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वो क्रेडिट कार्ड का क्लोन बनाकर उड़ाता था पैसे
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 02 Jul 2013 12:06 PM IST
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इंटरनेशनल क्रेडिट व डेबिट कार्डों का क्लोन तैयार कर रकम उड़ाने वाले गिरोह का विकासनगर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय हैकर्स से जुड़े हैं। गिरोह के तीन सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।
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इनमें एक वकील, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर तो एक इंजीनियरिंग का छात्र है। जालसाजों के कब्जे से कोरिया से मंगाई गई प्रतिबंधित रीडर एंड राइटर मशीन के साथ अन्य चीजें बरामद हुई हैं। साइबर क्राइम सेल इंटरनेशनल हैकर्स का पता लगाने में जुटी है।
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बरामद हुए 25 इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड
एसएसपी जे रविंदर गौड ने बताया कि एसओ विकासनगर अशोक यादव की टीम ने एक होटल के बाहर घेराबंदी करके चित्रकूट निवासी वकील बालकृष्ण मिश्रा, जौनपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष कुमार सिंह व फतेहपुर निवासी सिविल इंजीनियरिंग के छात्र जयवर्धन शर्मा को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर गोमतीनगर क्षेत्र के होटल से रीडर एंड राइटर मशीन, लैपटॉप, नेट कनेक्टर, दो डॉटा कनेक्टर व विभिन्न बैंकों के 25 इंटरनेशनल क्रेडिट और डेबिट कार्ड बरामद किए गए।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर था मास्टरमाइंड
गिरोह का सरगना वकील बालकृष्ण है जो कंप्यूटर इंजीनियर आशीष से क्लोन तैयार कराता था। इंटरनेशनल क्रेडिट, डेबिट व एटीएम कार्ड के क्लोन तैयार करके रकम उड़ाने वाले जालसाजों में से एक वकील बालकृष्ण मिश्रा ने कबूला कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है और आशियाना क्षेत्र में भी उसका मकान है। डेढ़ साल पहले वाराणसी में एक समारोह में आशीष से मुलाकात हुई। पता चला कि राजधानी एक्सप्रेस के रिटायर्ड ड्राइवर का बेटा साफ्टवेयर इंजीनियर आशीष अपने परिवार के साथ मुंबई में रहता है।
इसके साथ फतेहपुर के एक इंस्टीट्यूट में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र जयवर्धन से भी जान पहचान हुई। तीनों ने कम मेहनत से मोटा माल कमाने पर विचार शुरू किया। आशीष ने इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड के क्लोन तैयार करके जालसाजी का सुझाव दिया। इंटरनेट के जरिए विभिन्न लोगों से संपर्क करके कोरिया से रीडर एंड राइटर मशीन मंगाई।
हैकर्स का पता लगाएगी साइबर क्राइम सेल
एसएसपी ने साइबर क्राइम सेल को लोगों के इंटरनेशनल क्रेडिट व डेबिट कार्ड का ब्योरा हैक करके जालसाजों को बेचने वाले विदेशियों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। जालसाजों के कब्जे से बरामद लैपटॉप से राज पता लगाने की कोशिश की जाएगी। हैकर्स का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित देशों व प्रदेशों की पुलिस से संपर्क किया जाएगा।
ऐसे तैयार करते थे क्लोन
तीनों ने कबूला कि विभिन्न बैंकों के क्रेडिट व डेबिट कार्ड जुटाए। इसके बाद आशीष ने इंटरनेट पर कई साइटों के जरिए विदेशी हैकर्स से संपर्क साधा। ये हैकर्स विभिन्न बैंकों के इंटरनेशनल क्रेडिट और डेबिट कार्ड का ब्यौरा जालसाजों को बेचते हैं। हैकर्स से विभिन्न व्यक्तियों के इंटरनेशनल क्रेडिट व डेबिट कार्ड के ट्रैक-वन व ट्रैक-टू के नंबर खरीदकर आशीष ने अपने पास मौजूद पुराने कार्डों को रीडर एंड राइटर मशीन में लगाकर उनका क्लोन तैयार किया।
वे मॉल्स, बड़े प्रतिष्ठानों व पेट्रोल पंप पर खरीदारी के बाद क्लोन को स्वैप कराकर भुगतान करते थे। जालसाजों ने इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन शॉपिंग भी की।