ट्रंप से मिले टेक दिग्गज: एआई के विकास और नियमों पर हुआ मंथन; मस्क से लेकर जकरबर्ग तक, जानें किसने क्या कहा

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 30 Sep 2026 03:24 PM IST
सार

मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के दिग्गज टेक सीईओ के बीच एआई को लेकर एक ऐतिहासिक बैठक हुई। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलकर 'सुपर इंटेलिजेंस' रखा गया है। साथ ही, तकनीक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुंदर पिचाई, एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों ने 'फोर-लेयर ऑडिट' वाले एक अहम सुरक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में एआई के भविष्य और सुरक्षा पर टेक दिग्गजों ने अपनी बात रखी।

trump white house ai meeting tech leaders musk zuckerberg pichai amodei statements
व्हाइट हाउस में ट्रंप ने टेक लीडर्स के साथ की अहम बैठक। - फोटो : ANI

    विस्तार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और टेक इंडस्ट्री के कई बड़ी हस्तियों के साथ बैठक की। इसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई, एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग, ओपनएआई के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन और एक्सएआई के एलन मस्क शामिल थे। बैठक का फोकस एआई को आगे बढ़ाने और साथ ही उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर रहा। इसके साथ ही अमेरिका में एआई को अब एसआई यानी "सुपर इंटेलिजेंस" कहने पर फैसला लिया गया।

    ऐतिहासिक 'सेल्फ-रेगुलेशन पैक्ट' पर हस्ताक्षर

    बेकाबू एआई को लेकर दुनिया भर में उठ रही चिंताओं के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सभी टेक लीडर्स ने फ्रंटियर तकनीक पर मजबूत निगरानी रखने के लिए स्वैच्छिक सुरक्षा मानकों के एक समूह पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने इसे 'नैतिक रूप से बाध्यकारी' बताया है, जबकि दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि आगे चलकर जरूरत पड़ने पर इन उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    बैठक खत्म होने के बाद टेक लीडर्स ने पत्रकारों के सामने तकनीक के संभावित फायदों और उससे जुड़े जोखिमों पर अपनी बात रखी। आइए जानते हैं व्हाइट हाउस में जुटे टेक दिग्गजों ने एआई पर क्या-क्या कहा...

    एलन मस्क

    एक्सएआई (XAI) और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने 'सुपर इंटेलिजेंस' के भविष्य को लेकर एक बेहद सकारात्मक और उम्मीद से भरी तस्वीर पेश की। मस्क ने दावा किया कि एआई और रोबोट्स के आने से काम करने के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।

    उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इसका सबसे संभावित परिणाम ऐसा होगा जो अविश्वसनीय रूप से फायदेमंद है। अगर आप भविष्य में झांक सकें, तो यह बिल्कुल वैसा ही भविष्य होगा जिसकी आप कामना करेंगे।" मस्क का मानना है कि यह तकनीक रोजगार को खत्म करने के बजाय उसके स्वरूप को बेहतर बनाएगी।

    मार्क जुकरबर्ग

    मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने इस समझौते का स्वागत किया। जकरबर्ग ने कहा, "हम अमेरिकी लोगों और अपने ग्राहकों को यह पूरा भरोसा देना चाहते हैं कि यह तकनीक बिल्कुल उसी तरह काम करती है, जैसा हम चाहते हैं।"

    जुकरबर्ग ने बताया कि कंपनियां कई स्तरों वाली ऑडिटिंग और कंट्रोल व्यवस्था लागू करने पर सहमत हुई हैं। इसमें आंतरिक जांच के साथ बाहरी ऑडिट भी शामिल होंगे।

    जेंसन हुआंग ने सुरक्षा को बताया जरूरी

    एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग ने सुरक्षा को सबसे अहम रखते हुए तकनीक के विकास को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। हुआंग पहले भी सुपर इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया खत्म होने जैसी आशंकाओं को खारिज कर चुके हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक मानवता के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा, “इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा के बीच कोई टकराव नहीं है। हमें AI की क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए नई तकनीकें विकसित करनी होंगी, लेकिन इसके साथ ही AI की सुरक्षा बढ़ाने वाली नई तकनीकों पर भी काम करना होगा।”

    डारियो अमोदेई

    एआई से पैदा होने वाले खतरों के सवाल पर एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने मीडिया से कहा कि एआई जुड़े वास्तविक जोखिम मौजूद हैं। उनके मुताबिक एआई को नियंत्रण में रखने के लिए इंडस्ट्री, सरकार और दूसरी संबंधित ताकतों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, "यदि हम राष्ट्रपति समेत यहां मौजूद सभी लोगों की बातों पर अमल करते हुए काम करें तो हम सुरक्षित तरीके से सफलता हासिल कर सकते हैं।"

    ट्रंप ने बैठक को बताया खास

    टेक कंपनियों के सीईओ के साथ लंच मीटिंग के अंत में ट्रंप ने कहा, “हम सभी में एक बात समान है, हम अपने देश और दुनिया से प्यार करते हैं और चाहते हैं कि यह एक सुरक्षित जगह बनी रहे। आज हम जिस बारे में बात कर रहे हैं, वह दुनिया को बेहतर बनाने में मदद करेगा।”

    ट्रंप ने बैठक में शामिल लोगों की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि ये दुनिया के सबसे स्मार्ट लोगों में शामिल हैं और बैठक बहुत अच्छी रही। ट्रंप ने इस पूरे समझौते की तुलना लगभग एक ‘संविधान’ से भी की।

    चार स्तरों पर कंपनियों को तय करनी होगी सुरक्षा

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस समझौते के तहत उन सभी कंपनियों को अपने फ्रंटियर एआई मॉडल की ट्रेनिंग और तैनाती के दौरान मजबूत आंतरिक प्रक्रियाएं और कंट्रोल तैयार करने होंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक उम्मीद के मुताबिक काम करे और किसी समस्या का पता चलते ही उसे ठीक किया जा सके।

    • पहले स्तर पर कंपनियां ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट के दौरान अपने मॉडल की क्षमताओं और व्यवहार पर नजर रखेंगी। इसमें साइबर सिक्योरिटी, बायोसेफ्टी और केमिकल खतरों जैसे क्षेत्रों की निगरानी शामिल होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि AI मॉडल अनजाने में किसी तकनीकी सिस्टम को हैक या एक्सेस न करें।
    • दूसरे स्तर पर एक इंटरनल टीम बनाई जाएगी, जो यह देखेगी कि सभी कंट्रोल, मॉनिटरिंग और डिटेक्शन सिस्टम सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। किसी समस्या की पहचान होने पर उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था की होगी।
    • तीसरे स्तर पर कंपनियों को स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर या इवैल्यूएटर के साथ काम करना होगा। यह टीम अलग से आकलन करेगी कि सुरक्षा से जुड़े कंट्रोल और निगरानी व्यवस्था ठीक तरह से काम कर रही है या नहीं।
    • चौथे स्तर पर कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक स्वतंत्र कमेटी इन सभी प्रक्रियाओं की निगरानी करेगी। यह कमेटी इंटरनल टीम और बाहरी ऑडिटर की रिपोर्ट देखेगी और सामने आई समस्याओं के समाधान की निगरानी भी करेगी।

    व्हाइट हाउस ने कहा कि इन कंट्रोल और ऑडिट सिस्टम को लागू करना सभी के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम है और बैठक में शामिल टेक कंपनियां इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    क्यों अहम रही यह बैठक?

    मंगलवार की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब टेक इंडस्ट्री के कुछ प्रमुख लोग एआई के विकास की रफ्तार को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि अगर इस तकनीक का विकास बहुत तेजी से हुआ और पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं बनाए गए, तो भविष्य में इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

    अब इस समझौते के जरिए कंपनियों ने सुरक्षा के लिए कुछ स्पष्ट प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों पर सहमति बनाई है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी, जब सुपर इंटेलिजेंस तकनीक आगे बढ़ेगी और यह देखना होगा कि कंपनियां अपने वादों को व्यवहार में कितनी मजबूती से लागू करती हैं।

    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें