जब वोट के लिए इंदिरा ने मानी कार्यकर्ताओं की बात
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एक मई 1978 की चिलचिलाती धूप। क्षेत्र में उपचुनाव का माहौल। सहावर रोड स्थित गांव मरथरा की सड़क पर गाड़ियों का काफिला। सैकड़ों महिलाओं-पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को घेरे खड़े थे। उनके सिर पर साड़ी का पल्लू, आंखों पर काला चश्मा था। नारे लगा रहे समर्थकों में पैर छूने की होड़ थी।
मैडम उनका हालचाल पूछ रही थीं। इसी दौरान कुछ महिलाओं ने इंदिरा गांधी के हाथ में दूध से भरा पीतल का बड़ा गिलास थमाते हुए पीने का आग्रह किया। सुरक्षा कर्मियों को रोकते हुए मैडम ने गिलास तो हाथ में ले लिया, लेकिन वे असमंजस में थीं। यहां मौजूद नेताओं ने समर्थकों का हौसला बढ़ाते हुए दूध पीने का आग्रह किया।
साथ ही कहा कि दूध पीने से 25 हजार वोट बढ़ जाएंगे। इस वाकये के चश्मदीद यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष दादा रवींद्र बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री ने न चाहते हुए भी कार्यकर्ताओं का दिल रखा और दो घूंट दूध पिया। नेताओं की बात पर चुटकी लेते हुए कहा ‘इतना दूध पीने से पांच हजार वोट तो बढ़ ही जाएंगे।’ इसके बाद सहावर स्थित नखाशा बाग में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित किया। सोरों-सहावर के उपचुनाव में मानपाल सिंह कांग्रेस प्रत्याशी थे।
‘दो पैन रखा करो’
सहावर की बैठक के बाद मंच से उतरते समय मोहसिना (वर्तमान सपा विधायक जीनत खान की बड़ी बहन) ने इंदिरा गांधी से आटोग्राफ का आग्रह किया। मंच का संचालन कर रहे रवींद्र ने इंक पैन बढ़ा दिया, लेकिन वह चला नहीं। इस पर पैन लौटाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा ‘दो पैन रखा करो।’ संस्मरण को यादगार बताते हुए दादा रवींद्र का कहना है कि उस दिन से ही वे जेब में दो पैन रखते हैं।