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करोड़ों खर्च, फिर भी बंद नहीं हुई खुले में शौच
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विद्यालय में बना शौचालय
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन खुले में शौच से जिले को मुक्ति नहीं मिल सकी। शौचालयों के नाम पर जमकर गोलमाल हुए और दोषी बचाए जाते रहे। प्रशासन ने 30 अक्तूबर को जिले में खुले में शौच मुक्त घोषित कर अपना कोरम पूरा कर दिया, लेकिन आलम यह है कि जिले में आज भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। तमाम गांवों में न तो शौचालय बने हैं और न ही लाभार्थियों को पूरा अनुदान मिला है। पढ़िए रिपोर्ट...
कमजोर पड़ रही जागरूकता
जिले में लोगों को जागरूक करने के लिए तमाम कवायदें की गईं। जनवरी 2018 में जिले में आयोजित हुए एटा महोत्सव का तो पूरा फोकस ही खुले में शौच मुक्ति पर रहा। इसके साथ ही तमाम कार्यशालाओं के जरिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, लेकिन फिर भी जागरूकता कमजोर रही।
64 करोड़ रुपये मिले
जिले को मौजूदा वित्तीय वर्ष में शौचालय निर्माण का अनुदान बांटने के लिए 64 करोड़ रुपये दिए गए। जिसमें से विभाग ने 48 करोड़ रुपये लाभार्थियों को आवंटित कर दिए, लेकिन फिर भी तमाम लाभार्थी अनुदान से वंचित हैं।
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73 गांव ओडीएफ नहीं
खुले में शौच मुक्ति की हकीकत जिले में यह है कि अब तक 73 गांव ओडीएफ नहीं हैं। जबकि 62 ग्राम पंचायतों में खुले में शौच मुक्ति का काम अधूरा पड़ा है। आलम यह है कि शौचालय के नाम पर हुए गोलमाल के बाद सारे अधिकारी और कर्मचारी नदारद हैं।
खूब लुटा सरकारी धन
जिले में ओडीएफ के नाम पर जमकर सरकारी खजाने को खाली किया गया। कभी पंचायतें, तो कभी शौचालय अनुदान, कभी कार्यक्रम, कार्यशाला और आयोजनों के नाम पर खूब धन खर्च किया गया, लेकिन अब तक कवायद नजर नहीं आती।
आंकड़ों पर एक नजर
64 करोड़ रुपये मिले मौजूदा वर्ष में
48 करोड़ रुपये किए गए खर्च
73 गांव अब तक नहीं हुए ओडीएफ
62 ग्राम पंचायतें भी ओडीएफ नहीं
ओडीएफ घोषित होने के बाद 90 दिन का समय है। जिसमें जहां भी कुछ कमियां रह गई है। उन्हें दूर किया जा रहा है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है।
आईपी पांडेय , जिलाधिकारी
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कमजोर पड़ रही जागरूकता
जिले में लोगों को जागरूक करने के लिए तमाम कवायदें की गईं। जनवरी 2018 में जिले में आयोजित हुए एटा महोत्सव का तो पूरा फोकस ही खुले में शौच मुक्ति पर रहा। इसके साथ ही तमाम कार्यशालाओं के जरिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, लेकिन फिर भी जागरूकता कमजोर रही।
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64 करोड़ रुपये मिले
जिले को मौजूदा वित्तीय वर्ष में शौचालय निर्माण का अनुदान बांटने के लिए 64 करोड़ रुपये दिए गए। जिसमें से विभाग ने 48 करोड़ रुपये लाभार्थियों को आवंटित कर दिए, लेकिन फिर भी तमाम लाभार्थी अनुदान से वंचित हैं।
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73 गांव ओडीएफ नहीं
खुले में शौच मुक्ति की हकीकत जिले में यह है कि अब तक 73 गांव ओडीएफ नहीं हैं। जबकि 62 ग्राम पंचायतों में खुले में शौच मुक्ति का काम अधूरा पड़ा है। आलम यह है कि शौचालय के नाम पर हुए गोलमाल के बाद सारे अधिकारी और कर्मचारी नदारद हैं।
खूब लुटा सरकारी धन
जिले में ओडीएफ के नाम पर जमकर सरकारी खजाने को खाली किया गया। कभी पंचायतें, तो कभी शौचालय अनुदान, कभी कार्यक्रम, कार्यशाला और आयोजनों के नाम पर खूब धन खर्च किया गया, लेकिन अब तक कवायद नजर नहीं आती।
आंकड़ों पर एक नजर
64 करोड़ रुपये मिले मौजूदा वर्ष में
48 करोड़ रुपये किए गए खर्च
73 गांव अब तक नहीं हुए ओडीएफ
62 ग्राम पंचायतें भी ओडीएफ नहीं
ओडीएफ घोषित होने के बाद 90 दिन का समय है। जिसमें जहां भी कुछ कमियां रह गई है। उन्हें दूर किया जा रहा है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है।
आईपी पांडेय , जिलाधिकारी