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शिक्षकों के लिए पीएचडी की 10 फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी

Thu, 03 Feb 2022 01:27 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:27 AM IST
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10 percent seats of PhD will be reserved for teachers
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में पीएचडी की 10 फीसदी सीटें शिक्षकों के लिए आरक्षित रहेंगी। इन सीटों पर प्रवेश विश्वविद्यालय परिसर के आवासीय संस्थानों व संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को ही प्रवेश दिया जाएगा। बुधवार को यह निर्णय विश्वविद्यालय की रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (आरएसी) की बैठक में लिया गया। यही नहीं, शासनादेश की कड़ी में शिक्षकों को कोर्स वर्क ऑनलाइन करने का भी विकल्प दिया जाएगा।
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इससे पहले विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए पीएचडी में प्रवेश के लिए सीटें आरक्षित नहीं थीं। शिक्षकों के पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन करने पर यह सहूलियत दी जाती थी कि उन्हें प्रवेश परीक्षा नहीं देनी पड़ती थी। मेरिट लिस्ट में आने पर उनका प्रवेश ले लिया जाता था। आरएसी की बैठक डीन रिसर्च प्रो. मीनाक्षी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई। इसमें तय किया गया कि वर्ष 2014 के पहले के जिन 67 शोधार्थियों की थीसिस का मूल्यांकन होने के बाद वायवा नहीं हो पाया है, उनका वायवा एक माह के अंदर करा लिया जाएगा। शोधार्थियों की सूची और कार्यक्रम वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा। जिससे वह सूची देखकर संपर्क कर लें। बैठक में डिप्टी डीन रिसर्च प्रो. बीपी सिंह, प्रो. सुगम आनंद, प्रो. यूसी शर्मा, प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा और एआर रिसर्च कैलाश बिंद की उपस्थिति रही।
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स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षक भी शोध पर्यवेक्षक बनाए जाएंगे। इनके आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया फिर से खोली जाएगी। शासनादेश की कड़ी में आरएसी में इस पर भी निर्णय लिया गया। शिक्षक संगठन की ओर से इन शिक्षकों को शामिल कराए जाने की मांग भी की जा रही थी।
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अधिकतर एडेड कॉलेजों में आयोग से चयनित प्राचार्यों की तैनाती हो गई है। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक भी प्राचार्य बने हैं। इनके निर्देशन में पीएचडी कर रहे शोधार्थी परेशान हैं। आरएसी में तय किया गया कि शिक्षक जहां प्राचार्य बने हैं, वहां सेंटर होने पर शोधार्थी का स्थानांतरण किया जा सकता है। अन्यथा की स्थिति में शोधार्थी का गाइड बदलेगा।
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