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आम होगा खास

Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। मशहूर शायर मुनव्वर राणा की ये पंक्तियां आम के शौकीनों की आम के प्रति बेइंतहा चाहत बयां करती हैं। लेकिन इस सीजन शौकीनों को शायद बोतल वाले आम से ही अपनी प्यास बुझानी पड़े। वजह है आम की कम पैदावार। मौसम और संसाधनों की मार से आम की फसल बेहाल है। फलों के राजा आम का गढ़ कहे जाने वाले मलिहाबाद समेत प्रदेश की दूसरी मैंगो बेल्ट में इस सीजन 60 से 70 प्रतिशत तक उत्पादन गिरने की आशंका जताई जा रही है।
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करीब तीन लाख मीट्रिक टन होगा उत्पादन ः मैंगो बोर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष और राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड के निदेशक इंसराम अली के मुताबिक इस बार मलिहाबाद समेत उन्नाव के हसनगंज, सहारनपुर, बुलंदशहर, मेरठ और मुजफ्फर नगर सभी जगह आम की फसल खास नहीं हुई है। छोटी बेल्ट प्रतापगढ़, बाराबंकी और बिजनौर का भी कुछ ऐसा ही हाल है। पिछले सीजन में मलिहाबाद, माल और काकोरी में करीब 35 हजार हेक्टेअर में आम की फसल की गई थी। करीब साढ़े चार लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन हुआ था। इस बार यह 2.75 लाख से तीन मीट्रिक टन तक रहने की उम्मीद है। बागबान रफी अहमद का कहना है कि देश हो या विदेश सबसे ज्यादा डिमांड मलिहाबाद के दशहरी की रहती है। इस बार मलिहाबाद में ही आम का उत्पादन काफी कम है। इसके बनिस्बत माल में अच्छी पैदावार हुई है।
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कहीं मौसम तो कहीं संसाधन की मार ः उत्पादन कम होने की वजह अलग अलग हैं। पद्मश्री कलीमउल्ला खां का कहना है कि शुरुआत में बौर काफी अच्छी थी। लेकिन जाती ठंड के वापस आने, बेमौसम बारिश और फिर अचानक बढ़ी गर्मी ने फसल बिगाड़ दी। मौसम के बदलाव के चलते कल्ला जल्दी निकल आया। कल्ले ने फूल की ताकत खींच ली। इसके अलावा फसल को पानी भी अच्छे से नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से फल काफी कमजोर हैं और लगातार गिर रहे हैं। अगर आने वाले महीने में भी फसलों को पानी ढंग से नहीं मिला तो हालात और बुरे हो जाएंगे। बागबान सालिगग्राम का कहना है कि पूरे दिन में नाममात्र को कुछ घंटे की बिजली मिल रही है। यह फसल के लिए बुरे संकेत हैं। आम के कारोबार से जुड़े हमीद अहमद का कहना है कि फसल खराब होने की एक बड़ी वजह बाजार में बिक रहे नकली कीटनाशक भी हैं। जाने अनजान किसान इन्हें खरीद रहा है। जो फसल को बचाने के बजाए खत्म करने का काम कर रहे हैं।
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जून के पहले सप्ताह में आ जाएगी पकी दशहरी ः बागबान सालिगग्राम ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में पकी दशहरी बाजार में आ जाएगी। जबकि कच्ची दशहरी 20 मई के बाद ही बाजार में दिखाई देने लगेगी। मौजूदा फल एक से डेढ़ इंच के हो गए हैं। 35 से 40 दिन के अंदर ये तैयार हो जाएंगे। आम के कारोबार से जुड़े लोगों की माने तो कुल उत्पादन का 60 फीसदी दिल्ली के बाजार में, 20 फीसदी देश के दूसरे शहरों में और बाकी बचा 20 फीसदी लखनऊ और आसपास के इलाकों में बिकेगा। किसानों का कहना है कि बाहर बेचने में उन्हें ज्यादा मुनाफा है। इसलिए वे घरेलू बाजार के बजाए माल को बाहर भेजना पसंद करेंगे।
30 से 40 रुपये प्रति किलो तक बिकेगा आम ः खरीददारों ने बागों में खरीददारी शुरू कर दी है। पिछले वर्ष के 75 से 100 रुपये प्रति पेटी के मुकाबले इस बार 175 से 200 रुपये प्रति पेटी आम बिक रहा है। यानी बाजार में आम लोगों तक पहुंचने वाला आम 300 से 400 रुपये प्रति पेटी (पेटी दस किलो की होती है) तक बिकेगा। डाल का पका आम शायद ही आम लोगों तक पहुंचे। क्योंकि फल कमजोर होने के चलते ज्यादातर बागबान इस तैयारी में हैं कि उसे कच्चा ही बेच दें।
ये हैं किसानों की मांग
. कम से कम 15 से 18 घंटे बिजली मिले
. नकली पेस्टीसाइट्स बेचने वालों पर कार्रवाई हो
. नहरों में पानी छोड़ा जाए
. मैंगो बेल्ट के आसपास जूस फैक्ट्री का हो निर्माण, ताकि आम के मिलें अच्छे दाम
जुड़ा है लाखों लोगों का कारोबार ः आम के इस कारोबार से बागबानों के अलावा लाखों लोगों की रोजीरोटी जुड़ी है। इसमें पैकिंग का काम करने वाले और पैकिंग का सामान बेचने वालों की खासी संख्या है। कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों का धंधा ही इस आम के सीजन पर निर्भर है। इसके अलावा एक बड़ी संख्या में मजदूरों की रोजीरोटी भी इस धंधे से चलती है।

बिटिया की खुशबू से महकेगी कलीम की बगिया ! ः दिल्ली रेपकांड की बिटिया की खुशबू से पद्मश्री कलीम उल्ला खां की बगिया महक सकती है। दरअसल कलीम उल्ला खां की बगिया में आम का अनोखा पेड़ उगा है। करीब तीन साल की उम्र में ही इस पेड़ में फल आ गए हैं। जो अचरज की बात है। अपनी अनोखी पैदावार को देश की प्रमुख हस्तियों का नाम देने वाले कलीम उल्ला खां ने इस पेड़ का नाम महामहिम बीएल जोशी से साझा करने के बाद रखने की सोची है। उनका कहना है कि वह महामहिम से गुजारिश करेंगे की आम की अनोखी किस्म का नाम दिल्ली रेपकांड का शिकार बनी बहादुर बिटिया के नाम पर हो।
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