'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर से कंपनियों के खर्च में आई भारी कमी, कोरोना के बाद भी रह सकता है लागू!

विस्तार
नोएडा सेक्टर-58 में सॉफ्टवेयर कंपनी ‘एप इन्वेंटीव टेक्नोलॉजीज’ का ऑफिस इस समय सूना पड़ा हुआ है। लेकिन इसके बाद भी कंपनी का काम लगभग उसी तेज गति से चल रहा है जैसा कि वह कोविड-19 से पहले चल रहा था। ऐसा इस कारण संभव हो पा रहा है क्योंकि कंपनी के लगभग 550 सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, प्रोग्रामर और अन्य स्टाफ इस समय अपने घर से ही कंपनी का काम कर रहे हैं। स्टाफ के घर से काम करने से कंपनी को हर महीने लाखों की बचत हो रही है। इसे देखते हुए मैनेजमेंट इस बात पर विचार कर रहा है कि कोविड-19 का दौर खत्म हो जाने के बाद भी वह कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा देती रहेगी।

खर्च में भी भारी कटौती
एप इन्वेंटीव टेक्नोलोजीज के सीईओ सौरभ सिंह ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने कंपनी के काम के लिए 40 हजार स्क्वायर फीट जगह किराए पर ले रखी है। इसके लिए उन्हें प्रति माह 21 लाख रुपये का किराया चुकाना पड़ता है।
सभी कर्मचारियों के ऑफिस से काम करने के दौरान प्रतिमाह 4.5 से पांच लाख रुपये प्रति माह बिजली बिल का खर्च आता है। इसके अतिरिक्त इतने स्टाफ को चाय-पानी पिलाने, एडमिन की जिम्मेदारी संभालने के लिए 10 कर्मचारी और रखे गये हैं।
लेकिन जब से स्टाफ ने घर से काम करना शरू किया है, उनके ऑफिस का बिजली का बिल केवल एक लाख रुपये (वह भी फिक्सड चार्ज लेकर) आ रहा है। इसके आलावा अन्य खर्च में भी भारी कटौती हुई है।
इसे देखते हुए वे कोविड-19 की समस्या खत्म होने के बाद भी अपने स्टाफ में काफी लोगों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देंगे।
इस समय ही कंपनी ने अपने कर्मचारियों को अगले चार से छह माह तक घर से काम करने के लिए कह रखा है। कंपनी की रणनीति में यह बड़ा बदलाव है।
जानकारी के मुताबिक नोएडा, गुरुग्राम और एनसीआर की कई सॉफ्टवेयर कंपनियां इसी तरह की रणनीति पर काम कर सकती हैं।
कार्य की गुणवत्ता खरी
सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के कामकाज की प्रकृति ऐसी है कि अगर कोई कर्मचारी घर से भी काम कर रहा है, तो भी न सिर्फ यह तय किया जा सकता है कि कोई कर्मचारी सही समय पर काम कर रहा है या नहीं, बल्कि यह भी तय किया जा सकता है कि काम की गुणवत्ता किस प्रकार की है।
यही कारण है कि सभी कर्मचारी अपना सौ फीसदी देने की कोशिश कर रहे हैं और कंपनी को सौ फीसदी परिणाम मिल रहा है। कार्य की गुणवत्ता और ग्राहक की संतुष्टि की वजह से सॉफ्टवेयर कंपनियां इस कार्य पद्धति को आगे बढ़ाते रहने के लिए गंभीरता से विचार कर रही हैं।
लगभग एक तिहाई खर्च किराए-बिजली पर
विभिन्न कंपनियों के सीईओ का मानना है कि औसत या छोटे स्तर की कंपनियों की कुल लागत का 30 फीसदी तक का खर्च ऑफिस और इससे जुड़े कार्यों में हो जाता है। अगर ऑफिस का खर्च घटाया जा सके तो यह उनके लिए बड़ी राहत देने वाली बात होगी।
यही कारण है कि कंपनियां आने वाले समय में वर्क फ्रॉम होम कल्चर को आगे बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर सकती हैं।
ऑफिस में काम के बिना नहीं सीख सकेंगे कर्मचारी
दिल्ली के कस्तूरबा गांधी मार्ग पर स्थित ‘सिंट ग्रुप ऑफ कंपनीज’ में तीन सौ से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन की शुरुआत के साथ ही लगभग सभी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम माध्यम से काम कर रहे हैं।
हेल्थकेयर टेक्नोलोजी में काम करने वाली इस कंपनी का काम अच्छा चल रहा है, लेकिन इसके बाद भी कंपनी मैनेजमेंट इस सिस्टम को ज्यादा आगे बढ़ाने की इच्छुक नहीं है।
सिंट ग्रुप ऑफ कंपनीज की सीईओ मोनिका सेठ बताती हैं कि कर्मचारियों की लागत को बेहतर ढंग से इस्तेमाल करने के लिए किसी भी कंपनी में तीन कैटेगरी के स्टाफ रखे जाते हैं- अच्छे अनुभवी, माध्यम स्तर के अनुभवी और फ्रेशर या कम अनुभवी।
फ्रेशर या कम अनुभवी स्टाफ को कंपनी में रखकर उनके वरिष्ठ सहयोगियों के माध्यम से बेहतर काम लेने की कोशिश की जाती है।
लेकिन अगर हमेशा वर्क फ्रॉम होम कल्चर से काम को आगे बढ़ाया जायेगा, तो इससे नए कर्मचारी अच्छा काम नहीं सीख सकेंगे और यह उनके प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ कंपनी-इंडस्ट्री के लिए भी नुकसानदेह साबित होगा।
यही कारण है कि कंपनी कोरोना काल के बाद अपने ज्यादातर कर्मचारियों को ऑफिस बुलाकर काम लेने की बात सोच रही है।
मोनिका सेठ का मानना है कि इसके आलावा वर्क फ्रॉम होम केवल उन्हीं बड़ी या मझोले स्तर की कंपनियों में ही सफल हो सकता है जहां मॉनिटरिंग की बेहद विकसित विधि अपनाई जाती है। छोटे स्तर की कंपनियों या नये स्टार्टअप्स के लिए यह विधि कारगर नहीं हो सकती क्योंकि वहां इसकी उचित व्यवस्था विकसित नहीं होती।