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मुजफ्फरनगरः गूंजी शहनाई, राहत शिविर में हुए 27 निकाह

Thu, 26 Sep 2013 11:41 AM IST
अमर उजाला, मेरठ
अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 26 Sep 2013 11:41 AM IST
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27 girls marriad in refuge camp of mujaffarnagar

उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद घर छोड़कर राहत शिविरों में रह रही 27 लड़कियों का एक साथ निकाह कराया गया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पहल पर सामूहिक विवाह की परंपरा के अनुसार हुए। मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने निकाह पढ़ाया। देश में अमन और चैन के लिए भी विशेष दुआ कराई गई।

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घर छोड़ राहत शिविरों में वक्त गुजार रहे परिवारों के लिए बुधवार का दिन बेहद खास रहा। मोहल्ला कस्सावान में शादी की खुशियां पसरी थी। यहां एक या दो नहीं बल्कि 27 बेटियों के निकाह की तैयारियों में हर शख्स जुटा हुआ था।
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कोई बारातों को खाना खिला रहा था तो कोई बेटियों को दिए जाने वाले सामान को सुरक्षित स्थान पर रखवा रहा था। दोपहर बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी, प्रदेश अध्यक्ष अशहद मदनी पहुंचे।
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दूल्हों को एक साथ बैठाकर रस्म अदा कराई। खुद मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने निकाह पढ़ाया। उन्होंने मुल्क के अमन-चैन की दुआ भी कराई। नवविवाहित जोड़ों के सुखद दांपत्य की दुआ में सैकड़ों लोग शामिल हुए।

दुल्हनों को दिए एक-एक लाख
बेघर हुई बेटियों को निकाह के बाद प्रदेश सरकार ने एक-एक लाख रुपये का तोहफा दिया। जमीयत ने दस-दस हजार रुपये दिए। यही नहीं सबके लिए घर की जरूरत का बराबर सामान खरीदा गया। मौके पर ही चेक वितरित किए गए।

निकाह की रस्म के बाद हाजी बाल्ले के घेर में प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में मौलाना सैय्यद अरशद मदनी और राज्यमंत्री आशु मलिक ने बेटियों के नाम चेक वितरित किए।

यही नहीं जमीयत ने घर की जरूरत का सभी सामन भी दिया। सोने-चांदी के एक-एक गहने के अलावा संदूक, सिलाई मशीन, कुर्सी-मेज, पंखा, बर्तन, कपड़े आदि भी दिए गए। मेवात से आए जमीयत के लोगों ने प्रत्येक बेटी को पांच-पांच सौ रुपये भी रुखसती के वक्त दिए।


ससुराल गई काकड़ा की 23 बेटियां
कसबे से सटे काकड़ा गांव की 23 बेटियों की एक साथ शादी हुई। अलग-अलग जगह से बारात पहुंची थी। पुरबालियान में हुए हमले के बाद अल्पसंख्यक लोगों ने काकड़ा छोड़ दिया था। जान की हानि तो उनके गांव में नहीं हुई, लेकिन आरोप है कि उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

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