखा जोखा अन्य किसी के पास नहीं जाता था। मिली भगत से सब कुछ मैनेज होता रहा।
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घोटाला उजागर करने वाले को जान का खतरा
परिवहन निगम एटा डिपो में कार्यरत अक्षम चालक राकेश कुमार गौतम ने डिपो में हुए घोटाले को उजागर करने में आवाज बुलंद की है। वह इस लड़ाई को वर्ष 2017 से विभागीय व शासन स्तर पर लड़ रहे हैं। इसको देखते हुए इनकी पत्नी मधु गौतम ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। घटना दुर्घटना होने की स्थिति में विभाग को जिम्मेदार ठहराए जाने की अपील की है।
वर्जन
जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हूं, अगर कोई भी दस्तावेज मांग जाता है तो उपलब्ध कराऊंगा। मैं चाहता हूं कि दूसरे डिपो के अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराई जाए।
मदन लाल, एआरएम
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करोड़ों रुपये का घोटाला करने वालों ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। घपला करने वाली बस को चलाने में कभी भी नियमित या संविदा कर्मियों का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके लिए बाहरी प्राइवेट एक्सपर्ट लोगों का प्रयोग किया गया। चालक व परिचालक को ठेके पर बस को दे दी जाती थी। बस डिपो से निकालने से पहले रास्ते में किन-किन बातों का ध्यान रखना है सारी बारीकियां तोते की तरह पढ़ाई जाती थी। बस जब डिपो रिटर्न होती थी तो चालक व परिचालक को नगद भुगतान कर दिया जाता था।
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टिकट मशीन के सॉफ्टवेयर से की जाती थी छेड़छाड़
अक्षम चालक राकेश कुमार गौतम ने बताया कि ठेके पर जिन चालक परिचालक को बस दी जाती थी। उन्हें एक मशीन भी टिकट काटने के लिए मुहैया कराई जाती थी। टिकट मशीन चालक परिचालक को देने से पहले उसके सॉफ्टवेयर को फॉरवर्ड किया जाता था। उसमें टिकट के हिसाब से इनकम निकाली जाती थी और हिसाब भी परिचालक उसी से देता था। लेकिन उसका लेखा जोखा अन्य किसी के पास नहीं जाता था। मिली भगत से सब कुछ मैनेज होता रहा।
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घोटाला उजागर करने वाले को जान का खतरा
परिवहन निगम एटा डिपो में कार्यरत अक्षम चालक राकेश कुमार गौतम ने डिपो में हुए घोटाले को उजागर करने में आवाज बुलंद की है। वह इस लड़ाई को वर्ष 2017 से विभागीय व शासन स्तर पर लड़ रहे हैं। इसको देखते हुए इनकी पत्नी मधु गौतम ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। घटना दुर्घटना होने की स्थिति में विभाग को जिम्मेदार ठहराए जाने की अपील की है।
वर्जन
जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हूं, अगर कोई भी दस्तावेज मांग जाता है तो उपलब्ध कराऊंगा। मैं चाहता हूं कि दूसरे डिपो के अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराई जाए।
मदन लाल, एआरएम