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दस्तावेज न मिलने से लटकी नियुक्तियों की जांच
Lucknow
Updated Sun, 12 May 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केेंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शिक्षकों की नियुक्ति की जांच लटक गई है। जांच कमेटी को मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में विश्वविद्यालय के ही कुछ अधिकारियों ने हीलाहवाली की थी। दूसरी ओर जांच कमेटी के एक सदस्य ने अपना नाम वापस ले लिया है। अब कमेटी में नए सिरे से एक सदस्य को जोड़ा जाएगा। साथ ही दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी दूसरे अधिकारी को दे दी गई है।
बीबीएयू के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) की बैठक शनिवार को कुलपति प्रो. आरसी सोबती की अध्यक्षता में हुई। बॉम के एजेंडे का सबसे अहम मसला शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बनी जांच कमेटी की रिपोर्ट था। बीबीएयू की आठ मार्च को हुई बॉम की बैठक में तीन सदस्यीय जांच कमेटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. समीन जयरामपुरी की अध्यक्षता में बनाई गई थी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रो. मधुलिका अग्रवाल एवं रिटायर्ड आईएएस अफसर एसपी आर्य भी कमेटी के सदस्य थे। कमेटी को पूर्व कुलपति प्रो. बी हनुमैय्या के कार्यकाल में 2011 में 42 शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े प्रकरण की जांच करनी थी। बैठक में पता चला कि कमेटी के एक सदस्य एसपी आर्य ने जांच से अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं, कमेटी के बाकी सदस्यों की शिकायत थी कि उन्हें जांच से जुड़े समुचित दस्तावेज कई बार कहने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराए गए। सूत्रों की मानें तो बॉम के कुछ सदस्यों की भी शिकायत थी कि उन्हें एजेंडे के साथ पूरे दस्तावेज नहीं मिल पाते हैं और बार-बार कहने पर भी ठोस सुनवाई नहीं होती। फिलहाल कुलपति को जांच कमेटी के लिए तीसरा सदस्य नियुक्त करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सदस्य की नियुक्ति के एक महीने के भीतर कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। वहीं, विश्वविद्यालय की तरफ से कमेटी को जांच से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी अब डप्टी रजिस्ट्रार डी. जया बालाचंद्रन को दी गई है। सूत्रों की मानें तो दस्तावेज उपलब्ध कराने में कोताही बरतने वाले अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी फैसला हुआ है। प्रवक्ता डॉ. गोविंद पांडेय ने कमेटी में नए सदस्य रखने और दस्तावेज अधिकारी बदले जाने की पुष्टि की है। इधर, यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसे शिक्षक डॉ. कमल जयसवाल को जांच कमेटी ने क्लीनचिट दे दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें साजिशन फंसाए जाने की बात भी स्वीकारी है।
जिन पर सवाल उन्हीं को देने थे सबूत
दरअसल, बीबीएयू प्रशासन ने जांच कमेटी तो बनाई थी लेकिन कमेटी के समक्ष सबूत प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों को दे दी गई जिन पर स्क्रीनिंग में गड़बड़ी के आरोप थे। नियुक्ति के संदर्भ में हुई शिकायतों में कहा गया था कि विवि के स्टेट्यूट से लेकर रोस्टर एवं सेलेक्शन कमेटी तक में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। शिक्षकों की अर्हता तय करने की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू के हाथ में दे दी गई। कागजों में तो इस स्क्रीनिंग कमेटी को प्रशासनिक पक्षों को जांचने के लिए कहा गया था पर हकीकत में कमेटी एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स से लेकर नियुक्ति के शैक्षणिक पहलुओं को भी तय करती रही। ऐसे में कमेटी के साथ असहयोग की संभावनाएं पहले से ही बनी हुई थीं जो सच साबित हुईं।
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मई के आखिर में नए कोर्सेस में आवेदन
बॉम ने विश्वविद्यालय में नए सत्र के लिए प्रस्तावित कोर्सेस पर मुहर लगा दी है। इनके लिए आवेदन प्रक्रिया मई के आखिर में शुरू होगी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रॉस्पेक्टस को अंतिम रूप मिलने के बाद आवेदन प्रक्रिया खोल दी जाएगी।
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बीबीएयू के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) की बैठक शनिवार को कुलपति प्रो. आरसी सोबती की अध्यक्षता में हुई। बॉम के एजेंडे का सबसे अहम मसला शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बनी जांच कमेटी की रिपोर्ट था। बीबीएयू की आठ मार्च को हुई बॉम की बैठक में तीन सदस्यीय जांच कमेटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. समीन जयरामपुरी की अध्यक्षता में बनाई गई थी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रो. मधुलिका अग्रवाल एवं रिटायर्ड आईएएस अफसर एसपी आर्य भी कमेटी के सदस्य थे। कमेटी को पूर्व कुलपति प्रो. बी हनुमैय्या के कार्यकाल में 2011 में 42 शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े प्रकरण की जांच करनी थी। बैठक में पता चला कि कमेटी के एक सदस्य एसपी आर्य ने जांच से अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं, कमेटी के बाकी सदस्यों की शिकायत थी कि उन्हें जांच से जुड़े समुचित दस्तावेज कई बार कहने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराए गए। सूत्रों की मानें तो बॉम के कुछ सदस्यों की भी शिकायत थी कि उन्हें एजेंडे के साथ पूरे दस्तावेज नहीं मिल पाते हैं और बार-बार कहने पर भी ठोस सुनवाई नहीं होती। फिलहाल कुलपति को जांच कमेटी के लिए तीसरा सदस्य नियुक्त करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सदस्य की नियुक्ति के एक महीने के भीतर कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। वहीं, विश्वविद्यालय की तरफ से कमेटी को जांच से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी अब डप्टी रजिस्ट्रार डी. जया बालाचंद्रन को दी गई है। सूत्रों की मानें तो दस्तावेज उपलब्ध कराने में कोताही बरतने वाले अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी फैसला हुआ है। प्रवक्ता डॉ. गोविंद पांडेय ने कमेटी में नए सदस्य रखने और दस्तावेज अधिकारी बदले जाने की पुष्टि की है। इधर, यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसे शिक्षक डॉ. कमल जयसवाल को जांच कमेटी ने क्लीनचिट दे दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें साजिशन फंसाए जाने की बात भी स्वीकारी है।
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जिन पर सवाल उन्हीं को देने थे सबूत
दरअसल, बीबीएयू प्रशासन ने जांच कमेटी तो बनाई थी लेकिन कमेटी के समक्ष सबूत प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों को दे दी गई जिन पर स्क्रीनिंग में गड़बड़ी के आरोप थे। नियुक्ति के संदर्भ में हुई शिकायतों में कहा गया था कि विवि के स्टेट्यूट से लेकर रोस्टर एवं सेलेक्शन कमेटी तक में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। शिक्षकों की अर्हता तय करने की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू के हाथ में दे दी गई। कागजों में तो इस स्क्रीनिंग कमेटी को प्रशासनिक पक्षों को जांचने के लिए कहा गया था पर हकीकत में कमेटी एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स से लेकर नियुक्ति के शैक्षणिक पहलुओं को भी तय करती रही। ऐसे में कमेटी के साथ असहयोग की संभावनाएं पहले से ही बनी हुई थीं जो सच साबित हुईं।
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मई के आखिर में नए कोर्सेस में आवेदन
बॉम ने विश्वविद्यालय में नए सत्र के लिए प्रस्तावित कोर्सेस पर मुहर लगा दी है। इनके लिए आवेदन प्रक्रिया मई के आखिर में शुरू होगी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रॉस्पेक्टस को अंतिम रूप मिलने के बाद आवेदन प्रक्रिया खोल दी जाएगी।