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मौसम बदलने से बढ़े मरीज
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:05 PM IST
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जिला अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एटा। मौसम में आए बदलाव से मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मौसम बदलने से मलेरिया रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
बरसात के मौसम में बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। विगत 15 दिनों से जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लगी है। जांच में अधिकांश मरीजों को मलेरिया, वायरल, टायफाइड की पुष्टि हो रही है। मौसमी बीमारी के चलते हर घर में एक सदस्य बीमार है। जिला अस्पताल में आम दिनों में करीब एक हजार मरीज आते हैं लेकिनइन दिनों दो हजार से ऊपर मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल प्रशासन की मानें तो पिछले साल तक बारिश के मौसम में ओपीडी की औसतन संख्या एक हजार तक रही है। इस बार दो हजार से ऊपर है। मलेरिया विभाग में जनवरी से अब तक 173 मरीज पहुंच चुके हैं। जुलाई महीने में 20 मरीजों का उपचार हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी से निपटने को कमर कस ली है। डेंगू और स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि अब तक कोई रोगी सामने नहीं आया है, लेकिन डेंगू रोगियों के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड बनवाया गया है।
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ये बरतें सावधानी
- पानी उबालने के बाद ठंडा कर पिएं।
- ताजा भोजन करें, भोजन हल्का और सुपाच्य हो।
- गंदगी से दूर रहें।
- बाजार में खुले में बिक रही खाद्य सामग्री खाने से परहेज करें।
- वायरल फीवर से पीड़ित मरीज से दूर रहें, जिससे संक्रमण न फैले।
- बारिश में भीगने से बचें, भीग जाएं तो तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
- बीमार पड़ने पर खुद को दूसरों से दूर कर लें।
- वायरल फीवर होने पर कम से कम पांच दिन बेड रेस्ट करें।
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दवाओं का हो रहा छिड़काव
बरसात से पनप रहे मच्छरों को मारने के लिए मलेरिया विभाग ने तैयारी कर ली है। विभाग की ओर से हर ब्लॉक में छिड़काव के लिए अल्फासायफर मैथेन और डीडीटी दी गई है। सीएचसी की टीमें हर ब्लॉक में जाकर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव कर रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डा. हर प्रसाद ने बताया कि मौसम बदलने से मलेरिया के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इनकी तुरंत जांच कराई जाती है और दवा दी जाती है। साथ ही ब्लॉक स्तर पर मच्छर मार दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
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मौसमी बीमारी का प्रकोप इस बार ज्यादा है। मौसम में नमी वायरस को बढ़ने की अनुकूल स्थिति पैदा कर रही है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में पहले एक हजार तक मरीज आते थे, लेकिन अब संख्या बढ़कर दो हजार हो गई है। मरीजों का समुचित उपचार कराया जा रहा है।
डा. बी सागर, सीएमएस
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बरसात के मौसम में बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। विगत 15 दिनों से जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लगी है। जांच में अधिकांश मरीजों को मलेरिया, वायरल, टायफाइड की पुष्टि हो रही है। मौसमी बीमारी के चलते हर घर में एक सदस्य बीमार है। जिला अस्पताल में आम दिनों में करीब एक हजार मरीज आते हैं लेकिनइन दिनों दो हजार से ऊपर मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल प्रशासन की मानें तो पिछले साल तक बारिश के मौसम में ओपीडी की औसतन संख्या एक हजार तक रही है। इस बार दो हजार से ऊपर है। मलेरिया विभाग में जनवरी से अब तक 173 मरीज पहुंच चुके हैं। जुलाई महीने में 20 मरीजों का उपचार हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी से निपटने को कमर कस ली है। डेंगू और स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि अब तक कोई रोगी सामने नहीं आया है, लेकिन डेंगू रोगियों के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड बनवाया गया है।
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ये बरतें सावधानी
- पानी उबालने के बाद ठंडा कर पिएं।
- ताजा भोजन करें, भोजन हल्का और सुपाच्य हो।
- गंदगी से दूर रहें।
- बाजार में खुले में बिक रही खाद्य सामग्री खाने से परहेज करें।
- वायरल फीवर से पीड़ित मरीज से दूर रहें, जिससे संक्रमण न फैले।
- बारिश में भीगने से बचें, भीग जाएं तो तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
- बीमार पड़ने पर खुद को दूसरों से दूर कर लें।
- वायरल फीवर होने पर कम से कम पांच दिन बेड रेस्ट करें।
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दवाओं का हो रहा छिड़काव
बरसात से पनप रहे मच्छरों को मारने के लिए मलेरिया विभाग ने तैयारी कर ली है। विभाग की ओर से हर ब्लॉक में छिड़काव के लिए अल्फासायफर मैथेन और डीडीटी दी गई है। सीएचसी की टीमें हर ब्लॉक में जाकर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव कर रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डा. हर प्रसाद ने बताया कि मौसम बदलने से मलेरिया के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इनकी तुरंत जांच कराई जाती है और दवा दी जाती है। साथ ही ब्लॉक स्तर पर मच्छर मार दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
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मौसमी बीमारी का प्रकोप इस बार ज्यादा है। मौसम में नमी वायरस को बढ़ने की अनुकूल स्थिति पैदा कर रही है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में पहले एक हजार तक मरीज आते थे, लेकिन अब संख्या बढ़कर दो हजार हो गई है। मरीजों का समुचित उपचार कराया जा रहा है।
डा. बी सागर, सीएमएस