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गम-ए-हुसैन में स्याह हुआ माहौल
Lucknow
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। कर्बला के शहीदों की याद में शुक्रवार को अजादार फर्श-ए-अजा गम-ए-हुसैन में डूब गया। हर तरफ अजादार... स्याह माहौल में मजलिस और मातम में शिरकत करते नजर आए। मोहर्रम की पहली तारीख से अय्याम ए अजा की शुरूआत आतंक और दहशतगर्दी के विरुद्घ एकजुट होने के संकल्प के साथ हुई। इमामबाड़ा गुफरानमॉब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने पहली मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम विरोधी लोग शियकत के दुश्मन हैं। वह अजादारी की मुखालफत नहीं कर सके तो दीनी इदारों में पढ़ रहे युवाओं के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। मौलाना ने दीनी तालीम हासिल कर रहे युवाओं से अपनी जिम्मेदारियों को बाखूबी अंजाम देने की अपील की। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब व उनके अहलेबैत का जिक्र किया। मौलाना ने जब हजरत इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम की शहादत का बयान किया तो फर्श ए अजा पर मौजूद लोग रोने लगे। इमामबाड़ा जन्नतम्आब में मौलाना सैफ अब्बास ने कुरान और अहलेबैत पर मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि अल्लाह ने मुसलमानों को हिदायत के लिए हादी भेजा। जो आज भी मुसलमानों की पर्दा-ए-गैब से नुमाइंदगी कर रहे हैं। मौलाना ने जब हजरत मुस्लिम इबने अकील की कूफा शहर में आतंकियों द्वारा शहीद करने की घटना का वर्णन किया तो यहां आए अजादारों की आंखें छलक आईं।
इमामबाड़ा मदरसा नाजमियां में मौलाना हमीदुल हसन ने इस्लाम और इंसानियत के शीषर्क के साथ पहली मजलिस संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम को मानने वाले अपने कर्तव्यों को पहचान कर आतंक के विरुद्ध आवाज बुलंद करें। मौलाना ने कहा कि अजादारी का भारत से बहुत पुराना रिश्ता है। यहां की अजादारी सारी दुनिया के लिए मिसाल है। मौलाना ने कर्बला के शहीदों का जिक्र करते हुए हजरत इमाम हुसैन के मदीने से रुखसती का वाकया बयान किया। इसे सुनकर अजादार रोने लगे। इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि एकजुट होने से पहले मतभेदों की जानकारी होना जरूरी है। शिया पीजी कालेज में मौलाना आगा रूही ने मजलिस को संबोधित कर करबला के शहीदों को याद किया।
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इमामबाड़ा मदरसा नाजमियां में मौलाना हमीदुल हसन ने इस्लाम और इंसानियत के शीषर्क के साथ पहली मजलिस संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम को मानने वाले अपने कर्तव्यों को पहचान कर आतंक के विरुद्ध आवाज बुलंद करें। मौलाना ने कहा कि अजादारी का भारत से बहुत पुराना रिश्ता है। यहां की अजादारी सारी दुनिया के लिए मिसाल है। मौलाना ने कर्बला के शहीदों का जिक्र करते हुए हजरत इमाम हुसैन के मदीने से रुखसती का वाकया बयान किया। इसे सुनकर अजादार रोने लगे। इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि एकजुट होने से पहले मतभेदों की जानकारी होना जरूरी है। शिया पीजी कालेज में मौलाना आगा रूही ने मजलिस को संबोधित कर करबला के शहीदों को याद किया।
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