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फास्टफूड से दूरी बनाएगी दिल की सेहत

Lucknow Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। भारतीयों में दिल के लिए अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की कमी है। आराम तलब जीवन शैली और खान-पान में लापरवाही दिल की सेहत बिगाड़ रही है। ऐसी कई दवाएं हैं, जिससे अच्छे कोलेस्ट्राल को बढ़ाया जा सकता है लेकिन इन दवाओं का लंबे इलाज के बाद क्या असर है, इसके प्रमाण अभी नहीं है। राहत की बात ये है कि दिल के लिए बुरे कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करने की दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं। संजय गांधी पीजीआई द्वारा आयोजित 19वीं वार्षिक वैज्ञानिक संगोष्ठी और कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया यूपी चैप्टर कॉर्डिकॉन-2013 में शनिवार को ये जानकारी वाराणसी से आए डॉ. धर्मेंद्र जैन ने दी। डॉ. जैन ने बताया कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल के लिए नुकसानदेय है। देश में 50 से 60 प्रतिशत लोगों में एचडीएल (हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन) की कमी है। अभी तक ऐसी दवाएं नहीं आई है जिनसे एचडीएल बढे़ और एलडीएल (लो डेंसिटी लीपो प्रोटीन) को घटाया जा सके। सिर्फ व्यायाम और संतुलित खानपान ही अच्छे कोलेस्ट्राल को बढ़ाता है और एलडीएल को घटाता है। उन्होंने बताया कि अच्छा कोलेस्ट्रॉल का कम होना और टोटल कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का एक कारण कारण जीन भी है। एलडीएल के बढ़े हुए स्तर के कारण दिल को खून पहुंचाने वाली वाहनियों में वसा का जमाव हो जाता है। जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।
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पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के हेड प्रो.पी.के.गोयल ने बताया कि दिल के खून को पम्प करने की क्षमता में कमी से शरीर के सूजन और सांस फूलने की दिक्कत होती है। खून को पम्प करने की क्षमता में कमी से शरीर के विभिन्न जरूरी अंगों में जरूरत के अनुसार खून नहीं जा पाता है। ये दिल दिक्कत दिल में कड़ापन आ जाने के कारण होती है। दिल खून को पम्प करने के लिए फूलता और सिकुड़ता है। यदि दिल में कड़ापन आ जाए और खून को पम्प करने की क्षमता में कमी आ जाएगी। उन्होंने बताया कि वृद्धों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मरीजों में ये दिक्कत ज्यादा होती है। इसलिए हृदय के लचीलेपन की जांच होनी चाहिए। जिससे समय पर दिल की शुष्कता को कम कर बीमारी को गंभीर बनाने से बचाया जा सके। इससे पहले गोमतीनगर के एक होटल में आयोजित संगोष्ठी में डॉ. सत्येंद्र तिवारी, डॉ. आदित्य कपूर, डॉ.मंसूर हसन, डॉ.नकुल सिन्हा, नई दिल्ली से डॉ. एस राधाकृष्णन भी मौजूद थे।

हाइपरटेंशन की नई दवा जल्द ः हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए राहत की खबर है। जल्दी ही हाइपरटेंशन के इलाज की नई गाइड लाइन जारी हो जाएंगी। इसमें मरीजों को राहत देने वाली बात ये है कि इसमें मरीजों के इलाज के लिए कई नई दवाओं की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा कई पुरानी दवाओं को हटा दिया जाएगा। कॉर्डिकॉन-2013 के आयोजन सचिव व एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने ये जानकारी शनिवार को दी। डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि हाइपरटेंशन के इलाज की नई गाइड लाइन मई में न्यूयार्क में आयोजित जेएनसी-आठ (ज्वाइंट नेशनल कमेटी) की बैठक में जारी की जाएगी। उन्होेंने बताया कि साइलेंट किलर कहे जाने वाले हाइपरटेंशन के मरीजों में जागरूकता की कमी है। हर चौथा शहरी और 10वां ग्रामीण उच्च रक्तचाप की चपेट में है। इसके पीछे जीवनशैली में बदलाव और गलत खानपान सबसे बड़ा कारण हैं। यही कारण है युवा भी इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। यदि ऊपर का रक्तचाप 120 से 139 और नीचे का 80 से 89 के बीच हो तो ये प्री-हाइपरटेंशन की श्रेणी में आता है। ऐसे लोगों को भविष्य में हाइपरटेंशन होने की संभावना होती है। इसलिए तुरंत अपनी दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए। शरीर का वजन नियंत्रित रखना, फल-सब्जी आदि का सेवन करना, व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।



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