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30 बसों पर सिटी का भार, तरस गए 60 हजार

Wed, 26 Jun 2013 01:03 PM IST
लखनऊ/नरेश शर्मा
लखनऊ/नरेश शर्मा Updated Wed, 26 Jun 2013 01:03 PM IST
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60000 commuters face heat due to bus strike

लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी के 400 संविदा ड्राइवरों एवं कंडक्टरों के कार्य बहिष्कार पर जाने के कारण मंगलवार को 120 में से महज 30 बसों का ही संचालन हुआ। इसके कारण शहर भर में 60 हजार लोग सिटी बस को तरस गए।

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30 बसों ने उठाया सिटी का भार
बेड़े की रोजाना चलने वाली 120 से 125 सिटी बस की संख्या घटकर 30 ही रह गई। इन बसों का सामान्य रूप से टर्मिनल से संचालन भी नहीं हुआ। ये बसें महानगर के गोल मार्केट से आलमबाग के अवध अस्पताल तक ही चली। इसके कारण इंजीनियरिंग कॉलेज, मुंशी पुलिया, बीबीडी, गोमतीनगर एवं पालीटेक्निक चौराहा, बादशाहनगर, आलमबाग, सरोजनीनगर, पीजीआई, रजनीखंड, दुबग्गा आदि जाने वाले लोगों को सिटी बस की सुविधा नहीं मिल सकी।

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एक सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के अनुसार करीब 60 हजार लोगों को परेशानी से गुजरना पड़ा। इसमें 30 हजार लोग तो एमएसटी धारक एवं 30 हजार अन्य यात्री शामिल हैं। वहीं 30 बसों कि संचालन से 30 हजार लोगों को सिटी बस की सुविधा मिली। कर्मचारी बस संचालन में व्यवधान न डाले इसके लिए प्रबंधन ने बसों को रिजर्व पुलिस लाइन से संचालन किया।
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ऑटो ऑपरेटरों ने जेब पर डाला डाका
सिटी बस का चक्का जाम होने के कारण ऑटो एवं टैंपो ऑपरेटरों ने मंगलवार को मनमाना किराया वसूलने की आड़ लोगों की जेब पर खूब डाका डाला। जो ऑटो एवं टैंपो रोजाना तय किराए के आधार पर लोगों को गंतव्य स्थान तक ले जाने का कार्य करते थे, उन्होंने मंगलवार को तय किराए से दो गुना तक किराया वसूला। वहीं ऑटो ऑपरेटरों ने तो लोगों को पूरा ऑटो बुक करने के लिए मजबूर कर दिया। इसकी एसोसिएशन पदाधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।


'नौ को नौकरी से निकाला गया'
ट्रांसपोर्ट कंपनी के दुबग्गा डिपो के तीन और गोमतीनगर डिपो के चार संविदाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनको नौकरी से निकालने की कार्रवाई चल रही है। वहीं पीआरडी से आए 50 से अधिक ड्राइवर एवं कंडक्टर को वापस कर दिया गया है। इसके लिए पीआरडी प्रबंधन को पत्र लिखकर इनके स्थान पर दूसरे पीआरडी जवानों की मांग की गई है।
ए रहमान, कार्यकारी  प्रबंध निदेशक, लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी

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