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फीस प्रतिपूर्ति में गोलमाल का खुलासा बना चुनौती

Lucknow Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व फार्मेसी कालेजों में अनुसूचित जाति के छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति में हुए लाखों रुपए के खेल में कार्रवाई फाइलों में दबकर रह गई। इस गोलमाल को उजागर करने केलिए हफ्ते भर की जांच में अफसरों ने नौ महीने गुजार दिए। नतीजा उसके बाद भी नहीं निकला। जांच में हीलाहवाली का आलम यह रहा कि नामित किए गए कई प्रशासनिक अधिकारी पड़ताल करने कालेजों तक नहीं पहुंच पाए हैं। इसके बावजूद अधिकारी जांच व कार्रवाई किए जाने की बात कहते हैं। प्रतिपूर्ति की फीस में लाखों के गोलमाल को लेकर राजधानी के तीन दर्जन इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व फार्मेंसी कालेज जांच के दायरे में हैं। समाज कल्याण विभाग से वित्तीय वर्ष 2011-12 की प्रतिपूर्ति धनराशि लेने के बावजूद छात्रों को न देने संबंधी शिकायतों पर जांच का आदेश गत वर्ष चार मई को डीएम ने दिए थे। एडीएम, एसडीएम सहित 19 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को कालेज आवंटित करने के साथ जांच पूरी करने के लिए हफ्ते भर का समय दिया था। हफ्ते भर की जांच पूरी होने के इंतजार में नौ महीने का समय गुजर गया। इस लंबी अवधि में भी एक कालेज की जांच पूरी नहीं हो पाई। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच का आदेश देने केबाद प्रशासन के अधिकारी ही उसे भूल गए। कई अधिकारी जांच के लिए संबंधित कालेजों तक पहुंच नहीं पाए हैं। जांच अधिकारी बनाए गए एक अपर नगर मैजिस्ट्रेट बताते हैं कि लगातार प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के चलते समय ही नहीं मिल पाया। जबकि जांच के लिए कई दिन का समय चाहिए। फीस प्रतिपूर्ति के भुगतान की असलियत का पता लगाने के लिए कई स्तर पर तथ्यों की पुष्टि करनी है। यही स्थित ज्यादातर जांच अधिकारियों की है। जिनकी प्राथमिकता दूसरे कार्य हैं। ऐसी हालात में प्रतिपूर्ति में हुए लाखों रुपए के खेल में कार्रवाई हो पाना संभव नहीं लगता। क्योंकि ऐसी ही जांच कराने के आदेश वर्ष 2011 में तत्कालीन डीएम अनिल सागर ने दिए थे। उन्होंने भी जिला प्रशासन सहित अन्य विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को कालेज आवंटित किए। अधिकारियों की व्यस्तता में जांच टलती रही और अंतत: वह फाइल की दाखिल दफ्तर हो गई। जबकि अनिल सागर ने जांच कराने का निर्णय सुलतानपुर रोड स्थित सरोज इंजीनियरिंग कालेज में उजागर हुए अनुसूचित जाति के छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति में एक करोड़ से अधिक के गोलमाल को देखते हुए दिया था। खुद डीएम का मानना था कि ऐसा गोलमाल दूसरे कालेज में भी हो सकता है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित कहते हैं कि जांच पूरी होने पर डीएम के निर्देश से अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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जब भी हुई जांच उजागर हुआ खेल ः प्रतिपूर्ति की फीस के भुगतान के संबंध में जब कालेजों के रिकार्ड खंगाले गए तब गोलमाल उजागर हुआ। ऐसी कार्रवाई एक्का-दुक्का कालेजों के खिलाफ विभागीय स्तर पर होती रही है। इसका हालिया उदाहरण सरोजनीनगर इलाके में बिजनौर रोड स्थित आर्यकुल कालेज आफ मैनेजमेंट और फार्मेसी कालेज हैं। इसके संबंध में मिली शिकायत पर जिला समाज कल्याण कार्यालय ने जांच की तो पता चला कि उक्त कालेज ने फीस प्रतिपूर्ति केनाम पर साढ़े 12 लाख रुपए का गबन किया है। इससे पहले एक शिकायत पर तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी केएस मिश्र की जांच में सरोज इंजीनियरिंग सहित दो कालेजों का गोलमाल सामने आया।

12 कालेज वापस कर चुके हैं फीस ः जांच में कई कालेजों के फंसने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि कार्रवाई के डर से 12 कालेज 44.94 लाख रुपए वापस करके खुद ही अपने कारनामों का खुलासा कर चुके हैं। यह धनराशि समाज कल्याण विभाग ने छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति की मदद में सबंधित कालेजों को दी थी। लेकिन उन्होंने दबाकर अपने पास ही रख लिए। जांच में फंसने की संभावना बनी तो दर्जनभर कालेजों ने पिछले वित्तीय वर्ष की फीस वापस करनी शुरू की। इससे कालेजों ने यह साबित कर दिया है कि वह लाखों रुपए दबाए बैठे थे। इसकेबावजूद ऐसे कालेजों के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा है क्योंकि उनके पास शैक्षिक सत्र पूर्ण होने के बाद भी छात्रों की फीस की भारी धनराशि अपने पास रखने का कोई आधार नहीं बनता है।

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