{"_id":"5b4798244f1c1b0c278b60fb","slug":"111531418660-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी शिक्षकों को जांच के लिए आई टीम, बीएसए दफ्तर में खंगाले रिकार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी शिक्षकों को जांच के लिए आई टीम, बीएसए दफ्तर में खंगाले रिकार्ड
Updated Thu, 12 Jul 2018 11:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। फर्जी शिक्षकों की जांच के लिए शासन से गठित कमेटी ने गुरुवार को बीएसए दफ्तर, जिला शिक्षक और प्रशिक्षण संस्थान नगला अमान पर दस्तक दी। तीन सदस्यीय कमेटी ने शिक्षकों के अभिलेख जुटाए। जांच कमेटी के आने से जिले में हड़कंप मच गया। हालांकि टीम को कुछ शिक्षकों के अभिलेखों पर संदेह लगा। मगर टीम जांच के बाद ही निर्णय लेगी।
शासन के निर्देश पर गौतमबुद्ध नगर के डायट प्राचार्य संजय उपाध्याय, एडी बेसिक मेरठ अशोक कुमार, बेसिक शिक्षा निदेशालय के लेखाधिकारी सरोज कुमार जांच के लिए जिले में आए। टीम ने 16448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत 235 पदों पर, विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती में 400 और 12460 शिक्षक भर्ती में हुई 105 पदों पर भर्ती की जांच की।
टीम ने इन भर्तियों में चयनित हुए शिक्षकों की चयन सूची, सेवा पुस्तिका एवं शिक्षकों के अंकप्रत्रों और प्रमाण पत्रों की छायाप्रति तलब की। साथ ही जो शिक्षक विकलांग प्रमाण पत्र या किसी अन्य विशेष कोटे से चयनित हुए हैं, उनके भी अभिलेख मांगे गए। दोपहर करीब दो बजे टीम डायट नगला अमान पर पहुंची।
विज्ञापन
नगर विधायक मनीष असीजा ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर जिले में भी जांच कराने की मांग उठाई थी। नगर विधायक ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियो को साैंपे पत्र में कहा था कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो करीब 800 शिक्षक फर्जी निकल सकते हैं। विधायक की मांग पर शासन ने तीन सदस्यीय कमेटी को गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
फर्जी विकलांग प्रमाण पत्रों के सहारे जिले में दर्जनों शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। क्योंकि कम अंक होने के कारण विकलांग प्रमाण पत्र के सहारे कई शिक्षकों ने आसानी से नौकरी हासिल कर ली है। शासन के गठित विकलांग बोर्ड के सामने जाने से यह शिक्षक कतराते हैं।
इस जांच से पूर्व बीएड 2004 अभ्यर्थियों की जांच हो चुकी है। जिले में करीब 154 फर्जी शिक्षकों के अभिलेख फर्जी थे। एसआईटी ने जिले को रिपोर्ट सौंपी थी। उन शिक्षकों को बर्खास्ती के नोटिस भी थमाए गए थे। मगर शासन स्तर से ही मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
विगत साल टूंडला में एक शिक्षिका फर्जी अभिलेखों के सहारे लग गई थी। चार बार सत्यापन भी कराया तो शिक्षिका के अभिलेख शासन स्तर से दो बार असली और दो बार फर्जी मिले। पांचवीं बार में सत्यापन नकली पाया तो शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जसराना के पटीकरा स्कूल में भाई की जगह दूसरा भाई नौकरी कर रहा था। हालांकि पकड़े जाने पर शिक्षक ने बर्खास्तगी तो विभाग ने कर दी। मगर स्कूल खातों से धन निकाला गया और फर्जी शिक्षक वेतन लेता रहा, इस पर विभाग ने कोई विचार नहीं किया।
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर गौतमबुद्ध नगर के डायट प्राचार्य संजय उपाध्याय, एडी बेसिक मेरठ अशोक कुमार, बेसिक शिक्षा निदेशालय के लेखाधिकारी सरोज कुमार जांच के लिए जिले में आए। टीम ने 16448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत 235 पदों पर, विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती में 400 और 12460 शिक्षक भर्ती में हुई 105 पदों पर भर्ती की जांच की।
विज्ञापन
टीम ने इन भर्तियों में चयनित हुए शिक्षकों की चयन सूची, सेवा पुस्तिका एवं शिक्षकों के अंकप्रत्रों और प्रमाण पत्रों की छायाप्रति तलब की। साथ ही जो शिक्षक विकलांग प्रमाण पत्र या किसी अन्य विशेष कोटे से चयनित हुए हैं, उनके भी अभिलेख मांगे गए। दोपहर करीब दो बजे टीम डायट नगला अमान पर पहुंची।
विज्ञापन
नगर विधायक मनीष असीजा ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर जिले में भी जांच कराने की मांग उठाई थी। नगर विधायक ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियो को साैंपे पत्र में कहा था कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो करीब 800 शिक्षक फर्जी निकल सकते हैं। विधायक की मांग पर शासन ने तीन सदस्यीय कमेटी को गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
फर्जी विकलांग प्रमाण पत्रों के सहारे जिले में दर्जनों शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। क्योंकि कम अंक होने के कारण विकलांग प्रमाण पत्र के सहारे कई शिक्षकों ने आसानी से नौकरी हासिल कर ली है। शासन के गठित विकलांग बोर्ड के सामने जाने से यह शिक्षक कतराते हैं।
इस जांच से पूर्व बीएड 2004 अभ्यर्थियों की जांच हो चुकी है। जिले में करीब 154 फर्जी शिक्षकों के अभिलेख फर्जी थे। एसआईटी ने जिले को रिपोर्ट सौंपी थी। उन शिक्षकों को बर्खास्ती के नोटिस भी थमाए गए थे। मगर शासन स्तर से ही मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
विगत साल टूंडला में एक शिक्षिका फर्जी अभिलेखों के सहारे लग गई थी। चार बार सत्यापन भी कराया तो शिक्षिका के अभिलेख शासन स्तर से दो बार असली और दो बार फर्जी मिले। पांचवीं बार में सत्यापन नकली पाया तो शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जसराना के पटीकरा स्कूल में भाई की जगह दूसरा भाई नौकरी कर रहा था। हालांकि पकड़े जाने पर शिक्षक ने बर्खास्तगी तो विभाग ने कर दी। मगर स्कूल खातों से धन निकाला गया और फर्जी शिक्षक वेतन लेता रहा, इस पर विभाग ने कोई विचार नहीं किया।