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बेकसूरों की जान लेने वाले आज भी मस्त

Thu, 13 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Thu, 13 Jun 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। सीधे मुख्यमंत्री से जुडे़ होने के बावजूद पावर कॉरपोरेशन में मनमानी व्यवस्था चल रही है। कम से कम लेसा की हालत देखकर ऐसा ही लगता है। बीते 21 माह में लेसा की लापरवाही से 5 पांच लोगों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। इनमें दो मासूमों समेत संविदा कर्मी व छात्र शामिल हैं। मृतकों के परिवार को महज मुआवजा देकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। लेकिन जिनकी लापरवाही से बेकसूरों की जान गई, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने स्पष्ट रूप से जूनियर इंजीनियरों व लाइन कर्मियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब अधिकारी निदेशालय की भी नहीं सुनते तो आखिर किसकी सुनेंगे।
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बालाघाट उपकेंद्र के तहत मौज्जमनगर स्थित नऊवनटोला में मंगलवार को टूटे बिजली तार की चपेट में आकर मुबारक अली के मासूम बेटे रेहान की मौत हो गई। इसके साथ ही पुरानी घटनाओं की याद एक बार फिर से ताजा हो गई। पड़ताल में पता चला कि हादसों के जिम्मेदारों में से एक पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। समेसी उपकेंद्र के भैरमपुर निवासी प्रियांशु की घर जाने के दौरान सड़क पर टूटे तार ने जान ले ली। एक्सईएन ने खुद को बचाने के लिए क्षेत्रीय कर्मियों को सस्पेंड कर दिया। आठ महीने बाद एक्सईएन रामनरेश सरोज ने मुआवजे के तौर पर परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा दिया। मामले की जानकारी होने के बावजूद उच्च अफसरों ने एक्सईएन पर कोई कार्रवाई नहीं की। जवाहर भवन उपकेंद्र के तहत जयप्रकाश नगर निवासी शिवकुमार की बेटी लक्ष्मी एवं बेटे छोटू स्टे वायर मेें चिपकने के बाद लक्ष्मी की मौत पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने जूनियर इंजीनियर कैलाश एवं लाइनमैन राम मिलन के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। कार्रवाई के लिए एक्सईएन को निर्देशित किया गया, लेकिन जांच की फाइल धूल फांक रही है।
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जांच रिपोर्ट का अता पता नहीं
जवाहर भवन उपकेंद्र के डीजीपी ऑफिस के निकट हाईटेंशन लाइन पर संविदा कर्मी राम खेलावन को बिना सुरक्षा बेल्ट के चढ़ाकर काम कराया जा रहा था। करंट की चपेट में आने से राम खेलावन पोल से नीचे आ गिरा। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार को एक लाख रुपये का मुआवजा देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस संबंध में जूनियर इंजीनियर पर कार्रवाई करने की विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने लेसा को जो रिपोर्ट भेजी उसका कहीं अता पता नहीं है। मध्यांचल से लेकर लेसा तक जानकारी होने के बावजूद मामले में कार्रवाई का कोई आदेश नहीं दिया गया। चर्चा है कि एक अधिकारी ने पूरी जांच रिपोर्ट को गायब करा दिया है।
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होर्डिंग में उतरे करंट से पवन की मौत
रेजीडेंसी उपकेंद्र क्षेत्र में कर्मियों की लापरवाही के चलते विकासनगर निवासी पवन की मौत हुई। बस अड्डे के आस-पास के लोगों ने बताया कि जर्जर तार छूने से आए दिन होर्डिंग में करंट आ जाता है। उपकेंद्र पर शिकायत के बावजूद ध्यान नहीं दिया गया और पवन को जान गंवानी पड़ी। यही नहीं परिवा के लोगों को मौत की खबर कई दिन मिली थी।

बिजली पोल बने यमदूत, तार मौत का जाल
लखनऊ (ब्यूरो)। महबूबगंज में मंगलवार को सब्जी विक्रेता के दो सगे भाइयोें के चिपकने व छोटे भाई की मौत के बाद से लोग दहशत में हैं। यहां के लोगों को बिजली पोल यमदूत और तार मौत का जाल नजर आते हैं, क्योेंकि जर्जर तारों में इतने जोड़ हैं कि इनके खुलने का खतरा 24 घंटों है। पूर्व में भी करंट के लगे झटके से सबक लेते हुए इस घटना से पहले ही तमाम किराएदार यहां से पलायन कर चुके हैं।
अमर उजाला प्रतिनिधि शाम चार बजे महबूबगंज स्थित मृतक रेहान के घर पहुंचा तो चौतरफा गमगीन माहौल था। रेहान की मां बेहोश थी और होश आने पर बड़बड़ाने लगती थी। घर के बाहर मोहल्ले के लोगों का जमावड़ा था। प्रतिनिधि ने मंगलवार की घटना को लेकर कुरेदा तो लोगों का लेसा के प्रति आक्रोश फूट पड़ा। इस्माइल ने कहा कि महबूबगंज ही नहीं वजीरबाग से बाबा हजारा बाग तक बारिश होते ही अधिकतर पोल में करंट उतर आता है इससे कई मवेशी काल के गाल में समा चुके हैं। कहा कि एलटी लाइन के तार मकान के करीब से निकले हैं। इससे बारिश एवं तेज हवा के झोकों से तार टकराते हैं तो चिंगारी छतों पर गिरती है। वहीं, शाहरुख ने बताया कि हफ्ते भर पहले ही एक बच्ची पोल में उतरे करंट से चिपकी गई जो बाल-बाल ही बची। दो महीने पहले एक किराएदार के बेटे को करंट का झटका लगा तो वह यहां से चला गया। बताया कि बाबा हजारा बाग में जो ट्रांसफार्मर रखा है, बारिश में उसका करंट जमीन पर उतर आता है। यही नहीं, राम-श्याम के घर के सामने स्थित एलटी पेटी के कारण लोगोें को करंट लग चुका है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। पूर्व पार्षद सुशील शुक्ला ने बताया कि यहां के बिजली पोल यमदूत व चौतरफा खींचे गए जर्जर तार मौत के जाल के समान हैं। कहा कि इसके खिलाफ आवाज हुई तो बालाघाट के पूर्व जेई ने उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा तक दर्ज करा दिया था।

लेसा की लीपापोती शुरू
लेसा प्रशासन की उदासीनता की पराकाष्ठा यह है कि उसने अब तक मासूम की जान जाने के प्रकरण की जांच कराने की जहमत तक नहीं की। अफसर लापरवाहों पर कार्रवाई करने के बजाय बचाने में जुटे हैं। पुलिस उपाधीक्षक एवं अपर सिटी मजिस्ट्रेट के सामने मोहल्ले के लोग चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि तीन घंटे तक तार टूटा पड़ा रहा, लेकिन लेसा की सफाई है कि जिस वक्त तार टूटा वहां पर उनका कर्मचारी मौजूद था। सवाल है कि कर्मचारी मौजूद था तो बिजली क्यों बंद नहीं की। जूनियर इंजीनियर का दावा कि उसको किसी ने कॉल ही नहीं की तो घटना के आसपास के वक्त की उसके मोबाइल में कितनी कॉल मिस्ड हुई की जांच नहीं कराई। दरअसल लेसा इस प्रकरण की लीपापोती में जुटा है।

जांच के बाद मुआवजा
ठाकुरगंज के एक्सईएन आशुतोष श्रीवास्तव ने बुधवार को बताया कि दुर्घटना के सिलसिले में विद्युत सुरक्षा निदेशालय को सूचना भेज दी गई है। निदेशालय की टीम मौके की जांच करने के बाद जब रिपोर्ट दाखिल करेगी तो पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। श्रीवास्तव के अनुसार निदेशालय की टीम ने 17 जून को घटना स्थल की जांच करने जाएगी।

करंट से झुलसा कर्मचारी पोल से गिरा
लखनऊ। उतरेठिया उपकेंद्र का संविदा कर्मचारी दूसरे संविदाकर्मी की लापरवाही के चलते 11 हजार वोल्ट के करंट से झुलसकर पोल से गिर गया। इससे कर्मचारी का एक हाथ एवं पैर बेकार हो गया है। जानकारों की माने तो निशक्त श्रमिक से संविदा कर्मचारी ने पिपरौली फीडर का शट डाउन मांगा था, लेकिन उसने दूसरे फीडर का शट डाउन दे दिया। इससे कर्मचारी ने जैसे ही पिपरौली फीडर पर चढ़ काम करने का प्रयास किया तो करंट से झुलस गया।उपखंड अधिकारी एके सिंह ने बताया कि संविदा कर्मचारी पिपरौली निवासी शैलेंद्र यादव (32) ने सुबह 9:10 बजे निशक्त कर्मी सुरेंद्र से मोबाइल पर शट डाउन मांगा था। शैलेंद्र पिपरौली गांव में आ रहे कम वॉल्टेज को सही करने गया था। हादसे की खबर से शैलेंद्र व उपकेंद्र से कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उसको निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं, संविदा कर्मियों के प्रतिनिधि रामपाल मिश्रा ने अन्य कर्मियों के साथ में अस्पताल के समक्ष गए व उसके परिजनों को पांच लाख की आर्थिक सहायता की मांग की। उधर, जेई आरपी सिंह ने बताया कि एसएसओ के रूप में संविदाकर्मी रामजी और सहायक के रूप में सुरेंद्र ड्यूटी पर थे। नियमित कर्मी सुरेंद्र के निशक्त होने से उससे दिन में ऑपरेशन का कार्य लिया जाता है। शट डाउन सुरेंद्र ने ही दिया था, लेकिन शैलेंद्र को करंट कैसे लगा जांच हो रही।


ट्रॉली फटी, संविदाकर्मी जख्मी
मोहनलालगंज में भी मंगलवार रात फीडर की तकनीकी खराबी को दूर कर रहे संविदाकर्मी सुजीत सैनी (35) ट्रॉली फटने से जख्मी हो गया। जेई राजीव गंगवार ने बताया ट्रॉली का गरम तेल उसके ऊपर आ गिरा। इससे हाथ, पैर चेहरा व कई अंग जल गए। पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराने के बाद सुजीत को सिविल पहुंचाया गया, जहां बेड खाली न होने से उसे घर छोड़ दिया गया। घायल को उपचार के नाम पर एक हजार रुपए की मदद की गई। जबकि तीन महीने से पारिश्रमिक नसीब नहीं हुआ है।

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