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डॉक्टर दंपती ने भी कर डाली स्टांप चोरी: घर बताकर खरीदा व्यावसायिक भवन, अब चुकाने पड़ेंगे 15 लाख रुपये
Mon, 24 Aug 2026 09:40 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 24 Aug 2026 09:40 AM IST
सार
आगरा में दो मंजिला भवन की खरीद के दौरान उसे आवासीय दर्शाकर स्टांप शुल्क कम देने के मामले में डॉक्टर दंपती पर करीब 15 लाख रुपये की देनदारी तय की गई है। जिलाधिकारी की अदालत ने 10.65 लाख रुपये बकाया स्टांप, 1.50 लाख निबंधन शुल्क और 2.66 लाख रुपये जुर्माना जमा कराने का आदेश दिया है।
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के गांधी नगर हाउसिंग स्कीम स्थित एक दो मंजिला भवन की खरीद में स्टांप चोरी पकड़े जाने पर जिलाधिकारी की अदालत ने डॉक्टर दंपती पर जुर्माना लगाते हुए करीब 15 लाख रुपये जमा कराने के आदेश दिए हैं।
गांधी नगर में अस्पताल संचालक डॉ. मनीषा गुप्ता और उनके पति डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने दयाल प्रसाद तनेजा से गांधी नगर हाउसिंग स्कीम स्थित 297.25 वर्ग मीटर का एमआईजी भवन खरीदा था। रजिस्ट्री के समय दंपती ने भवन को आवासीय दर्शाते हुए केवल 9.59 लाख रुपये स्टांप और 1.38 लाख रुपये निबंधन शुल्क दिया था। पॉश एरिया में हुई खरीद की प्रशासनिक अमले ने जांच कराई।
जांच में सामने आया कि भवन के भूतल (252.68 वर्ग मीटर) पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही थी, जबकि प्रथम व द्वितीय तल आवासीय रूप में उपयोग में थे। इस दौरान दंपती ने एडीएम वित्त की जांच को भी स्वयं करने की बजाय स्टांप सहायक से कराने व निरीक्षण के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया। दोबारा जांच कराने का आवेदन दिया।
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अदालत ने पाया कि मौके पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने का खंडन नहीं किया गया। इसी के बाद आवेदन खारिज कर डीएम ने 10.65 लाख बकाया स्टांप, 1.50 लाख निबंधन शुल्क और 2.66 लाख रुपये जुर्माना लगा दिया। अदालत ने क्रेता पक्ष को बकाया धनराशि बैनामा तिथि 31 मई 2024 से 1.5 प्रतिशत प्रति माह ब्याज सहित जमा करने का आदेश दिया है। दंपती ने फैसले पर असंतुष्टि जताते हुए कहा कि संपत्ति का न तो कोई व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया, न ही आगे किया जाएगा।
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गांधी नगर में अस्पताल संचालक डॉ. मनीषा गुप्ता और उनके पति डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने दयाल प्रसाद तनेजा से गांधी नगर हाउसिंग स्कीम स्थित 297.25 वर्ग मीटर का एमआईजी भवन खरीदा था। रजिस्ट्री के समय दंपती ने भवन को आवासीय दर्शाते हुए केवल 9.59 लाख रुपये स्टांप और 1.38 लाख रुपये निबंधन शुल्क दिया था। पॉश एरिया में हुई खरीद की प्रशासनिक अमले ने जांच कराई।
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जांच में सामने आया कि भवन के भूतल (252.68 वर्ग मीटर) पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही थी, जबकि प्रथम व द्वितीय तल आवासीय रूप में उपयोग में थे। इस दौरान दंपती ने एडीएम वित्त की जांच को भी स्वयं करने की बजाय स्टांप सहायक से कराने व निरीक्षण के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया। दोबारा जांच कराने का आवेदन दिया।
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अदालत ने पाया कि मौके पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने का खंडन नहीं किया गया। इसी के बाद आवेदन खारिज कर डीएम ने 10.65 लाख बकाया स्टांप, 1.50 लाख निबंधन शुल्क और 2.66 लाख रुपये जुर्माना लगा दिया। अदालत ने क्रेता पक्ष को बकाया धनराशि बैनामा तिथि 31 मई 2024 से 1.5 प्रतिशत प्रति माह ब्याज सहित जमा करने का आदेश दिया है। दंपती ने फैसले पर असंतुष्टि जताते हुए कहा कि संपत्ति का न तो कोई व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया, न ही आगे किया जाएगा।