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जीएसटी के बाद 50 करोड़ का कारोबार ठप
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:08 AM IST
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पांच दिक्कतें और ग्राहकों से बातचीत आएगी
पचास करोड़ का कारोबार ठप होने पर आंकड़े
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जीएसटी लागू होने के बाद मथुरा का बड़ा कारोबार ठप हो गया है। साड़ी, चांदी और इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की बिक्री थम सी गई है। पायल के भी आर्डर नहीं आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब पचास करोड़ का कारोबार ठप हो गया है। अभी तक कारोबारियों को जीएसटिन नहीं मिल पाया है। बाजार अभी तक असमंजस में है। न कारोबारी तैयार है और न ही ग्राहक। बाजार में ग्राहक तो पहुंच रहे हैं लेकिन बड़े आइटमों की खरीद थम गई है।
साड़ी कारोबारी राजेश बजाज ने बताया कि साड़ी पर इस बार पहली बार कर लगाया गया है। ऐसे में कारोबारियों का माइग्रेशन ही नहीं हो पाया। खरीदार तैयार ही नहीं है तो फिर माल तैयार करके क्या करेंगे। देश में कई जगह साड़ी कारोबारी अभी भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में आगे की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।
चांदी कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल हाथी वालों ने बताया कि चांदी पर पहले एक प्रतिशत वैट था जो अब बढ़कर तीन प्रतिशत हो गया है। बड़ी समस्या बिल के प्रारूप को लेकर है। छोटे कारोबारी अभी जीएसटी को समझ नहीं पा रहे हैं। ऐेसे में व्यापार करना मुश्किल हो रहा है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के कारोबारी डा. विशाल खुराना ने बताया कि टैक्स की दर बढ़ी है लेकिन अभी स्थिति असमंजस की है। उपभोक्ताओं को समझाबुझाकर कारोबार किया जा रहा है। बिल के चक्कर में कारोबार तो प्रभावित हो ही रहा है।
कपड़ा कारोबारी अखिल अग्रवाल भी बोले कि व्यापार पूरी तरह से ठप है। सोमवार को कारोबारियों का एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेगा। इसके बाद ही कारोबारी अपने व्यापार को लेकर आगे की तैयारी करेंगे।
दवा कारोबारी भोला यादव ने बताया कि हमारे यहां जीएसटी की दर को लेकर पेचीदगी है। जो कारोबारी कंप्यूटर से बिल जारी करते हैं उन्होंने बिल देना शुरू कर दिया है। बिल बुक प्रकाशित होने के बाद दो-तीन दिन के बाद ही कारोबार ढर्रे पर आ पाएगा।
सराफा कारोबारी चिराग अग्रवाल ने भी बिल प्रारूप की समस्या रखी। उन्होंने कहा कि प्रारूप स्पष्ट नहीं है। ऐसे में जो ग्राहक आ रहे हैं उनसे बिल के लिए अगले दो-तीन दिन की कही जा रही है। इन परिस्थितियों में कारोबार तो प्रभावित हो रहा है।
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पचास करोड़ का कारोबार ठप होने पर आंकड़े
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जीएसटी लागू होने के बाद मथुरा का बड़ा कारोबार ठप हो गया है। साड़ी, चांदी और इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की बिक्री थम सी गई है। पायल के भी आर्डर नहीं आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब पचास करोड़ का कारोबार ठप हो गया है। अभी तक कारोबारियों को जीएसटिन नहीं मिल पाया है। बाजार अभी तक असमंजस में है। न कारोबारी तैयार है और न ही ग्राहक। बाजार में ग्राहक तो पहुंच रहे हैं लेकिन बड़े आइटमों की खरीद थम गई है।
साड़ी कारोबारी राजेश बजाज ने बताया कि साड़ी पर इस बार पहली बार कर लगाया गया है। ऐसे में कारोबारियों का माइग्रेशन ही नहीं हो पाया। खरीदार तैयार ही नहीं है तो फिर माल तैयार करके क्या करेंगे। देश में कई जगह साड़ी कारोबारी अभी भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में आगे की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।
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चांदी कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल हाथी वालों ने बताया कि चांदी पर पहले एक प्रतिशत वैट था जो अब बढ़कर तीन प्रतिशत हो गया है। बड़ी समस्या बिल के प्रारूप को लेकर है। छोटे कारोबारी अभी जीएसटी को समझ नहीं पा रहे हैं। ऐेसे में व्यापार करना मुश्किल हो रहा है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के कारोबारी डा. विशाल खुराना ने बताया कि टैक्स की दर बढ़ी है लेकिन अभी स्थिति असमंजस की है। उपभोक्ताओं को समझाबुझाकर कारोबार किया जा रहा है। बिल के चक्कर में कारोबार तो प्रभावित हो ही रहा है।
कपड़ा कारोबारी अखिल अग्रवाल भी बोले कि व्यापार पूरी तरह से ठप है। सोमवार को कारोबारियों का एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेगा। इसके बाद ही कारोबारी अपने व्यापार को लेकर आगे की तैयारी करेंगे।
दवा कारोबारी भोला यादव ने बताया कि हमारे यहां जीएसटी की दर को लेकर पेचीदगी है। जो कारोबारी कंप्यूटर से बिल जारी करते हैं उन्होंने बिल देना शुरू कर दिया है। बिल बुक प्रकाशित होने के बाद दो-तीन दिन के बाद ही कारोबार ढर्रे पर आ पाएगा।
सराफा कारोबारी चिराग अग्रवाल ने भी बिल प्रारूप की समस्या रखी। उन्होंने कहा कि प्रारूप स्पष्ट नहीं है। ऐसे में जो ग्राहक आ रहे हैं उनसे बिल के लिए अगले दो-तीन दिन की कही जा रही है। इन परिस्थितियों में कारोबार तो प्रभावित हो रहा है।