व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिले टेक दिग्गज: एआई पर नैतिक लगाम लगाने पर बनी सहमति, जानें बैठक की तीन अहम बातें

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 30 Sep 2026 01:25 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में ओपनएआई, गूगल, मेटा, एनवीडिया, एंथ्रोपिक और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के दिग्गजों के साथ एआई पर अहम बैठक की। इसमें एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए कंपनियों की जिम्मेदारी, डेटा सेंटर के विस्तार और एआई की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' जैसे शब्द इस्तेमाल करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। एआई पर इस बैठक से तीन बड़े संदेश मिले जो आने वाले समय में इस तकनीक की राह तय करेंगे।

elon musk sundar Pichai Dario amodei signs white house accord in super intelligence summit with Donald trump
व्हाइट हाउस में एआई के मुद्दे पर हुई अहम बैठक - फोटो : ANI

    विस्तार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी टेक और एआई कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक की। इसमें ओपनएआई, एंथ्रोपिक, एनवीडिया, स्पेसएक्स, मेटा और गूगल जैसी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। ट्रंप ने इसे अमेरिका के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक खास बैठक बताया। इस अहम बैठक में एक्स से एलन मस्क, मेटा से मार्क जुकरबर्ग, एनवीडिया से जेन्सेन हुआंग, एंथ्रोपिक से डारियो अमोदेई, गूगल से सुंदर पिचाई और ओपनएआई के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन शामिल थे। बैठक में अमेजन के जेफ बेजोस और पालांटिर के एलेक्स कार्प भी मौजूद थे। वहीं, मीटिंग की अध्यक्षता में डोनाल्ड ट्रंप के साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और हाउस स्पीकर माइक जॉनसन भी शामिल थे।

    'व्हाइट हाउस अकॉर्ड' पर लगी मुहर

    इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एआई के संभावित खतरों को देखते हुए इसकी सुरक्षा, विश्वसनीयता और जवाबदेही तय करना था। हाल के दिनों में एडवांस एआई मॉडल्स के बेकाबू होने और इंसानी नियंत्रण से बाहर जाने की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए, सरकार और टेक लीडर्स ने यह महसूस किया कि इस तकनीक पर एक नैतिक लगाम कसना बेहद जरूरी है। इस मीटिंग में 'व्हाइट हाउस अकॉर्ड' पर मुहर लगाई गई, जिसके तहत कंपनियों ने एआई से साइबर हमलों, जैविक हथियार के खतरों और अनधिकृत हैकिंग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा घेरे बनाने और स्वतंत्र ऑडिटिंग की जिम्मेदारी खुद ली।

    यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब कई टेक एक्सपर्ट्स इंसानियत के लिए एआई पर सख्त निगरानी की मांग कर रहे हैं। कुछ टेक एक्सपर्ट और इंडस्ट्री लीडर्स एआई पर ज्यादा सख्त नियमों की मांग कर चुके हैं। आइए जानते हैं व्हाइट हाउस में एआई दिग्गजों के साथ हुई इस अहम बैठक में एआई के क्षेत्र में कौन से फैसले लिए गए।

    1. एआई कंपनियां खुद संभालेंगी सुरक्षा की जिम्मेदारी

    • बंद कमरे में हुई इस मीटिंग के बाद ट्रंप ने टेक दिग्गजों के साथ मीडिया के सवालों के जवाब दिए। राष्ट्रपति ने एलान किया कि सभी एग्जीक्यूटिव्स ने एक नैतिक रूप से बाध्यकारी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जो एआई के खतरों से सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा। इस समझौते के तहत अब कंपनियां अपनी तकनीक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खुद जिम्मेदार होंगी।
    • सभी फर्म्स ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वे मॉडल्स को सही तरीके से काम करने और किसी भी तकनीकी खामी को तुरंत पकड़ने व सुधारने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करेंगी। साथ ही, वे 'स्वतंत्र ऑडिटर्स' के साथ मिलकर काम करेंगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके प्लेटफॉर्म अनजाने में किसी तकनीकी सिस्टम को हैक न करें।
    • इस ऐतिहासिक समझौते पर डोनाल्ड ट्रंप के अलावा गूगल के बॉस सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमदेई, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, ओपनएआई के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन, स्पेसएक्स के एलन मस्क और एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने साइन किए। ट्रंप ने इसे एक तरह का संविधान बताया और कहा कि वह एआई टूल्स की निगरानी के लिए एक सेफ्टी बोर्ड भी बनाएंगे। बता दें कि हाल ही में सुरक्षा चिंताओं के कारण ही ओपनएआई को अपना GPT-6.1 Astra मॉडल रद्द करना पड़ा था और उसके सिस्टम्स द्वारा ऑस्ट्रेलियाई सरकारी प्लेटफॉर्म्स तक अनधिकृत पहुंच की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    2. डेटा सेंटर्स के विस्तार पर जोर

    • मीटिंग का दूसरा बड़ा मुद्दा डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार रहा, जो एआई को पावर देने वाले सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर हैं। हालांकि, अमेरिका में ज्यादा बिजली खपत और स्थानीय समुदायों पर इसके असर को लेकर डेटा सेंटर्स का काफी विरोध हो रहा है। हाल ही में एक सर्वे में सामने आया था कि 65% रजिस्टर्ड वोटर्स अपने इलाके में डेटा सेंटर बनने के खिलाफ हैं।
    • इन चिंताओं को दूर करते हुए ट्रंप ने कहा कि ये बड़ी और अमीर टेक कंपनियां समुदायों के लिए बड़े पैमाने पर योगदान देंगी और लोगों को खुश कर देंगी। इससे पहले ट्रंप सोशल मीडिया पर कह चुके हैं कि समुदायों को डेटा सेंटर्स का विरोध तभी करना चाहिए जब वे पिछड़े और गरीब बने रहना चाहते हों। वहीं, एनवीडिया के चीफ जेन्सेन हुआंग ने डेटा सेंटर्स को 'सुपर इंटेलिजेंस फैक्ट्री' का नाम दिया और कहा कि ये सुविधाएं अमेरिका का फिर से औद्योगीकरण कर रही हैं।

    3. एआई की जगह अब 'सुपर इंटेलिजेंस'

    • ट्रंप प्रशासन ने एआई की शब्दावली में भी बदलाव किया है। मंगलवार को ही ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर भी हस्ताक्षर किए। इस आदेश के तहत अब सभी अमेरिकी सरकारी विभागों और एजेंसियों को 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'एसआई' या 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द का इस्तेमाल करना होगा। आधिकारिक पत्राचार, वेबसाइट्स और रिपोर्ट्स में अब एआई की जगह एसआई का उपयोग किया जाएगा।
    • ट्रंप का मानना है कि 'आर्टिफिशियल' शब्द इस तकनीक को नकली जैसा महसूस कराता है, जिसका जिक्र उन्होंने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी किया था। मार्क जुकरबर्ग और एलन मस्क जैसे टेक दिग्गज पहले ही इस नए टर्म का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नाम को व्यापक लोकप्रियता मिलना मुश्किल है, क्योंकि आमतौर पर इसका इस्तेमाल भविष्य के और भी अधिक एडवांस सिस्टम्स के लिए किया जाता है।

    क्यों अहम है ट्रंप का यह एआई समिट?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और टेक जगत के शीर्ष दिग्गजों के बीच व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक को अमेरिकी नीतियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने एआई पर सख्त सरकारी पाबंदियां लागू करने के बजाय कंपनियों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करने की छूट दी है।

    इस बैठक के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अमेरिका एआई के क्षेत्र में अपनी वैश्विक बढ़त बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कानूनों के बजाय टेक कंपनियों की विशेषज्ञता पर ही भरोसा जता रहा है, जो भविष्य की तकनीक के लिए एक बिल्कुल नया ढांचा तैयार करेगा।

    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें