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रिसते रिसते खाली हो गई प्यार भरी झोली...
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:34 PM IST
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वरिष्ठ कवि का सम्मान करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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करहल। जयवंती देवी कन्या जूनियर हाईस्कूल में गुरुवार रात काव्य गोष्ठी हुई। शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष अमर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। नन्हे खां ने समुझात बुझात गए दिन बीत रहा मन में अब धैर नहीं। संजू सूर्यम ठाकुर ने जब सरहद पर हिंद वीर को गोली लग जाती है, भारत के कोने कोने से कुछ बोली लग जाती है। राजवीर सिंह राज ने रिसते रिसते खाली हो गई प्यार भरी झोली, लोग कहा करते हैं आई गले मिलाने होली।
उदयवीर सिंह उदय ने हर उजाले का अंधेरा आज ग्रसता जा रहा है, प्रीत का उर से पलायन बैर बसता जा रहा है। कवि महाराम सिंह महा ने बार-बार सत्कार तुम्हारा बार बार अभिनंदन है, घर घर उगे बबूल यहां पर लोप हो गया चंदन है। कवि रघुवरदयाल ने ऐसा भारत देश हमारा जो लगता सबको प्यारा। ताहिर चांद ने-गम रात दिन रहे तो खुशी भी कभी रही। सतीश समर्थ ने दसकंधर के आतंकाें को नष्ट प्रभु अब राम करो, जब तक कार्य न पूरा हो हे राम नहीं विश्राम करो।
प्रोफेसर राजेंद्र सिंह राणा, रामदत्त पारस, डा. कुश चतुर्वेदी, डा. पदम सिंह पदम, जितेंद्र यादव ने भी अपनी रचनाओं से मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन कवि प्रेमचंद्र शाक्य प्रेम ने किया।
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उदयवीर सिंह उदय ने हर उजाले का अंधेरा आज ग्रसता जा रहा है, प्रीत का उर से पलायन बैर बसता जा रहा है। कवि महाराम सिंह महा ने बार-बार सत्कार तुम्हारा बार बार अभिनंदन है, घर घर उगे बबूल यहां पर लोप हो गया चंदन है। कवि रघुवरदयाल ने ऐसा भारत देश हमारा जो लगता सबको प्यारा। ताहिर चांद ने-गम रात दिन रहे तो खुशी भी कभी रही। सतीश समर्थ ने दसकंधर के आतंकाें को नष्ट प्रभु अब राम करो, जब तक कार्य न पूरा हो हे राम नहीं विश्राम करो।
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प्रोफेसर राजेंद्र सिंह राणा, रामदत्त पारस, डा. कुश चतुर्वेदी, डा. पदम सिंह पदम, जितेंद्र यादव ने भी अपनी रचनाओं से मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन कवि प्रेमचंद्र शाक्य प्रेम ने किया।
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