{"_id":"64a9ae5519aa4425510632f4","slug":"13-dacoity-accused-acquitted-after-21-years-mainpuri-news-c-174-1-sagr1039-710-2023-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: डकैती के 13 आरोपी 21 साल बाद अदालत से बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: डकैती के 13 आरोपी 21 साल बाद अदालत से बरी
Sun, 09 Jul 2023 12:13 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 09 Jul 2023 12:13 AM IST
विज्ञापन
मैनपुरी। थाना भोगांव के नगला खरा में 21 साल पहले पड़ी डकैती के आरोपी स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत के न्यायालय से बरी कर दिए गए हैं। पीड़ित पक्ष के सभी गवाह न्यायालय में गवाही के दौरान डकैती की घटना को साबित नहीं कर सके हैं।
थाना भोगांव के नगला खरा निवासी रमेशचंद्र पाल ने स्पेशल जज डकैती के न्यायालय से धारा 156 (3) के तहत 28 फरवरी 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसके गांव में दो मकान हैं। दूसरे मकान की बाउंड्री में काफी वृक्ष लगे हुए हैं। मकान और वृक्षों को देखकर गांव के कुछ लोग उससे रंजिश मानते थे।
24 अगस्त 2003 को दोपहर 12 बजे गांव के ही अहलकार, पेशकार, सत्यप्रकाश, खून्नूलाल, नेत्रपाल, मोतीलाल, सत्येंद्र, राजवीर, जयसरन, टिंकू, अवनीश, कालिका, प्रेमचंद बेलचा, भाला, तमंचा, लाइसेंसी हथियारों से लैस होकर उसके मकान की छत पर पहुंच गए।
विज्ञापन
आरोपियों ने मकान को घेरकर बक्से में रखे 6700 रुपया, पत्नी राजवती के बक्से में रखी एक सोने की चैन, दो सोने की अंगूठी, एक करधनी लूट ली। दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की। पुलिस ने विवेचना करने के बाद अंतिम आख्या न्यायालय में भेज दी। रमेशचंद्र द्वारा अंतिम आख्या खारिज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया। स्पेशल जज डकैती द्वारा सभी आरोपियों को न्यायालय मेंं तलब किया गया।
मुकदमे की सुनवाई स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत के न्यायालय में हुई। पीड़ित पक्ष के गवाह न्यायालय में गवाही के दौरान डकैती की घटना को साबित नहीं कर सके। आरोपियों के वकील नबाब सिंह पाल, डालचंद्र पाल, सुमित कुमार चौहान ने अपराध साबित नहीं होने पर आरोपियों को बरी करने की मांग की। डकैती के आरोपी स्पेशल जज डकैती के न्यायालय से बरी कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
थाना भोगांव के नगला खरा निवासी रमेशचंद्र पाल ने स्पेशल जज डकैती के न्यायालय से धारा 156 (3) के तहत 28 फरवरी 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसके गांव में दो मकान हैं। दूसरे मकान की बाउंड्री में काफी वृक्ष लगे हुए हैं। मकान और वृक्षों को देखकर गांव के कुछ लोग उससे रंजिश मानते थे।
विज्ञापन
24 अगस्त 2003 को दोपहर 12 बजे गांव के ही अहलकार, पेशकार, सत्यप्रकाश, खून्नूलाल, नेत्रपाल, मोतीलाल, सत्येंद्र, राजवीर, जयसरन, टिंकू, अवनीश, कालिका, प्रेमचंद बेलचा, भाला, तमंचा, लाइसेंसी हथियारों से लैस होकर उसके मकान की छत पर पहुंच गए।
विज्ञापन
आरोपियों ने मकान को घेरकर बक्से में रखे 6700 रुपया, पत्नी राजवती के बक्से में रखी एक सोने की चैन, दो सोने की अंगूठी, एक करधनी लूट ली। दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की। पुलिस ने विवेचना करने के बाद अंतिम आख्या न्यायालय में भेज दी। रमेशचंद्र द्वारा अंतिम आख्या खारिज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया। स्पेशल जज डकैती द्वारा सभी आरोपियों को न्यायालय मेंं तलब किया गया।
मुकदमे की सुनवाई स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत के न्यायालय में हुई। पीड़ित पक्ष के गवाह न्यायालय में गवाही के दौरान डकैती की घटना को साबित नहीं कर सके। आरोपियों के वकील नबाब सिंह पाल, डालचंद्र पाल, सुमित कुमार चौहान ने अपराध साबित नहीं होने पर आरोपियों को बरी करने की मांग की। डकैती के आरोपी स्पेशल जज डकैती के न्यायालय से बरी कर दिए गए हैं।