{"_id":"5a6cbb3c4f1c1b74268b6b14","slug":"11517075260-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तमाशबीन बनी रही पुलिस, जलता रहा कासगंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तमाशबीन बनी रही पुलिस, जलता रहा कासगंज
Updated Sat, 27 Jan 2018 11:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा निकालने के दौरान हुई हिंसा दूसरे दिन भी नहीं थमी। भारी पुलिस फोर्स तैनात रही लेकिन बलवाई अपने मंसूबों में कामयाब हो गए। हालांकि शुक्रवार की हिंसा के बाद जिले में पांच कंपनी अर्द्धसैनिक बल, तीन कंपनी पीएसी व आसपास के जिलों की पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन तमाशबीन बने रहे हिंसा होती रही। शनिवार को जबरदस्त आक्रोश के हालात बन गए। लोग सड़कों पर उतर आए। बलवाइयों ने पुरानी चुंगी इलाके में तीन वाहनों में आग लगा दी, आठ दुकानें भी फूंक दी। शहर में पनप रहे आक्रोश को पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी नहीं भांप पाए। यदि प्रशासन ने सतर्कता के साथ इन स्थानों पर सुरक्षा का विशेष ध्यान होता तो शायद ऐसी स्थिति नहीं होती।
नगर में बिगड़े हालात के लिए पुलिस प्रशासन की नासमझी भी सामने आई। जिले में एडीजी, 2 आईजी, कमिश्नर, जिले के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकार डटे रहे इसके बावजूद दूसरे दिन भी आगजनी की कई घटनाएं हुईं, जो सुरक्षा प्रबंधों की चूक का परिणाम नजर आईं। वहीं पुलिस प्रशासन 5 दिन पहले से चामुंडा मंदिर पर बैरीकेड लगाने के विवाद से दोनों समुदायों में पैदा हो रही बदअमनी को भी नहीं भांप पाया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को तिरंगा यात्रा के विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा फैल गई। जगह-जगह आक्रोश के हालात बने हुए थे। पुलिस और प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारी भी शहर में पहुंच चुके थे। अर्धसैनिक बल, आरएएफ, पीएसी व आस पास के कई जनपदों को फोर्स व अधिकारी आ चुके थे। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बाद लग रहा था कि शनिवार का दिन शांति वाला होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
विज्ञापन
दोनों समुदाय के बीच बदअमनी का कारण पांच दिन पहले से बना हुआ था। नगर के चामुंडा मंदिर पर पुलिस प्रशासन ने बैरीकेड लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया था। इस बात को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध जताया था। प्रशासन ने मंदिर पर सुरक्षा तो कर दी, लेकिन बदअमनी के हालात को नहीं भांप पाया। कमिश्नर सुभाष शर्मा का कहना है कि कहां किस स्तर पर चूक हुई है। इस बात की भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
नगर में बिगड़े हालात के लिए पुलिस प्रशासन की नासमझी भी सामने आई। जिले में एडीजी, 2 आईजी, कमिश्नर, जिले के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकार डटे रहे इसके बावजूद दूसरे दिन भी आगजनी की कई घटनाएं हुईं, जो सुरक्षा प्रबंधों की चूक का परिणाम नजर आईं। वहीं पुलिस प्रशासन 5 दिन पहले से चामुंडा मंदिर पर बैरीकेड लगाने के विवाद से दोनों समुदायों में पैदा हो रही बदअमनी को भी नहीं भांप पाया।
विज्ञापन
गौरतलब है कि शुक्रवार को तिरंगा यात्रा के विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा फैल गई। जगह-जगह आक्रोश के हालात बने हुए थे। पुलिस और प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारी भी शहर में पहुंच चुके थे। अर्धसैनिक बल, आरएएफ, पीएसी व आस पास के कई जनपदों को फोर्स व अधिकारी आ चुके थे। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बाद लग रहा था कि शनिवार का दिन शांति वाला होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
विज्ञापन
दोनों समुदाय के बीच बदअमनी का कारण पांच दिन पहले से बना हुआ था। नगर के चामुंडा मंदिर पर पुलिस प्रशासन ने बैरीकेड लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया था। इस बात को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध जताया था। प्रशासन ने मंदिर पर सुरक्षा तो कर दी, लेकिन बदअमनी के हालात को नहीं भांप पाया। कमिश्नर सुभाष शर्मा का कहना है कि कहां किस स्तर पर चूक हुई है। इस बात की भी जांच की जा रही है।