विश्वविद्यालय के आगे सूचना आयोग भी बौना

Lucknow Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। कानून की पढ़ाई कराने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय भी कानून तोड़ने वालों की सूची में शुमार है। सूचना का अधिकार कानून के उल्लंघन पर आयोग समय-समय पर लविवि पर करीब 2.5 लाख का जुर्माना लगा चुका है। वहीं, ज्यादा जुर्माने वाले अधिकारियों का तबादला भी हो चुका है। बावजूद, विवि प्रशासन ने न तो अभी तक जुर्माने की रकम जमा कराई है और न ही सूचना देने में आनाकानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। वर्ष 2010-11 में लविवि पर सूचना का अधिकार कानून तोड़ने के आरोप में राज्य सूचना आयोग ने 90 हजार रुपये का जुर्माना विवि के तत्कालीन रजिस्ट्रार जीपी त्रिपाठी पर लगाया गया। यह जुर्माना कुल पांच मामलों में सूचना न देने के पर लगाया गया था। तत्कालीन वित्त अधिकारी राज्यवर्धन पर भी इसी आरोप में 25 हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया। चार प्रकरणों में लविवि द्वारा तय किए गए जनसूचना अधिकारियों पर भी 65 हजार का जुर्माना आयोग लगा चुका है। पिछले साल मूल्यांकन में गड़बड़ियों को लेकर चले आंदोलन के बीच में ही एक छात्र की अपील पर तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त बृजेश मिश्र ने भी विवि के परीक्षा नियंत्रक रहे प्रो. यशवीर त्यागी पर कॉपी न दिखाने के मामले में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इन सब जुर्मानों की रकम जोड़ें तो यह 2 लाख 5 हजार रुपये होती है। आयोग ने कई बार इस रकम की वसूली के आदेश भी जारी किए, लेकिन विवि के अधिकारियों ने हठधर्मिता के कारण जुर्माना जमा नहीं कराया जबकि जीपी त्रिपाठी और राज्यवर्धन का तबादला भी हो गया। वहीं, प्रो. यशवीर त्यागी सत्र लाभ में चल रहे हैं। आयोग की वेबसाइट पर 31 मार्च 2011 तक करीब 10 मामलों में 1 लाख 80 हजार रुपये का बकाया दर्ज है। वहीं, इस बारे में विवि के अधिकारी भी बोलने से बच रहे हैं। उनके मुताबिक जुर्माना सूचना न देने वाले व्यक्ति पर लगाया जाता है। ऐसे में वह ही इस पर कुछ बोल सकेंगे।

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