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थमेगी बैंड-बाजा-बारात, सोने जा रहे हैं भगवान
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 12 Jul 2013 10:13 AM IST
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बैंड-बाजा के साथ बारातों के अब चंद दिन ही बचे हैं, क्योंकि हरिशयनी एकादशी के साथ ही भगवान अगले चार महीनों के लिए सो जाएंगे।
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इसी के साथ शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर उनके उठने तक विराम लग जाएगा।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी हरिशयनी एकादशी पर शुक्रवार को व्रत-पूजन के बाद भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाएंगे।
भगवान 13 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी यानी देवोत्थानी एकादशी पर जागेंगे और उसके बाद से ही शादियों की सहालगें और मंगल कार्य शुरू होंगे।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी शुक्रवार को है। उस दिन से चातुर्मास भर भगवान विष्णु निद्रामग्न रहेंगे। इस दौरान विवाह, मांगलिक कार्य रुके रहेंगे।
आचार्य ने बताया कि चूंकि वर को नारायण का ही रूप माना जाता है, इसलिए उनके विश्रामकाल में वैवाहिक कार्य करना श्रेयस्कर नहीं रहता।
उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी (जिसे देवोत्थानी एकादशी या हरिप्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है) पर देवताओं के जागने के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
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एकादशी पर ऐसे करें पूजा
आचार्य प्रदीप के मुताबिक एकादशी पर रात में विष्णु पूजन कर उनका दुग्धधारा और नारायण सूक्ति से अभिषेक करना चाहिए। भोग लगाकर उन्हें सुंदर आसन पर वस्त्रादि के साथ शयन करवाना चाहिए।
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आचार्य के मुताबिक देवताओं के सोने से पहले तीन उत्तम मुहूर्तों वाली 12, 13 और 16 जुलाई की सहालगें बची हैं।
भगवान के जागने के बाद 53 सहालगें
13 नवंबर को हरिप्रबोधिनी-देवोत्थानी एकादशी पर भगवान के जागने के बाद वर्तमान संवत्सर 2070 में शादी-विवाह के लिए कुल 53 लग्नें होंगी। नवंबर में 18 से सहालगें शुरू होंगी लेकिन दिसंबर में खरमास लगने के चलते 16 दिसंबर से एक बार फिर सहालगों का दौर थमेगा।
नवंबर: 18, 19, 24, 25, 27, 28, 29 और 30।
दिसंबर: 2, 3, 4, 6, 10, 11, 12, 15 और 16।
जनवरी: 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29।
फरवरी: 3, 4, 5, 8, 9, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25 और 26।
मार्च : 2, 3, 4, 7, 8, 9 और 14।