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इलाहाबाद के नारी निकेतनों में अव्यवस्थाओं का अंबार, उठे कई गंभीर सवाल

Tue, 07 Aug 2018 03:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 07 Aug 2018 03:37 AM IST
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A lot of clutters is felt in nari niketans in Allahabad
डेमो तस्वीर

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में खुल्दाबाद स्थित महिला निकेतन और बालिका संरक्षण गृह की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला निकेतन और बालिका एवं शिशु संरक्षण गृह एक ही भवन में हैं। परिसर में राजकीय संप्रेक्षण गृह भी है। महिला निकेतन में 10, बालिका में 12 तथा शिशु संरक्षण गृह में 14 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लखनऊ से सीधे इनकी मॉनिटरिंग की जाती है। इनमें से तीनों गृहों के चार-चार, यानी 12 कैमरे लखनऊ मुख्यालय से जुड़े हैं। ऐसे में संरक्षण गृह प्रशासन का पुख्ता सुरक्षा का दावा है। 

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इसके विपरीत पिछले महीने नारी निकेतन से दो महिलाएं फरार हो गईं। हालांकि बाद में मिल भी गईं, लेकिन इस घटना से कई सवाल खड़े हो गए। दोनों महिलाएं साड़ी लटकाकर फरार हुईं थीं, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या तीसरी मंजिल से कोई लड़की या महिला इस तरह से उतर सकती है। फिर यह सीसीटीवी कैमरा में क्यों कैद नहीं हुआ। 
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इसके अलावा इस घटना के दौरान एक कैमरे में आटा लगा मिला था। किसी महिला की शरारत की बात करके इसे टाल दिया गया। सहायक अधीक्षक विवेक द्विवेदी ने इस बारे में अनभिज्ञता जताई तो बाल कल्याण समिति (सीडीसी) के सदस्य इस बारे में बोलने से बचते रहे। इससे पहले प्रथम तल पर स्थित बालिका गृह से भी तीन लड़कियां भाग गईं थीं। उन्होंने तो चाभी चुरा ली थी। हालांकि बाद में उन्हें भी पकड़ लिया गया था, लेकिन कुछ महीनों में ही महिलाओं और बालिकाओं के फरार होने की दो घटनाओं कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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अलर्ट के बाद नारी निकेतनों में पहुंचे अफसर

देवरिया के महिला संरक्षण गृह में उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद यहां भी अफसरों की टीम नारी निकेतनों में पहुंची। कहीं से खामी की बात तो सामने नहीं आई है, लेकिन अफसरों ने सुरक्षा की बाबत निर्देश दिए।


बालगृह में मानसिक दिव्यांग भी रहते हैं साथ

खुल्दाबाद स्थिति बाल शिशु गृह में दिव्यांग बच्चे भी साथ में रहते हैं। वहां 25 जिलों से अनाथ बच्चे आते हैं। इस समय कुल 43 बच्चे हैं। दत्तक गृह में 32 बच्चे हैं, जबकि  क्षमता मात्र 10 की है। इसके अलावा वहां सात मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे हैं। सुविधाओं के लिहाज से उनके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन सभी बच्चे साथ में रहते हैं। इसके पीछे संसाधन की कमी मुख्य वजह है।

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