{"_id":"5ad8a90f4f1c1b82028b5454","slug":"6-year-jail-to-bank-watchman-in-fraud-on-bank-accounts","type":"story","status":"publish","title_hn":"खातों में हेराफेरी पर बैंक चौकीदार को हुई 6 साल की जेल, 32 साल बाद आया कोर्ट का फैसला ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खातों में हेराफेरी पर बैंक चौकीदार को हुई 6 साल की जेल, 32 साल बाद आया कोर्ट का फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 19 Apr 2018 08:05 PM IST
विज्ञापन
ब्रांच सील
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालत ने बैंक में खाते खुलवाने के नाम पर हेराफेरी करने और लोगों की रकम हड़पने के आरोप में बैंक चौकीदार को छह साल के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पर एक लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। आरोपी की पत्नी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। हेराफेरी के इस मामले की सुनवाई 32 साल तक सुनवाई के बाद यह फैसला आया है।
विज्ञापन
सिविल लाइन स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में जगदीश प्रसाद चौकीदार के पद पर कार्यरत था। जगदीश प्रसाद ने वर्ष 1978 में अपनी पत्नी के नाम से बैंक में खाता खुलवाया था। इसी आधार पर आरोपी ने 1981 में जगदीश प्रसाद की शिनाख्त पर जीत सिंह के नाम से बैंक में खाता खोला गया। कुछ समय बाद पड़ोसी गिरधारी लाल ने भी एक खाता खुलवाया गया। तीनों खातों में जगदीश प्रसाद के माध्यम से ही लेनदेन किया जाता था।
विज्ञापन
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी भूपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 24 जून 1986 को तत्कालीन लेखाकार को जगदीश प्रसाद की पत्नी के खाते में लेन-देन की प्रविष्टियों पर संदेह हुआ तो तीनों खातों की जांच की गई। जांच में पता चला कि तीनों खातों में 12 अगस्त 1985 से 22 जनवरी 1986 के बीच अलग-अलग तारीखों में जमा एवं भुगतान किया गया। इनकी जमा प्रविष्टियां फर्जी थीं। उन्हीं के आधार पर भुगतान लिया गया था। खातेदारों से संपर्क किया गया तो उन लोगों ने जमा और भुगतान से अनभिज्ञता जताई।
विज्ञापन
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी के मुताबिक 30 जुलाई 1986 को जगदीश प्रसाद और उसकी पत्नी सरोज के खिलाफ तत्कालीन शाखा प्रबंधक हरीश कुमार पाल ने सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्ट में 1986 से कोर्ट में मुकदमा चल रहा था। लगभग 32 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर दोषी मानते हुए जगदीश प्रसाद को छह वर्ष का कारावास और 1.20 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पत्नी सरोज को इस मामले में बरी कर दिया गया।