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क्वीन मेरी में बिजली गुल, ऑपरेशन टले
Lucknow
Updated Thu, 27 Jun 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का क्वीन मेरी अस्पताल एक बार फिर बिजली संकट से जूझ रहा है। ट्रांसफार्मर फुंक जाने से बीते 36 घंटे से अस्पताल की बिजली गुल है। इसके चलते ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। इस दौरान डॉक्टरों ने सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए। वहीं, ओपीडी, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड से लेकर आईसीयू तक में गर्मी से डॉक्टर और मरीज बेहाल हैं। उमस के कारण ऑपरेशन कराने वाली महिलाएं और नवजात शिशुओं को भी दिक्कत हो रही है।
एक महीने के अंदर दूसरी बार क्वीन मेरी अस्पताल में बिजली संकट पैदा हुआ है। ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण मंगलवार सुबह 11:30 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। इसके 36 घंटे बाद तक बिजली आपूर्ति को बहाल नहीं किया जा सका। इससे 240 बेड के क्वीन मेरी अस्पताल में त्राहि-त्राहि मची रही। अस्पताल में बिजली समस्या ठीक होने का नाम नहीं ले रही है। बीती 23 मई को ट्रांसफार्मर फुंकने से कई दिनों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही थी। किसी तरह 410 केबी का ट्रांसफार्मर लगाकर व्यवस्था को संचालित किया गया, लेकिन ट्रांसफार्मर फुंकने के कारणों की पड़ताल न तो बिजली विभाग ने और न ही अस्पताल प्रशासन ने जरूरी समझी। इसी वजह से मंगलवार को एक बार फिर ट्रांसफार्मर फुंक गया। इसके बाद से लगातार 36 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही। इसके चलते अस्पताल के एसी-कूलर बंद करा दिए गए। सामान्य वार्डों में भी अंधेरा छाया रहा। जेनरेटर से पंखे चलने के बावजूद मरीज और उनके घरवाले गर्मी से जूझते रहे। परिवारीजनों ने बताया कि पंखा इतना धीमा चलता है कि हवा ही नहीं लगती। हाथ के पंखे के सहारे काम चलाया जा रहा है। वार्ड में उमस के कारण रहना मुश्किल हो रहा है। मरीजों को भी वार्ड के बाहर जमीन पर चादर बिछाकर रखा गया है। एक मरीज के परिवारीजन ने बताया कि बिजली न होने से वाटर कूलर बंद है। शौचालय में भी पानी की किल्लत हो गई है। बाहर से बाल्टी भरकर पानी लाना पड़ रहा है। वहीं, पीने के लिए बोतलबंद पानी ला रहे हैं।
सर्जरी विभाग में शाम से अंधेरा
क्वीन मेरी अस्पताल के साथ ही केजीएमयू के मुख्य परिसर में भी बुधवार शाम चार बजे से बिजली गुल हो गई। केबल फॉल्ट के चलते यह संकट उत्पन्न हुआ और इससे सर्जरी, गांधी वार्ड, पैराप्लीजिया वार्ड में गर्मी से मरीज और परिजन परेशान रहे। सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में जेनरेटर का बैकअप न होने के कारण वार्ड में अंधेरा छाया रहा। देर रात यहां बिजली आपूर्ति शुरू हुई।
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एक महीने के अंदर दूसरी बार क्वीन मेरी अस्पताल में बिजली संकट पैदा हुआ है। ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण मंगलवार सुबह 11:30 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। इसके 36 घंटे बाद तक बिजली आपूर्ति को बहाल नहीं किया जा सका। इससे 240 बेड के क्वीन मेरी अस्पताल में त्राहि-त्राहि मची रही। अस्पताल में बिजली समस्या ठीक होने का नाम नहीं ले रही है। बीती 23 मई को ट्रांसफार्मर फुंकने से कई दिनों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही थी। किसी तरह 410 केबी का ट्रांसफार्मर लगाकर व्यवस्था को संचालित किया गया, लेकिन ट्रांसफार्मर फुंकने के कारणों की पड़ताल न तो बिजली विभाग ने और न ही अस्पताल प्रशासन ने जरूरी समझी। इसी वजह से मंगलवार को एक बार फिर ट्रांसफार्मर फुंक गया। इसके बाद से लगातार 36 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही। इसके चलते अस्पताल के एसी-कूलर बंद करा दिए गए। सामान्य वार्डों में भी अंधेरा छाया रहा। जेनरेटर से पंखे चलने के बावजूद मरीज और उनके घरवाले गर्मी से जूझते रहे। परिवारीजनों ने बताया कि पंखा इतना धीमा चलता है कि हवा ही नहीं लगती। हाथ के पंखे के सहारे काम चलाया जा रहा है। वार्ड में उमस के कारण रहना मुश्किल हो रहा है। मरीजों को भी वार्ड के बाहर जमीन पर चादर बिछाकर रखा गया है। एक मरीज के परिवारीजन ने बताया कि बिजली न होने से वाटर कूलर बंद है। शौचालय में भी पानी की किल्लत हो गई है। बाहर से बाल्टी भरकर पानी लाना पड़ रहा है। वहीं, पीने के लिए बोतलबंद पानी ला रहे हैं।
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सर्जरी विभाग में शाम से अंधेरा
क्वीन मेरी अस्पताल के साथ ही केजीएमयू के मुख्य परिसर में भी बुधवार शाम चार बजे से बिजली गुल हो गई। केबल फॉल्ट के चलते यह संकट उत्पन्न हुआ और इससे सर्जरी, गांधी वार्ड, पैराप्लीजिया वार्ड में गर्मी से मरीज और परिजन परेशान रहे। सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में जेनरेटर का बैकअप न होने के कारण वार्ड में अंधेरा छाया रहा। देर रात यहां बिजली आपूर्ति शुरू हुई।
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