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दर्शनीय बन गया तीर्थनगरी का रेलवे स्टेशन
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सोरों। तीर्थनगरी के रेलवे स्टेशन को दर्शनीय बनाकर रेलवे ने अपने बेहतर प्रयासों का प्रमाण प्रस्तुत कर दिया है। सोरों उत्तर भारत की प्रसिद्ध तीर्थस्थली है। यहां राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात के अलावा देश के विभिन्न राज्यों सहित प्रदेश के सुदूर इलाकों से प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। हरिपदी में गंगास्नान के बाद श्रद्धालु देव दर्शन करते हैं। तीर्थनगरी की यूं तो अपनी अलग पहचान है, लेकिन यहां विकास की काफी जरूरत है।
दो साल पहले तत्कालीन रेल महाप्रबंधक राजीव मिश्रा सोरों के रेलवे स्टेशन पर वार्षिक निरीक्षण को आए थे। उस समय जीएम ने रेलवे स्टेशन पर सुंदरीकरण की अपार संभावनाएं जताई थी। जीएम ने स्टेशन के प्रवेश द्वार को भगवान वराह के मंदिर स्वरूप बनाने की योजना बनाई थी। तुलसीनगरी से प्रभावित जीएम निरीक्षण के एक सप्ताह बाद ही फिर सोरों आए और भगवान वराह मंदिर में दर्शन किए।
इस बार उनके हाथ में रेलवे स्टेशन के मंदिरनुमा आकार का नक्शा था। श्रद्धालुओं से उन्होंने सलाह ली और रेलवे ने मंदिरनुमा प्रवेश द्वार के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया। रेलवे के प्रयासों से तीर्थनगरी का स्टेशन आकर्षण का तीर्थनगरी का रेलवे स्टेशन श्रद्धालुओं के लिए दर्शनीय बन गया है।
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भगवान वराह मंदिर के स्वरूप में सजा रेलवे स्टेशन का प्रवेश द्वार आस्था को महका रहा है। रेलवे के इस प्रयास पर पुरोहित भी गदगद हैं। स्टेशन के इस आकर्षण का दीदार श्रद्धालुओं को भी लुभाने लगा है।
करोड़ की लागत से बदला स्वरूप
सोरों। रेलवे स्टेशन का स्वरूप एक करोड़ रुपये की लागत से बदला गया है। यहां यात्री विश्राम गृह, वेटिंग रूम, प्लेटफार्म को भी आकर्षण बनाया गया है। दीवारों पर लगे पत्थर की फिनिशिंग पर रंगरोगन का काम रेलवे ने लगभग पूरा कर लिया है। भगवान वराह की आकर्षक मूर्तियां और पानी के बीच लगा फव्वारा स्टेशन को पर्यटक स्थल दर्शा रहा है।
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दो साल पहले तत्कालीन रेल महाप्रबंधक राजीव मिश्रा सोरों के रेलवे स्टेशन पर वार्षिक निरीक्षण को आए थे। उस समय जीएम ने रेलवे स्टेशन पर सुंदरीकरण की अपार संभावनाएं जताई थी। जीएम ने स्टेशन के प्रवेश द्वार को भगवान वराह के मंदिर स्वरूप बनाने की योजना बनाई थी। तुलसीनगरी से प्रभावित जीएम निरीक्षण के एक सप्ताह बाद ही फिर सोरों आए और भगवान वराह मंदिर में दर्शन किए।
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इस बार उनके हाथ में रेलवे स्टेशन के मंदिरनुमा आकार का नक्शा था। श्रद्धालुओं से उन्होंने सलाह ली और रेलवे ने मंदिरनुमा प्रवेश द्वार के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया। रेलवे के प्रयासों से तीर्थनगरी का स्टेशन आकर्षण का तीर्थनगरी का रेलवे स्टेशन श्रद्धालुओं के लिए दर्शनीय बन गया है।
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भगवान वराह मंदिर के स्वरूप में सजा रेलवे स्टेशन का प्रवेश द्वार आस्था को महका रहा है। रेलवे के इस प्रयास पर पुरोहित भी गदगद हैं। स्टेशन के इस आकर्षण का दीदार श्रद्धालुओं को भी लुभाने लगा है।
करोड़ की लागत से बदला स्वरूप
सोरों। रेलवे स्टेशन का स्वरूप एक करोड़ रुपये की लागत से बदला गया है। यहां यात्री विश्राम गृह, वेटिंग रूम, प्लेटफार्म को भी आकर्षण बनाया गया है। दीवारों पर लगे पत्थर की फिनिशिंग पर रंगरोगन का काम रेलवे ने लगभग पूरा कर लिया है। भगवान वराह की आकर्षक मूर्तियां और पानी के बीच लगा फव्वारा स्टेशन को पर्यटक स्थल दर्शा रहा है।